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कृषि विधेयक और उस पर राजनीति

संसद में पारित हुए किसानों से सम्बंधित तीन विधेयकों ने कोरोना काल में घरों में सिमटी-सिकुड़ी राजनीति...

1962 जैसी जंग के आसार?

“चीन का अति महत्वाकांक्षी नेतृत्व सीमा पर जिस तरह की परिस्थितियां पैदा कर रहा है, उसे देखते हुए क्या...

तिब्बत नीति का राज

“वाजपेयी ने तिब्बत को चीन का हिस्सा मान लिया था, मोदी के पास उस फैसले की समीक्षा का मौका” निरुपमा...

...प्रवासी मजदूर वोटबैंक होता!

“आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं क्योंकि देश की सियासत में उन्हें किसी ने वोट बैंक नहीं समझा” आधिकारिक...

फेक न्यूज चलाने वालों ने माफी तक नहीं मांगी: इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायण का नजरिया

“बात 1994 की है, जब इसरो जासूसी केस शुरू हुआ था।” बात 1994 की है, जब इसरो जासूसी केस शुरू हुआ था। जिस तरह से...

सुशांत सिंह राजपूत नशेबाज; यह न्याय है या अन्याय?

ये सब सुशांत सिंह राजपूत के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए किया गया। लेकिन, विडंबना यह है कि जून में...

मीडिया नियमन प्राधिकरण बने

“मीडिया नियमन प्राधिकरण के पास बिजनेस और संपादकीय सामग्री दोनों के नियमन का अधिकार हो” “मीडिया...

मीडिया आजाद है!

“बिजनेस के तौर-तरीकों ने जनता के बीच मीडिया की साख पर सवाल खड़े किए” न कोई मीडिया मुगल है, न ही मीडिया...

अलविदा एक युग, अनेक राज

मोटे तौर पर कहें तो देश के राजनीतिक नेता हमेशा घनिष्ठता से बचते हैं। यह बात दिवंगत प्रणब मुखर्जी पर भी...

शर्मिंदगी का सबब

जीवन के ज्यादातर समय मुझे पत्रकार होने पर गर्व रहा है, सिवाय उन लम्हों के जब प्रमोशन में देरी हुई या...

निचले स्तर पर टेलीविजन पत्रकारिता

मेरा मानना है कि सुशांत सिंह राजपूत पर की जा रही टेलीविजन पत्रकारिता काफी तुच्छ, बेसिर-पैर और खतरनाक...

महादलित नेता मांझी की एनडीए में वापसी: चुनावी माहौल में नीतीश को मिली बड़ी बढ़त

जैसा कि कहते हैं 'राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होते।' राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन में...

राहत इंदौरी: बड़े शायर का विदा होना

“राहत साहब मुशायरों के बादशाह थे” राहत साहब से मेरा करीब 20 साल का करीबी संबंध रहा है। हमने साथ में कई...

आओ, पिंजरे में बंद तोता बनो

“प्रशासनिक सेवा में पेशेवराना रुख घटा, अधिकारियों को स्थिरता प्रदान न करना सबसे बड़ी चुनौती” आधी...