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विश्व पुस्तक मेले में रौनक

किताब प्रेमी हर साल इन्तज़ार करते हैं कि कब किताबों का मौसम आएगा और वे न सिर्फ किताबों की दुनिया में खो जाएंगे बल्कि भागम भाग के इस दौर में कुछ पल किताबों की जिल्द की छांव में सुस्ता भी लेंगे। पुस्तक मेला नएपन के लिए जाना जाने लगा है।
विश्व पुस्तक मेले में रौनक

इस वर्ष 14 फरवरी से 22 फरवरी तक के नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला की थीम पूर्वोत्तर है। इसका सूत्र वाक्य है, सूर्योदय : पूर्वोत्तर भारत का उभरता स्वर। इस बार पुस्तक मेले का अतिथि देश सिंगापुर है। किताबों पर भारी छूट होने और सर्दी का मिजाज सुधर जाने से से भी यह संख्या बढ़ने का अनुमान है। इस बार प्रकाशकों ने पदचापों की संख्या में भारी बढ़ोतरी की तैयारी पहले से कर ली।

राजकमल, वाणी, सामयिक, हिंद युग्म आदि प्रकाशकों ने खास तौर पर पुस्तक मेले के लिए नई-नई किताबें पाठकों के लिए तैयार कराई हैं। राजकमल प्रकाशन ने जहां लघु प्रेम कथा (लेप्रक) शृंखला की शुरुआत की है वहीं सामयिक प्रकाशन ने लगभग हर विधा में पाठकों को किताबें मुहैया कराने की पहल की है। लेप्रक फेसबुक पर लिखी छोटी-छोटी कहानियां हैं, जिनमें पहली किताब एनडीटीवी के रवीश कुमार की है। इश्क में शहर होना नाम से यह किताब पाठकों को बहुत भा रही है।

कहानियां पढ़ने को उत्सुक पाठकों का एक अलग ही वर्ग होता है। सामयिक प्रकाशन के महेश भारद्वाज कहते हैं, ‘हमने कोशिश की है कि नए-पुराने कहानीकारों का सही तालमेल हो और पाठकों को अच्छी कहानियां पढ़ने को मिलें। इस के तहत हम कमल कुमार, तेजेन्द्र शर्मा जैसे सुपरिचित कहानीकारों के साथ इंदिरा दांगी जैसे नए कथाकारों की पुस्तक भी प्रकाशित कर रहे हैं।’

लेप्रक शृंखला की शुरुआत के बारे में राजकमल प्रकाशन के अशोक माहेश्वरी ने बताया, ‘यह शृंखला खास तौर पर युवा पीढ़ी को समर्पित है। इन कहानियों में हर युवा को अपनी झलक मिल रही है। यही वजह है कि ऑनलाइन में भी इसे खूब प्रतिसाद मिल रहा है। हमने 17 जनवरी को अमेजन डॉट कॉम पर इस किताब की बिक्री शुरू की थी और अब तक इसकी 15 हजार से ज्यादा प्रतियां बिक चुकी हैं। आगे हम विनीत कुमार और गिरीन्द्रनाथ झा की पुस्तकें प्रकाशित करेंगे।’ इस तरह के नए और अनूठे प्रयोग को पाठक भी हाथों हाथ लेते हैं और प्रकाशकों को भी अपने नए प्रयोग पर गर्व होता है। लेप्रक ऋंखला का विचार राजकमल के संपादक सत्यानंद निरुपम का है।

वाणी प्रकाशन की अदिति माहेश्वरी ने पुस्तक मेले के बारे में बताया, ‘पुस्तक मेले का उत्साह पाठकों के साथ हमारे स्टाफ को भी रहता है। यही वजह है कि हम हर साल पुस्तकों की इतनी रेंज तैयार कर पाते हैं और पाठकों के लिए नई सौगात ला पाते हैं। मैं इस साल की बात करूं तो हमारे पास पारंपरिक विषयों से लेकर नए विषयों तक हर तरह की किताबें मौजूद हैं। इस बार नए पुराने लेखकों की पुस्तकें पाठकों के लिए तैयार हैं।’

विश्व पुस्तक मेला कई मायनों में अनूठा रहता है। यहां सिर्फ पढ़ाकू लोग ही शिरकत नहीं करते, बल्कि दूर-दराज से ऐसे लोग भी आते हैं जो सिर्फ अपने चहेते लेखकों से मिलने, उन्हें सुनने आते हैं। नेशनल बुक ट्रस्ट हर साल एक लेखक मंच बनाता है और सभी लेखक इस मंच पर होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करते हैं।

इस मंच की सार्थकता इसी बात से समझी जा सकती है कि एक घंटे के कार्यक्रम के लिए महीनों पहले से ट्रस्ट के पास आवेदन आने लगते हैं। इस मंच पर साहित्य और साहित्येतर, दोनों तरह की गतिविधियों के लिए जगह है। नेशनल बुक ट्रस्ट के हिंदी विभाग के संपादक डॉ. ललित किशोर मंडोरा की इस मंच के कार्यक्रमों पर पूरी नजर है ताकि कार्यक्रमों का तालमेल कुशल हो।

हिंद युग्म प्रकाशन ने भी इसक मेले के लिए खास तैयारी की थी। प्रकाशन के चर्चित लेखक किशोर चौधरी का तीसरा कहानी संग्रह इस बार मेले में आया है। हर बार की तरह उनकी पुस्तक हाथों हाथ बिक रही है। इस पुस्तक को ऑनलाइन भी अच्छा प्रतिसाद मिला है। इसके अलावा ‌इस साल की सबसे चर्चित किताब बनारस टॉकीज है। सत्य व्यास ने बहुत ही खूबसूरत ढंग से इसे लिखा है। एक रवानी के साथ उपन्यास चलता है। यह पुस्तक मेला की मायनों में खास है जो बहुत दिनों तक याद रह जाएगा। 

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