Home नज़रिया
नज़रिया

संकटग्रस्त पाकिस्तान में न्यायपालिका की निडरता

वैसे तो पाक पहले ही समस्याओं से घिरा है लेकिन हाल की घटनाओं से स्थिति ज्यादा विकट पाकिस्तान के सेना...

धर्म, बाजार, राजनीति और संस्कृति का कुमेल

“आज हिंदी प्रदेश सांस्कृतिक दृष्टि से सर्वाधिक संकटग्रस्त हैं, जिसकी जड़ें अस्सी के दशक से ही गहरने...

अप्रत्याशित विस्मृति और संस्कृति संकट

‘बदला सब, बदला बिलकुल’  करीब एक सदी पहले आयरिश कवि डब्ल्यू.बी. यीट्स ने 1916 के ईस्टर विद्रोह की हिंसा,...

अजीत पवार ने चाचा से जो सीखा, उन्हीं पर आजमाया

एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजीत पवार के निर्णय ने भाजपा खेमें में उम्मीद जगाते हुए देवेंद्र फड़नवीस को...

जेएनयू जैसे विश्वविद्यालय को मजूबर किया जाता है कि वे बाकी राष्ट्र से अलग हट जाएं

इन दिनों यदि आप जेएनयू में प्रस्तावित फीस बढ़ोतरी पर कोई भी खबर या इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर कोई लेख...

हैरान करने वाला फैसला

करीब दो महीने पहले माहौल में एक समय के एक अदद राज्य जम्मू-कश्मीर के घटनाक्रमों और लंबित नागरिकता...

संतुलित समीक्षा जरूरी

सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों- प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायाधीश एस.ए. बोबडे, न्यायाधीश डी.वाई....

फैसले का फलसफा

लगभग तीन दशकों से भारतीय राजनीति को मथ रहे अयोध्या विवाद को खत्म करने का फैसला सुप्रीम कोर्ट की पांच...

संवैधानिक मर्यादाएं दरकिनार

“कश्मीर से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले ही सरकार ने नियुक्त किए...

सरकार मिली जनादेश नहीं

“भाजपा को समझ में आ गया होगा कि हमेशा भावनात्मक मुद्दे काम नहीं आते, लेकिन विपक्ष का मुगालते में रहना...

न्यायपालिका द्वारा अपनी ड्यूटी की अनदेखी

आजकल देश में न्यायपालिका अपनी सत्ता, अपना अधिकार क्षेत्र, अपना मैदान और यहां तक कि अपना कर्तव्य, सब...

नोबेल पुरस्कार और छात्र राजनीति

पिछले कई वर्षों से देश के विश्वस्तरीय शिक्षा संस्थान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के खिलाफ...

गांधी प्रासंगिक कैसे नहीं

अब समय आ गया है कि हम खुद से पूछें, “क्या हम गांधी के लायक हैं?” जवाब है नहीं महात्मा गांधी भारत के...

गांधी आर्थिकी से ही बदलेगी दुनिया

  गांधीवादी विचार लोकतंत्र, पर्यावरण सुरक्षा और समता की स्‍थापना के लिए मौजूदा बाजारवादी...