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लुटियन दिल्‍ली का ललितगेट अौर आस्‍तीन के सांप

शुरू में जो मामला विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के परिवार और ललित मोदी के आपसी संबंधों की कहानी लग रहा था, उसमें बीजेपी की आन्तरिक राजनीति का कोण तब जुड़ गया जब बीजेपी के सांसद और क्रिकेट की राजनीति के माहिर कीर्ति आज़ाद ने 'आस्तीन के सांप' की बात कर दी। लोग सांप तलाशने लगे क्योंकि आस्तीन के बारे में सब को पता था।
लुटियन दिल्‍ली का ललितगेट अौर आस्‍तीन के सांप

जब राजनीति में कोई घोटाला होता है तो दुनिया भर में उस घोटाले के नाम के सामने गेट जोड़ दिया जाता है। अगर किसी भी घोटाले के साथ गेट जुड़ जाता है तो उसको राजनीतिक भ्रष्टाचार का बहुत बड़ा मामला माना जाता है। देश में बहुत सारे घोटालों के साथ यह शब्द जुड़ चुका है। आज सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे और ललित मोदी के कथित भ्रष्टाचार के मामले में गेट शब्द जुड़ गया है। दिल्ली के सत्ता के गलियारों में ललितगेट पर दिन-रात चर्चा हो रही है। यह प्रत्यय 'गेट' अमरीका के कुख्यात वाटरगेट मामले से लिया जाता है। जून १९७२ में अमरीकी राष्ट्रपति पद के चुनाव के दौरान कुछ चोर वाटरगेट होटल के परिसर में बने डेमोक्रेटिक पार्टी की राष्ट्रीय कमेटी के दफ्तर में घुस गए थे। आरोप यह था तत्कालीन राष्ट्रपति और रिपब्लिकन उम्मीदवार रिचर्ड निक्सन ने घोटाले पर लीपापोती की कोशिश की थी। तब से ही राजनीतिक घोटालों पर लीपापोती के काम को 'गेट' शब्द से नवाजा जाता है। आज सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे और ललित मोदी के प्रकरण को ललितगेट नाम दे दिया गया है। और मामला हर मिनट तरह-तरह के आकार लेता जा रहा है ।

दिल्ली में पिछले ४८ घंटे की दौड़-धूप के बाद जो तस्वीर उभर रही है उसमें दगाबाजी, धोखेबाजी, सत्ता का दुरुपयोग, बेईमानी, भ्रष्टाचार, दोस्ती सब कुछ है। इसके अलावा सारे मामले में बहुत बड़े स्तर की राजनीति का तड़का भी साफ नजर आ रहा है। नई दिल्ली के लुटियन बंगलो जोन में तरह-तरह की बातें की जा रही हैं। शुरू में जो मामला विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के परिवार और ललित मोदी के आपसी संबंधों की कहानी लग रहा था, उसमें बीजेपी की आन्तरिक राजनीति का कोण तब जुड़ गया जब बीजेपी के सांसद और क्रिकेट की राजनीति के माहिर कीर्ति आज़ाद ने 'आस्तीन के सांप' की बात कर दी। लोग सांप तलाशने लगे क्योंकि आस्तीन के बारे में सब को पता था। इसी के साथ ही दिल्ली में बीजेपी के अलग-अलग गुटों की राजनीतिक बारीकियों का बहुत बारीकी से अध्ययन शुरू हो गया। नई दिल्ली में जितने भी नेताओं, बड़े अफसरों और पत्रकारों से दिन भर बात हुई सबको मालूम है कि कीर्ति आज़ाद जिसको आस्तीन का सांप कह रहे हैं, वह कौन है लेकिन कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। नई दिल्ली में संसद के २-३ किलोमीटर के घेरे में रहने वालों की अजीब संस्कृति है। इस इलाके में देश के भाग्य विधाता रहते हैं। संसद में जो लोग एक-दूसरे की पार्टियों के खिलाफ अभियान चला रहे होते हैं, उनमें से ऊंची सोसाइटी वाले इसी इलाके में किसी के घर या किसी होटल या किसी अन्य स्थान पर मिलते हैं और दिन की तल्खी का कहीं कोई ज़िक्र नहीं होता। दिल्ली के शक्की मिजाज के लोग इस मित्र वर्ग को काकटेल सर्किट कहते हैं। इस वर्ग में राजनीतिक वफादारी से हटकर व्यक्तिगत दोस्ती और हितों का संसाधन मुख्य होता है।

