वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने मंगलवार को कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में 7.1 प्रतिशत की दर से वृद्धि करेगी जबकि अगले दो वित्त वर्ष में यह बढ़कर 7.7 प्रतिशत तक रहेगी।
दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू और जामिया के सैकड़ों छात्र और शिक्षक मंगलवार को विश्वविद्यालयों को एबीवीपी के आक्रमण और विरोध को दबाने के खिलाफ सड़कों पर उतरे। लेफ्ट संगठनों के विरोध मार्च का जवाब देने के लिए डूसू और एबीवीपी ने 2 मार्च को प्रदर्शन करने का फैसला किया है।
दिल्ली में तीन दिन का सार्क साहित्य उत्सव शुरू हो गया है। सभी सार्क देशों की उपस्थिति है सिवाय पाकिस्तान के। यह उत्सव सार्क लेखकों के लिए फाउंडेशन ऑफ सार्क राइटर एंड लिटरेटर (एफओएसडब्लूएएल) और विदेश मंत्रालय के सौजन्य से हो रहा है।
दिल्ली के सरकारी स्कूलों की किशोर छात्राओं को मासिक धर्म पर शिक्षित करने के उद्देश्य से एक एनजीओ स्कूलों में पीरियड टॉक आयोजित करने जा रहा है, जिसमें छात्राओं को मासिक धर्म से संबंधित बराबर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब दिये जायेंगे।
देश के सबसे बड़े रेलवे स्टेशन नई दिल्ली पर सुविधाओं को लेकर रेलवे ने काफी सारे दावे किए थे। लेकिन इन दावों की अब धीरे-धीरे पोल खुलती जा रही है। यहां की सुविधाओं को लेकर देश के साथ-साथ विदेशी यात्रियों का फीडबैक भी अच्छा नहीं है।
नई दिल्ली म्यूनिसपल कारपोरेशन एनडीएमसी के वाइस चेयरपर्सन करण सिंह तंवर का कहना है कि आज के बदलते और प्रतिस्पर्धी युग में मीडिया का कार्य काफी चुनौती भरा है। तंवर ने यह भी कहा कि तमाम जटिलताओं के बीच भी मीडिया और उससे जुड़े लोग अपना शत प्रतिशत देकर समाज का सच सामने ला रहे हैं।
देश के शैक्षणिक परिसरों में अध्यापकों के अभाव की समस्या नयी नहीं है। लेकिन सूचना के अधिकार :आरटीआई: से खुलासा हुआ है कि आईआईटी जैसे शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थान भी इससे जूझ रहे हैं। देश के 23 आईआईटी में शिक्षकों के औसतन लगभग 35 प्रतिशत स्वीकृत पद खाली पड़े हैं।
उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 1997 में हुए उपहार अग्निकांड मामले के संबंध में रियल एस्टेट दिग्गज गोपाल अंसल को एक साल कारावास की सजा सुनाई। इस त्रासदीपूर्ण घटना में 59 लोग मारे गए थे।
ऑस्ट्रेलिया के गिरजाघरों में बाल यौन शोषण संबंधी एक जांच के जो आकंड़े सामने आए हैं वह चौंकाने वाले हैं और उनका बचाव नहीं किया जा सकता। इनसे पता चलता है कि वर्ष 1950 से 2010 के बीच सात फीसदी कैथोलिक पादरियों पर बाल शोषण के आरोप लगे थे लेकिन इनकी कभी जांच नहीं की गई।