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'शहरी भारत में कामकाजी महिलाओं की अब भी है कमी'

MAR 17 , 2017
भारत ने देश के शहरी इलाकों के कार्यबल में महिलाओं की काफी कम भागीदारी में सुधार की जरूरत बताते कहा कि दुनिया भर में प्रभावी महिला सशक्तिकरण को लेकर अब भी काफी चुनौतियां हैं।

संयुक्त राष्‍ट्र राजदूत के उप स्थायी प्रतिनिधि तनमय लाल ने कहा कि अनुमानित तौर करीब 12 करोड़ भारतीय महिलाएं ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत हैं जो कि कुल महिला कार्यबल का 80 प्रतिशत हिस्सा है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में कुल कामगारों का तकरीबन 30 प्रतिशत है।

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यूएन कमीशन ऑन स्टेटस ऑफ वूमेन के सत्र को संबोधित करते हुए लाल ने कहा कि शहरी भारत में महिला कामगारों की भागीदारी दर काफी कम है और इसमें सुधार की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए कई अहम कदमों को लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया में महिला अधिकारों को व्यापक मान्यता मिली और कार्यान्वयन किया गया जबकि उनके प्रभावी सशक्तिकरण को लेकर अब भी काफी चुनौतियां हैं।

लाल ने रेखांकित किया कि भारत टिकउ विकास को हासिल करने के लिए महिलाओं का उच्चतर स्तर पर सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है।

लाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस संदेश को उद्धृत किया कि महिलाओं का बहु कार्य कौशल ही उनकी शक्ति है। लाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा है कि महिलाओं के सशक्तिकरण के बिना मानवता का विकास अधूरा है और मुद्दा महिलाओं का विकास नहीं रहेगा बल्कि महिलाओं की अगुवाई में विकास होगा।

लाल ने सत्र को बताया कि भारत में इंदिरा गांधी से लेकर प्रतिभा पाटिल तक महिलायें राष्‍ट्र और शासन प्रमुख रह चुकी हैं।

देश के कई राज्यों में महिलाओं ने मुख्यमंत्री के तौर पर सेवा दी है जबकि सुमित्रा महाजन संसद के निचले सदन की मौजूदा अध्यक्ष हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में महिलाएं जमीनी स्तर पर राजनीतिक नेत्रियों और कार्यकर्ताओं के तौर पर सक्रिय हैं। भाषा


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