इस बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने ऐलान कर दिया है कि सुषमा स्वराज ने ललित मोदी की मानवीय आधार पर मदद करने के इरादे से उन पर भरोसा करके जो कुछ भी किया उसमें कोई गलती नहीं है। पूरी पार्टी और सरकार सुषमा स्वराज के साथ है। गौर करने की बात यह है कि किसी नेता ने इस बात का खंडन नहीं किया कि सुषमा जी ने ललित मोदी की नियम विरुद्ध मदद की। हां उन्होंने यह ज़रूर कहा कि सुषमा स्वराज के ऊपर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। कीर्ति आज़ाद की आस्तीन के सांप वाली बात को अरुण जेटली ने बेकार की बात बताकार मुस्‍कुराते हुए टाल दिया।

लेकिन अब बात बहुत दूर तलक तक जा चुकी है। अब ललितगेट केस में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का नाम भी आ गया है। और लगता है कि वसुंधरा राजे की मुसीबत सुषमा स्वराज से बड़ी है। ललित मोदी के बचाव में वकीलों की जो टीम उतारी गई थी उसके प्रवक्ता महमूद आब्दी ने २५० पृष्ठ का एक दस्तावेज़ जारी कर दिया। इसी में राजस्थान विधानसभा में विपक्ष की नेता के रूप में वसुंधरा राजे की ललित मोदी के पक्ष में ब्रिटिश सरकार को चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने ललित मोदी के ब्रिटेन में बने रहने के हर प्रयास को अपना समर्थन दिया था। २०११ में उनकी पहली चिट्ठी लिखी गई थी। दूसरी चिट्ठी राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान २०१३ में लिखी थी। एक चिट्ठी में तो उन्होंने यह भी लिख दिया था उनकी चिट्ठी और ललित मोदी के समर्थन में कही गई उनकी बात के बारे में भारत सरकार को पता नहीं लगना चाहिए। वसुंधरा राजे की इन चिट्ठियों के बाद ललितगेट में अब बीजेपी के दो बड़े नेता राजनीतिक इज्ज़त बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं जबकि पूरी सरकार और पार्टी राजनीतिक प्रबंधन के अभियान में लगे हुए हैं।

हालांकि, वसुंधरा राजे ने इस बात को तो स्वीकार किया कि वे ललित मोदी के परिवार को जानती हैं लेकिन ललित मोदी के वकीलों ने जो चिट्ठियां जारी की हैं उनके बारे में किसी तरह की जानकारी से उन्होंने साफ मना कर दिया। टीवी चैनलों में चल रही बहस को नज़रंदाज़ भी कर दिया जाए तो जो ठोस तथ्य सामने आए हैं वे बीजेपी के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन गए हैं। अब यह चर्चा शुरू हो गई है कि वसुंधरा राजे और बीजेपी के नेता कानूनी बचाव की तकनीकी भाषा बोलने लगे हैं। हालांकि बीजेपी के नेताओं के लिए सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे का बचाव कर पाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। बीजेपी के एक बड़े नेता ने बताया कि अब उनकी पार्टी के लोग मुकदमे में बचाव पक्ष के वकील की तरह बोलने लगे हैं। यह भी बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे मामले में हर मिनट की जानकारी रख रहे हैं और सारी रणनीति का संचालन उनके के हिसाब से हो रहा है। सरकार के नंबर दो राजनाथ सिंह और उनके बाद सबसे अहम मंत्री अरुण जेटली, नरेंद्र मोदी की मर्जी और निर्देश के बिना राजनीतिक प्रतिद्वंदी विदेश मंत्री की रक्षा में अपने आप उतरने वाले नहीं थे। जो भी हो हर मिनट बदल रहे राजनीतिक हालात में अभी फाइनल कुछ नहीं है। आगे-आगे देखिये होता है क्या!

 

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