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कर्नाटक चुनावों ने देश की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला दिया, एकतरफा जीत का रुझान बदला, गठजोड़ों की सियासत के द्वार खुले
हरिमोहन मिश्र

चार साल में किसानों और युवाओं की नाराजगी बढ़ी, 2019 के चुनाव में भाजपा को पेश आ सकती है मुश्किल, लेकिन ‌अभी भी विकल्पहीनता की स्थिति
संजय कुमार

देश में मिलावटी खाना और पानी से बीमारियां बेइंतहा बढ़ने लगीं, खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदार एफएसएसएआइ का तंत्र रोकथाम में नाकाम, सख्त कानून और पारदर्शी तंत्र की फौरी दरकार
विजय सरदाना

सत्ता हासिल करने के लिए निजी सूचनाओं में सेंधमारी और जनमत बनाने-बिगाड़ने के खेल में सोशल मीडिया और आइटी कंपनियां बनीं राजनीतिक पार्टियों की औजार
अजीत सिंह

केंद्र और अधिकांश राज्यों में सरकार वाली भाजपा के सामने सत्ता विरोधी लहर से उबरने की चुनौती है तो विपक्षी दल नए सियासी गठजोड़ की नई संभावनाएं टटोल रहे हैं
जयशंकर गुप्त

पूर्वोत्तर के तीन राज्यों खासकर त्रिपुरा के नतीजों के व्यापक राजनैतिक असर अवश्यंभावी
हरिमोहन मिश्र

‘विकास’ के ‘अच्छे दिन’ घोटालों के करोड़ों से खरबों में पहुंचने के दिनों में बदल रहे हैं, क्षमता के अनुकूल रोजगार के वादे पकौड़ापरक रोजगार में बदल रहे हैं, और मध्यवर्ग बेचारा बना ‘विकास’ की मार झेल रहा है
पुरुषोत्तम अग्रवाल

नौकरियों का संकट बढ़ा तो एजुकेशन लोन बनाने लगा छात्रों को डिफॉल्टर, तीन साल में 51 फीसदी तक बढ़ गया एनपीए, अभिभावक और छात्र करने लगे कर्ज लेने से तौबा, लिहाजा देश के युवाओं को उच्च शिक्षा के प्रति आकर्षित करके बेहतर जिंदगी का सपना दिखाने के लिए धूम-धड़ाके से प्रचारित योजना सरकारी अदूरदर्शिता और कामचलाऊ रवैए की भेंट चढ़ गई
अजीत झा और चंदन कुमार


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