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प्रथम दृष्टि/ परीक्षा घोटाला: जब मेधा बेमानी लगे

“हर वर्ष दस छात्र भी गैर-कानूनी तरीके से आइआइटी जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में दाखिला लेने...

नजरिया: गरीब छात्रों की हकमारी न करें, धोखाधड़ी के कारण पिछड़ जाते हैं मेहनती मगर निर्धन छात्र

“बिना योग्यता के कॉलेज में दाखिला लेना आपको भी दुख देगा और हमेशा आपके ऊपर दबाव बना रहेगा” अभी...

श्रीकांत तिवारी का जादू: मनोज बाजपेयी पर अपर्णा पुरोहित का नजरिया

“कमतर व्यक्ति मत बनो!” इस सलाह ने श्रीकांत तिवारी को दूसरों से अलग बना दिया। कुछ कहानियां विचार के...

मेरा दोस्त मेरा उस्ताद: मनोज बाजपेयी पर देवाशीष मखीजा का नजरिया

“मनोज में वह खासियत है कि रिश्ते को एक्टर-डायरेक्टर के दायरे से आगे ले जाते हैं” अभिनेता मनोज के...

प्रथम दृष्टि / ओटीटी का गणतंत्र: अब यह जरूरी नहीं कि ओटीटी का सुपरस्टार बांद्रा से ही आए, वह बिहार के बेलवा से भी आ सकता है

“अब यह जरूरी नहीं कि ओटीटी का सुपरस्टार बांद्रा से ही आए, वह बिहार के बेलवा से भी आ सकता है” साल भर...

मनोज बाजपेयी को अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं पंकज त्रिपाठी, पढ़ें उनका यह विशेष लेख

“उनका सफर बताता है कि सफलता और स्टारडम हासिल करने के बावजूद सामान्य रहा जा सकता है” फिल्म...

अतीत के ध्वंस का समारोह

दुनिया के किसी भी लोकतंत्र में ऐसा नहीं हुआ जैसा भारत में हो रहा है। सभी लोकतांत्रिक देशों में चुनाव के...

घुमंतू समुदायों को आज़ादी कब मिलेगी?

आज 31 अगस्त को घुमंतू समुदायों का विमुक्ति दिवस है। पिछले दिनों बूंदी (राजस्थान) में बारिश ने पूरे जीवन...

मोहब्बत यदि इंसानी शक्ल अख़्तियार करती तो यकीनन अमृता प्रीतम जैसी होती

अमृता प्रीतम यानि रूहानी इश्क़, आज़ादी, अपनी शर्तों पर जीने वाली बेफिक्र फितरत की मिटटी से गढ़ी गयी...

क्या भूलूं, क्या याद करूं?

मुझे एकदम प्रारंभ में ही कह देना चाहिए कि मैंने इस आलेख का शीर्षक बच्चनजी से नहीं लिया है। मुझे तो याद...

झारखंड में असीम संभावनाएं: हेमंत सोरेन

झारखण्ड अपने कोयले से देश को रोशन करता आया है। इसके साथ- साथ अन्य क्षेत्रों में भी झारखण्ड अपनी असीम...

प्रथम दृष्टि: किसका अफगानिस्तान? तालिबान, जिहादी ताकतों, कुछ पड़ोसी मुल्कों या चार करोड़ अवाम का...

“तालिबान की हुकूमत की वापसी भारत या किसी अन्य देश के लिए नहीं, बल्कि अफगानिस्तान की अवाम के हित में भी...

विमर्श : लोकतंत्र का रूपवाद

"आजादी के 75वें वर्ष में क्या संसदीय लोकतंत्र का रूप ही बचेगा और उसकी अंतर्वस्तु से पल्ला छुड़ा लिया...

प्रथम दृष्टि : खस्ताहाल स्कूल

“आज सरकारी स्कूलों में सिर्फ उनके बच्चे पढ़ते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति निजी विद्यालयों की फीस भरने...