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राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, ‘ईरान पर अभी तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगा रहा है अमेरिका’

NOV 05 , 2018

ईरान पर अमेरिका के नए प्रतिबंधों को लागू होने में बस कुछ घंटे ही बचे हैं कि इससे ठीक पहले अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन प्रतिबंधों को अभी तक के सबसे कड़े प्रतिबंध करार दिया है। ईरान पर ये प्रतिबंध 5 नवंबर से लागू हो जाएंगे।

समाचार एजेंसी एएनआइ के अनुसार ट्रंप ने कहा ईरान पर लगने बड़े प्रतिबंध बहुत कठोर हैं। हम देखेंगे कि इनसे ईरान पर क्या फर्क पड़ेगा। हालांकि अभी वे (पहले से लगे प्रतिबंध) ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।“ उन्होंने आगे कहा “मेरे आने से पहले लगता था कि ईरान पूरे पश्चिम एशिया पर अपनी धाक बना रहा था लेकिन मेरे आने के बाद देखिए, अब ईरान के बारे मे कोई बात नहीं कर रहा है। हम जो प्रतिबंध लगाने जा रहे हैं वे अभी तक के सबसे कठोर प्रतिबंध हैं। हम देखेंगे कि क्या होता है।“

शुक्रवार को ही उन्होंने खुद की गेम ऑफ थ्रोन की तस्वीर ट्वीट की थी, जिसमें लिखा था (ईरान के लिए जल्द ही) “प्रतिबंध आ रहे हैं।“

इससे पहले व्हाइट हाउस की ओर से इस बात की पुष्टि की जा चुकी है कि साल 2015 परमाणु समझौते के संदर्भ में तत्कालीन राष्ट्रपति ओबामा द्वारा हटाए गए प्रतिबंधों को ‘फिर से’ लगाया जा रहे है।

उस समय अमेरिका ने ईरान पर शिपिंग, तेल निर्यात, ऊर्जा और वित्तीय आदि प्रतिबंध लगाए थे।

ईरान के साथ पी-5+1 देशों का समझौता
ईरान के साथ पी-5+1 देशों से परमाणु समझौता किया था जिसमें सुरक्षा परिषद के पांच देशों के अलावा जर्मनी भी शामिल था। इस समझौते के अनुसार ईरान ने अपने करीब नौ टन संबर्धित यूरेनियम भंडार को कम करके 300 किलोग्राम तक करने की शर्त स्वीकार की थी। इसके साथ ही ईरान यूरेनियम रूस को देगा और सेंट्रीफ्यूजों की संख्या घटाएगा। बदले में रूस ईरान को करीब 140 टन प्राकृतिक यूरेनियम येलो-केक के रूप में देगा जिसका उपयोग परमाणु ऊर्जा से चलने वाले बिजली घरों में होता है।

ट्रंप ने अमेरिका को अलग किया
राष्ट्रपति चुनाव से पहले ही ट्रंप इस समझौते का विरोध करते आए थे। फिर जब वे राष्ट्रपति चुने गए तो उन्होंने मई 2018 में इस समझौते से अलग होने की घोषणा कर दी। हांलाकि समझौते में शामिल अन्य देशों ने अमेरिका के इस फैसले से असहमति प्रकट कर चुके हैं।

भारत पर भी पड़ सकता था असर
पहले ट्रंप प्रशासन ने ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट रूप से भारत से ईरान से कच्चे तेल के आयात को कम करने के लिए कहा था लेकिन भारत अपने रुख पर डटा रहा, परिणाम स्वरूप अमेरिका ने भारत को ईरान पर लगने वाले इन प्रतिबंधों से छूट दे दी है।


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