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चर्चाः समानान्तर राजनीतिक सत्ता की कमाई

चर्चाः समानान्तर राजनीतिक सत्ता की कमाई

विजय पताका लिए सेनापति दो वर्षों की अवधि में तीन सेनाओं के नेतृत्व का दावा कर रहे हैं। ऐसा चमत्कार तो रामायण-महाभारत काल या विक्रमादित्य और सम्राट अशोक के शासनकाल के युद्ध में भी पढ़ने-सुनने को नहीं मिलता। भारतीय लोकतंत्र में नेहरू-इंदिरा गांधी-राजीव गांधी, नरसिंह राव, अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में सत्ता और संगठन के साथ विचारधाराओं के आधार पर जन समर्थन की सफलता-विफलता देखने को मिली। राव-मनमोहन राज और अटलजी की सत्ता के अंतिम दौर में ‘शाइनिंग इंडिया’ से जुड़ी राजनीतिक टीम और पर्दे के पीछे मोटी रकम देकर सर्वेक्षणों एवं विज्ञापनों की एजेंसियों की सहायता ली गई। लेकिन मोदी युग में समानान्तर राजनीतिक सत्ता का एक नया केन्द्र उभरकर आया। भाजपा, आर.एस.एस. एवं इससे संबद्ध विभिन्न संगठनों, स्वामी रामदेव के लाखों समर्थकों, नए-पुराने नेताओं के धुआंधार प्रचार के बावजूद मोदी-भाजपा की सफलता का श्रेय ‘राजनीतिक प्रचार प्रबंधक’ प्रशांत किशोर ने लिया।
'मोदी, अशोक के बाद दूसरे बड़े शासक’ - प्रो. लोकेश चंद्र

'मोदी, अशोक के बाद दूसरे बड़े शासक’ - प्रो. लोकेश चंद्र

प्रोफेसर लोकेश चंद्र शास्त्रीय यूनानी, लैटिन, चीनी, जापानी, पारसियों की अवेस्ता, पुरानी फारसी और सांस्कृतिक महत्व की अन्य भाषाओं के ज्ञाता हैं। वह संस्कृत, पालि और प्राकृत भाषा के विद्वान हैं। उनके नाम 596 कार्य और पाठ संस्करण हैं। उनमें से तिब्बती-संस्कृत शब्दकोश, तिब्बती साहित्य के इतिहास के लिए सामग्री, तिब्बत का बौद्ध प्रतिमा विज्ञान और 15 खंडों में बौद्ध कला का उनका शब्दकोश जैसी कालजयी कृतियां हैं। उन्होंने बुद्ध और शिव तथा भारत एवं जापान के बीच सांस्कृतिक संगम पर भी लिखा है। फिलहाल वह भारत और चीन के बीच पिछले दो हजार वर्षों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर लिख रहे हैं। लाहौर में पंजाब विश्वविद्यालय से सन 1947 में स्नातकोत्तर करने वाले प्रोफेसर चंद्र भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् के अध्यक्ष हैं। साथ ही वह भारतीय संस्कृति की अंतरराष्ट्रीय अकादमी, एशियाई संस्कृतियों के लिए एक प्रमुख अनुसंधान संस्था के मानद निदेशक हैं। वह सन 1974 से 1980 और 1980 से 1986 तक दो अवधियों में लिए राज्यसभा से संसद सदस्य भी रह चुके हैं। प्रोफेसर चंद्र ने आउटलुक की सहायक संपादक आकांक्षा पारे काशिव से देश और प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं पर बात की।
राष्ट्रपति का महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने पर जोर

राष्ट्रपति का महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने पर जोर

संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई प्रतिनिधित्व प्रदान करने वाले विधेयक को पारित कराने का आह्वान करते हुए राष्ट्रपति का प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह विधयेक अब तक संसद में पारित नहीं हो सका है और इसे पारित कराना सभी राजनीतिक दलों का दायित्व है क्योंकि इस विषय पर उनकी प्रतिबद्धता इसे अमलीजामा पहनाकर ही पूरी की जा सकती है।
सरकार अब एएमयू को साधने तैयारी में, राष्ट्रपति ने रजत शर्मा का नाम खारिज किया

सरकार अब एएमयू को साधने तैयारी में, राष्ट्रपति ने रजत शर्मा का नाम खारिज किया

ऐसा लगता है हैदराबाद यूनिवर्सिटी और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के बाद केंद्र सरकार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) पर नकेल कसने की तैयारी में है। लेकिन एएमयू पर उसका पहला दांव ही खाली गया जब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा एएमयू की कार्यकारी परिषद की एक सीट के लिए इंडिया टीवी के सीईओ रजत शर्मा और विजनन भारती के प्रमुख विजय पी. भटकार के नाम वाली फाइल वापस कर दी। राष्ट्रपति कार्यालय से कुछ और नामों पर विचार करने की सलाह दी गई है।
मोदी का पलटवार, हीन भावना के कारण नहीं चलने दिया जा रहा संसद

मोदी का पलटवार, हीन भावना के कारण नहीं चलने दिया जा रहा संसद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने भाषण में कांग्रेस नेतृत्व पर करारा हमला किया। राहुल गांधी की ओर से बुधवार को खुद पर किए गए प्रहारों का करारा जवाब पीएम मोदी ने राजीव गांधी, इंदिरा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के उद्धरणों का इस्तेमाल करते हुए दिया।
मोदी सरकार की योजनाओं की धज्जियां उड़ाईं राहुल ने

मोदी सरकार की योजनाओं की धज्जियां उड़ाईं राहुल ने

लोकसभा में बुधवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष बहुत आक्रामक मुद्रा में नजर में आए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि मोदीजी प्रधानमंत्री का मतलब पूरा देश न समझें। मोदी सरकार की योजनाओं की धज्जियां उड़ाते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने काला धन योजना को फेयर एंड लवली योजना तक करार दे दिया।
नए किशोर कानून पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार

नए किशोर कानून पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार

उच्चतम न्यायालय ने एक कांग्रेस नेता की ओर से दाखिल उस जनहित याचिका पर सुनवाई से शुक्रवार को इनकार कर दिया जिसमें हाल ही में पारित किशोर कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। हाल में पारित किशोर कानून में प्रावधान किया गया है कि यदि 16 साल और उससे ज्यादा उम्र के किशारों पर बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराध के आरोप लगते हैं तो उन पर वयस्कों पर लागू होने वाली धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।
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