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नज़रिया

प्रथम दृष्टि: टू-मिनट साहित्य!

दो वर्ष पहले जब कादंबिनी और नंदन का प्रकाशन बंद हुआ तो सोशल मीडिया पर आंसुओं का सैलाब थमने का नाम नहीं...

लिव इन अपराध: धर्म नहीं, स्त्री-चश्मे से देखें

“हत्या का कारण ‘लिव-इन रिलेशन’ पर थोप कर कहीं हम अपना पल्ला तो नहीं झाड़ रहे?” आफताब ने अमानवीयता...

प्रथम दृष्टि: ब्लू टिक की महिमा

“किसी को ब्लू टिक मिले न मिले, ट्विटर को यह तो आश्वस्त करना ही चाहिए कि कोई अकाउंट नकली न हो।...

नजरिया: पदयात्रा राहुल या राजनीति की!

“पदयात्रा ने राहुल गांधी को बदल दिया है, जनता में देश की राजनीति बदलने के सपने को फिर जगा दिया है,...

मैनेजर पांडेय: स्वतंत्रता और सामाजिकता पर जोर देने वाला आलोचक

हिंदी भाषा और साहित्य के विद्वान प्रोफेसर मैनेजर पांडेय (1941-2022) का रविवार को दिल्ली स्थित आवास पर देहांत...

प्रथम दृष्टि: सर्व शिक्षा ऑनलाइन!

“आज इंटरनेट से छात्र किसी भी शैक्षणिक संस्थान के बेहतरीन शिक्षक से वर्चुअल क्लास के जरिए पढ़ सकते...

भारतीय कला एवं संस्कृति के प्रसार में हिंदी की भूमिका

हिंदी से ही संभव है भारतीय कला एवं संस्कृति का वैश्विक विस्तार      भारत प्रारंभ से ही कला एवं...

प्रथम दृष्टि: टाइगर जिंदा नहीं है!

  “कोई बाघ इंसानी बस्तियों में रहने का आदी हो गया है या इंसानों ने अपने स्वार्थ के लिए उसकी बस्ती का...

50वां न्यायाधीश और 75 साल का भारत

संगीत में कुछ है ऐसा रहस्य कि जब आप शिखर पर पहुंचते हैं तो वह वहां आपकी बांह थामने को खड़ा मिलता है। वहां...

गांधी जयंती: जो तोड़ने से भी न टूटे वही गांधी है

गांधी सारी दुनिया में हैं-मूर्तियों में! एक जानकारी बताती है कि कोई 70 देशों में गांधीजी की प्रतिमा लगी...

गांधी जयंती: जाति पर सबसे करारी चोट गांधी की

. "वन में जातिवाद, जातिगत भेदभाव, जाति और हिंदू धर्म से जुड़ी कुरीतियों का स्थान लगभग नहीं, जातिगत जड़ता...

प्रथम दृष्टि: कंटेंट ही संजीवनी

“वह दौर गुजर गया जब सितारों की लोकप्रियता के कारण बुरी फिल्में सफल हो जाती थीं” बॉलीवुड के सितारे...

सहजानंद: भारत रत्न के प्रबल दावेदार

भारत के प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्न" से...

नजरिया: सुशासन में भी अव्वल

  “गिरमिटिया मजदूर से बड़े बिजनेसमैन तक, कैरिबियाई देशों में बदल रही भारत की छवि” दूर देशों में...


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