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नीतीश कुमार के नाम बिहारी वोटर की पाती

AUG 01 , 2017

 

प्रिय नीतीश कुमार जी,

मैं पहले ही आपको बता दूं कि राजनीति की समझ मेरी बहुत कम है। चुनावी राजनीति की तो बिल्कुल भी नहीं। अबतक सिर्फ तीन बार वोट देने का मौका मिला है। बाकी बिहार प्रकरण में इतना कह सकता हूं कि एक बिहारी होने के नाते लग रहा है कि बिहारी जनमत के साथ आपने धोखा किया है।

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बिहार ने दो साल पहले सांप्रदायिकता के खिलाफ वोट किया था, बिहार ने दो साल पहले उस ब्रह्मणवादी राजनीति के खिलाफ वोट किया था जो दलितों-महिलाओं-पिछड़ों के अधिकारों के खिलाफ रहा है। जब पूरे देश में नफरत की आंधी चल रही है, देश के जरुरी मुद्दों को छोड़कर, विकास के मूलभूत सवालों को गायब कर, हिन्दू-मुस्लिम एकता को खत्म करने की कोशिश की जा रही है, गाय और मंदिर को मुद्दा बनाया जा रहा है, भीड़ द्वारा निर्दोष लोगों की हत्या की जा रही है, ठीक उसी समय में बिहारियों ने वोट देकर देश बांटने की इस राजनीति को एक धक्का देने की कोशिश की थी। देश भर के अमनपसंद लोगों ने बिहार के इस मॉडल को सराहा था, जिसमें दलित-महिला-पिछड़े-अल्पसंख्यक सबने मिलकर नफरत वाली राजनीति को नकार दिया था। एक उम्मीद जगी थी कि 2019 में शायद इस मॉडल से इन सांप्रदायिक विचारों को रोका जा सकता है! आपको पता है आप उस उम्मीद के बड़े हीरो थे। आप नायक बनकर उभरे थे।

अच्छा आप ही ये बताईये ये कौन सा लोकतंत्र आया है, जिसमें हारी हुई पार्टी सत्ता में बैठती है और जीती हुई विपक्ष में। बीजेपी ने लगातार तीसरे राज्य में ये अनूठा प्रयोग किया है। बीजेपी की लोकतंत्र को कमजोर करने की इन कोशिशों पर अगर देश में चिंता नहीं है तो वो दुनिया के सबसे बड़े डेमोक्रेसी के लिये चिंता की बात होनी चाहिए।

मैं पूछता हूं नीतीश जी आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? मतलब कथित 'छवि' को बचाने के लिये अपनी राजनीतिक कद को कौन घटाता है भाई? एक राज्य के मुख्यमंत्री थे आप और बेहद ताकतवर स्थिति में थे, राष्ट्रीय स्तर पर भी संभावनाएँ दिख ही रही थीं। लेकिन आज क्या हालत है आपकी, लगभग बीजेपी के चंगुल में फंसे हुए हैं। सीएम अब भी हैं, लेकिन एक कमजोर सीएम जो बैनर-पोस्टर में मोदी के नीचे साझा कर रहे हैं। बीजेपी के एजेंडे से थोड़ा भी बाहर जाना आप अफोर्ड ही नहीं कर सकते। क्या आपको बताने की जरुरत है कि बीजेपी का क्या एजेंडा है? क्या अब आप गौरक्षा के लिये की जाने वाली हत्या के लिये हामी भरेंगे, क्या अब आप भी राम मंदिर बनाने के लिये ईंट चंदा करेंगे? रोहित वेमुला और ऊना में दलितों पर हुए हमले पर चुप्पी साध लेंगे? आपने तो संघ से देश को बचाने की कौल ली थी, क्या हुआ उसका? आपने ही कहा था न मिट्टी में मिल जायेंगे लेकिन बीजेपी के साथ नहीं जायेंगे, क्या अब आप भी देश को मिट्टी में मिलाने वाली पार्टी के साथ खड़े नज़र आयेंगे? आपकी पॉलिटिक्स कहां जाकर टिकी है नीतीश जी?

बाकी भ्रष्टाचार की बात रही तो आपकी सरकार पर शराब घोटाला का आरोप है, सुशील मोदी पर भी गंभीर मामले दर्ज हैं, बीजेपी के शीर्ष नेताओं पर हत्या, घोटाला सबका आरोप है।

कुल मिलाकर आप कितना भी बहाना कर लें, हर बिहारी जानता है, सबको पता है करप्शन कोई मुद्दा था ही नहीं, पहले से सारी स्क्रिप्ट तैयार थी। आप लौटना चाहते थे, लेकिन क्यों ये समझ नहीं आया, क्या आपका अंहकार फिर आड़े आ गया, जिसे आप अंतरआत्मा की आवाज कहते हैं क्यो वो आपका यही अंहकार नहीं है?

आप सामाजिक न्याय के योद्धा हैं, आपके इस फैसले से सामंति मानसिकता के लोग खुश हैं, जरा सोचियेगा कि ऐसा क्यों कर है? एक बिहारी होने के नाते मुझे गर्व था कि हमने देश को बांटने वाली राजनीति को नकार कर सामाजिक न्याय और विकास की राह चुनी है। लेकिन आज हमारे हाथ क्या आया है? एक गहरी उदासी, अपने ही मुख्यमंत्री ने हमें निराश किया है... हमारे जनमत को धोखा दिया है.. अब आप ही बताईये जायें तो जायें कहां ?

आपके ही राज्य का एक बाशिंदा, एक निर्वासित बिहारी वोटर, जो दिल्ली में रहते हुए भी हरबार वोट डालने अपने राज्य लौटता है..

- अविनाश चंचल


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