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कला-संस्कृति

“हालात नोटबंदी काल के संकट से भी ज्यादा गंभीर”

करीब दो महीने के देशव्यापी लॉकडाउन ने करोड़ों लोगों का रोजगार छीन लिया है। अब जब लॉकडाउन में चरणबद्ध...

सरल-सलोनी हिंदी की बात

राजभाषा सेवा से जुड़े होने के कारण आलोचक और गीतकार डॉ. ओम निश्चल हिंदी से बहुत गहरे जुड़े रहे हैं।...

आर्थिक नीतियों की हकीकत

सरकार आर्थिक नीतियां किसके लिए बनाती है? कहने को तो इसमें समाज के हर वर्ग को शामिल किया जाता है, लेकिन...

इरफान के एनएसडी के दोस्त की जुबानी, शादी से लेकर एक्टर बनने तक की कहानी

“इरफान को मैं उसी तरह याद कर रहा हूं जैसे कोई अपने दिल के सबसे करीबी को याद करता है। जिस तरह के किरदार...

बॉलीवुड ही नहीं विश्व सिनेमा को भी नुकसान, हर चरित्र को अपना बना लेते थे इरफान

बॉलीवुड सितारों और सुपरस्टार से भरा हुआ है। 100 करोड़ रुपए और पॉवर जो प्रतिभा के साथ या बिना प्रतिभा...

राजनीतिक मुठभेड़ की कविताएं

सत्तर के दशक में नक्सलबाड़ी आंदोलन की रोशनी और वाम विश्वासों की छाया में जब मंगलेश डबराल ने अपनी कविता...

पुत्र के संपादन में भवानी भाई

प्रख्यात कवि भवानी प्रसाद मिश्र का जन्म 29 मार्च 1913 में होशंगाबाद जिले के नर्मदा तट पर स्थित ग्राम...

'लॉकडाउन के बीच महाभारत, 1988 में प्रसारण के वक्त सड़कों पर होता था कर्फ्यू जैसा माहौल'

फैल रही महामारी कोरोना वायरस और 14 अप्रैल तक लागू लॉकडाउन के बीच करीब 33 साल बाद एक बार फिर दूरदर्शन पर...

बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री निम्मी का 88 साल की उम्र में हुआ निधन

बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री निम्मी का उनके घर पर निधन हो गया है। वो 88 साल की थीं और काफी लंबे समय...

घोर अज्ञान के बीच लटकी नागरिकता

मुझे पिछले कुछ दिनों से सर सिरील रेडक्लिफ याद आ रहे हैं। श्रीकांत वर्मा की एक कविता की पंक्ति है, ‘मैं...

नफरत विहीन समाज का खोजी

हिंदी के यशस्वी लेखक कृष्ण बलदेव वैद 92 साल की उम्र में इस दुनिया से विदा हो चुके हैं। उन्होंने अंतिम...

प्रसिद्ध साहित्यकार गिरिराज किशोर का निधन, पद्मश्री से थे सम्मानित

मशहूर साहित्यकार और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित गिरिराज किशोर का आज सुबह कानपुर में निधन हो गया। वह...

“मुझे खुशी है कि मैंने इस उम्र में भी चुनौती ली”

अभिनेता-निर्देशक अमोल पालेकर ने 25 साल बाद फिर नाटकों में वापसी की। लक्ष्मी देब राय ने उनसे नाटकों में...

किताबों से दोस्ती का मंच

आधुनिकता की दौड़ में आज आदमी अपने पुरखों की समृद्ध थाती से महरूम होता जा रहा है। हमारे बच्चे नानी के...