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चीन में लोकतंत्र की आवाज नोबेल पुरस्कार विजेता लू श्याबाओ का निधन

JUL 13 , 2017
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता लू श्याबाओ के निधन से चीन में लोकतंत्र समर्थकों को गहरा धक्का लगा है।

चीन के नोबेल पुरस्कार विजेता लू श्याबाओ का गुरुवार को 61 साल की उम्र में निधन हो गया है। कैंसर पीड़ित नोबेल पुरस्कार विजेता लू श्याबाओ को 11 साल की सजा सुनाई गई थी। उनके खराब स्‍वास्‍थ्‍य को देखते हुए उनके विदेश में इलाज कराने की अनुमति देने को लेकर चीन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ रहा था। गौरतलब है कि सरकारी असपताल की ओर से उनकी हालत मृत्यु के निकट बताए जाने के बाद ऐसा हो रहा था।

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अमेरिका और जर्मनी ने 61 वर्षीय लेखक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की थी। लू श्याबाओ का इलाज कर रहे अस्पताल ने बुधवार को कहा था कि उनके अंग ने काम करना बंद कर दिया है और उन्हें सांस लेने में दिक्कत आ रही है। लू श्याबाओ को लीवर का कैंसर था।

शेनयांग के पूर्वोत्तर शहर में चाइना मेडिकल यूनिवर्सिटी के फर्स्ट हॉस्पीटल के मुताबिक डॉक्टरों ने बताया था कि लू को जीवित रखने के लिए कृत्रिम वेंटिलेशन पर रखना होगा, लेकिन उनके परिवार वालों ने मना कर दिया। लेखक की मौत से चीन में मानवाधिकारों की आवाज उठाने वालों को भारी क्षति हुई है।

मानवाधिकार संगठनों ने लू के स्वास्थ्य के बारे में निष्पक्ष खबरों की कमी की निंदा की थी और अधिकारियों पर खबरों से छेड़छाड़ कर जानकारी देने का आरोप भी लगाया। संगठनों का कहना था कि भारी सुरक्षा कर्मियों से लैस अस्पताल की वेबसाइट उनके स्वास्थ्य पर सूचनाओं का एकमात्र स्रोत है।


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