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भारत की कूटनीतिक जीत

शांतनु मुखर्जी - MAR 01 , 2019
भारत की कूटनीतिक जीत
पुलवामा हमले के बाद
शांतनु मुखर्जी

जब तक यह लेख पाठकों तक पहुंचेगा उम्मीद है विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान अपने घर वापस आ गए होंगे, उनकी सुरक्षित वापसी के लिए परिवार, दोस्तों और इस कृतज्ञ राष्ट्र के पास  की प्रार्थना व्यर्थ नहीं गई।

जबकि पूरा देश उनकी वापसी को लेकर उत्साह में है और यह तर्क दे रहा है कि क्या भारत द्वारा अमेरिका और अन्य सहयोगियों पर राजनयिक दबाव के कारण अभिनंदन को रिहा किया गया , या फिर पाकिस्तान के इमरान खान हैं, जिन्होंने 'सद्भभावना के संकेत' के रूप में उन्हें रिहा किया जैसे कि उन्होंने 28 फरवरी को पाकिस्तानी संसद में अपने बयान में कहा था।

संयोगवश, सीआरपीएफ के काफिले पर हुए नृशंस आतंकी हमले को आज एक पखवाड़ा पूरा हो गया है। इस बीच, हमने पुलवामा हमले का बदला लेने के लिए दोनों तरह की गतिविधियों की कोशिश जारी रखी साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय में पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए अच्छी तरह से तैयार किए गए कूटनीतिक आक्रमण की शुरुआत भी की। भारत निश्चित रूप से दावा कर सकता है कि पाकिस्तान पर दबाव बनाने में उसके कूटनीतिक प्रयासों का अंततः फल मिला और उसकी बात अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोर-शोर और स्पष्ट रूप से सुना गया।

राजनयिक मेहनत की बात करें, तो सुषमा स्वराज शायद अपने सबसे अच्छे रूप में थीं जब उन्होंने हाल ही में चीन का दौरा किया और अपने चीनी समकक्ष वांग यी  पर बढ़त हासिल की। वांग यी, जिन्होंने सुषमा स्वराज के जाने के तुरंत बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को फोन किया कि पाकिस्तान को एक संप्रभु देश की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए और किसी भी सैन्य प्रतिशोध या आक्रामकता का कार्य शांति के मानदंडों के खिलाफ है। एक संवेदनशील मुद्दे पर चीन को आश्वस्त करना एक वास्तविक कठिन जिम्मेदारी थी और इसका कोई मतलब नहीं था।

भारत के राजनयिक प्रयास यहीं समाप्त नहीं होते। भारत ने इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) और उसके बंटे हुए सदन में हलचल मचा दी है। सुषमा स्वराज को अपनी अबू धाबी बैठक में अतिथि के रूप में आमंत्रित करने की उनकी पहल से पाकिस्तान में नाराजगी है और उनके विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सुषमा स्वराज की उपस्थिति का विरोध करते हुए बैठक का बहिष्कार करने की धमकी दी थी। सुषमा स्वराज को आज और कल निर्धारित होने वाले ओआईसी मीट में विशेष दर्जा दिए जाने से पाकिस्तान विशेष रूप से नाराज है। इसलिए, 1 और 2 मार्च को दुनिया के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बढ़ने के मद्देनजर कैसे चीजें सामने आती हैं।

इस बीच, विश्लेषकों का आकलन है कि इस अवसर पर अमेरिका ने जिस तरह से भारत का साथ दिया वह काफी अहम है। चाहे पुलवामा हमले के बाद एक्शन की हो या फिर विंग कमांडर अभिनंदन की गिरफ्तारी का मामला हो।अमेरिका का ऐसा समर्थन साठ, सत्तर या उसके बाद के किसी भी शासनकाल में नहीं दिखा था। सेक्रेटरी ऑफ स्टेट पोम्पेओ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, बोल्टन बार-बार भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान को हर तरह का समर्थन देने के बारे में आश्वासन दे रहे थे और यहां तक कि आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करने की सलाह भी दे रहे थे। ठीक इसी वक्त विश्लेषकों का मानना है कि दोस्ती के इस वक्त में अमेरिका भारत के ‘विश्वसनीय सहयोगी’ के रूप में उभरा है। ब्रिटेन, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया ने सफलतापूर्वक जैश ए मोहम्मद की आतंकी गतिविधियों के लिए ब्लैक लिस्ट करने के जो कदम उठाए हैं। वह भी  भारत के लिए कूटनीतिक रूप से अहम है।

अब जब अभिनंदन को पाकिस्तान की हिरासत से सुरक्षित लाया जा रहा है, तब भारत को अति शिष्टाचार की जरूरत नहीं है। समय की जरूरत है कि सीमा के दूसरी ओर सक्रिय आतंकी शिविरों की पहचान करने के प्रयासों को जारी रखा जाए और पुलवामा जैसे हमलों की किसी भी तरह की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए उन्हें बेअसर किया जाए।

(लेखक भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) से सेवानिवृत्त अधिकारी और सुरक्षा विश्लेषक हैं। व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं)

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