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निर्भया फिल्म: उडविन को प्रतिबंध हटने का भरोसा

निर्भया पर बनी विवादित फिल्म की ब्रितानी फिल्मकार का कहना है कि सामूहिक बलात्कार पर बनी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर भारत का प्रतिबंध बहुत लंबा नहीं चलेगा। यह विचार फिल्मकार लैस्ली उडविन ने अमेरिका में पीटीआइ-भाषा के सामने व्यक्त किया।
निर्भया फिल्म: उडविन को प्रतिबंध हटने का भरोसा

उन्होंने कहा, भारत एक लोकतांत्रिाक देश है जो दरअसल एक सभ्य राष्ट्र है। हालांकि हालिया प्रतिबंध इसके बारे में विपरीत राय जाहिर करते हैं, जो कि लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ यानी कि अभिव्यक्ति की आजादी पर एक धब्बे की तरह है। यह प्रतिबंध अस्थायी है। यह ज्यादा लंबे समय तक टिकने वाला नहीं है। नागरिक मूल्यों की जल्द वापसी होगी, प्रतिबंध को हटाया जाएगा और मुझे उम्मीद है कि जब इस तरह की मानसिकता खत्म हो जाएगी तब वे अपने शर्म को छुपाने के बजाय दुनिया की औरतों की सुरक्षा पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करेंगे।

बर्बर तरीके से सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा पर बनी डॉक्यूमेंट्री को अमेरिका के बरूच कॉलेज में दिखाया गया, जिसमें ऑस्कर विजेता अभिनेत्री मेरिल स्टीप, अभिनेत्री फ्रीडा पिंटो और भारतीय अभिनेता-निर्माता फरहान अख्तर ने अपनी पत्नी अधुना के साथ शिरकत की।

उडविन को उनकी डॉक्यूमेंट्री के कारण काफी विरोध का सामना करना पड़ा। भारत में इस डॉक्यूमेंट्री पर रोक लगाई गई है। लोगों का कहना है कि फिल्म ने बलात्कार के अभियुक्त मुकेश सिंह के विचारों को प्रदर्शित करने का मंच प्रदान किया है। डॉक्यूमेंट्री में सिंह को कोई पछतावा होता नहीं दिखता।

उडविन ने आरोप लगाया कि सिंह ने बलात्कार और उसकी पीडि़ताओं को लेकर जो भी बयान दिए हैं वे कुछ भारतीय नेताओं के बयान से खास अलग नहीं हैं।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, यह कैसा ढोंग है कि मुकेश के बयान को मंच मुहैया कराने को लेकर हायतौबा मचाई जा रही है जबकि भारतीय नेता आये दिन बिल्कुल यही बात कहते हैं। यह किसी समाज की मानसिकता को दर्शाता है और इस साक्षात्कार से मुझे यह पता चला।

उडविन ने बार बार दोहराया कि डॉक्यूमेंट्री का मकसद यह कभी नहीं रहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के भारत के रिकॉर्ड पर अकेले उसे ही जिम्मेदार ठहराया जाए।

उडविन ने कहा, फिल्म का मकसद बेहद सकारात्मक तरीके से भारत को खास रूप में पेश करना था क्योंकि मेरे जीवन में यह एकमात्रा ऐसा देश रहा है जो एक महीने के लंबे समय तक इसके खिलाफ खड़ा रहा। हर रोज पुरूष और महिलाओं का विशाल हुजूम अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर रहा था।

उडविन ने कहा, यही कारण था कि इस फिल्म को बनाने के लिए मैं भारत आई। यदि दुनिया के किसी भी हिस्से में इस तरह का कोई भी प्रदर्शन होता और उस पर इस तरह से प्रतिक्रिया हुई होती तो मैं वहां जरूर जाती।

उन्होंने कहा कि वह भारत में उन प्रदर्शनकारियों के लिए सम्मान, प्रशंसा और उनके प्रति कृतज्ञता दिखाने के लिए आई थीं जो दुनिया के दूसरे छोर पर उनके लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।

उडविन ने डॉक्यूमेंटी के लिए सिंह या साक्षात्कार के लिए किसी अन्य को धन देने के आरोप को खारिज किया।

उन्होंने कहा, मैंने इसके लिए एक रुपया भी खर्च नहीं किया। मैं एक ईमानदार शख्स हूं। जो भी इस तरह का झूठ बोल रहे हैं वे मुझे बदनाम करने और इस अभियान को कलंकित करने की कोशिश कर रहे हैं। वे ऐसे लोग हैं जिनका कोई ईमान नहीं है। सच हमेशा ही झूठ,

अंधकार और अज्ञानता से ऊपर रहता है।

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