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नज़रिया

किसान की मौत और व्यवस्था का तिलिस्म

किसान की मौत और व्यवस्था का तिलिस्म

23 अप्रैल 2015 को दौसा के गजेंद्र सिंह के रूप में देश के हाहाकार ने जंतर-मंतर पर दम तोड़ दिया। उसकी चीखती खामोशी को सत्‍ता और मीडिया की धडक़नों में एक और हाहाकार के रूप में धड़कना चाहिए था।
गजेंद्र ने सत्ता, सिस्टम और राजनीति का मुंह नोंच लिया !

गजेंद्र ने सत्ता, सिस्टम और राजनीति का मुंह नोंच लिया !

ये आंकड़ा हर किसी को पता है कि इस देश में 1995 से अब तक साढ़े तीन लाख किसानों-खेतिहर मजदूरों ने आत्महत्या की है। दैनिक औसत निकालें तो 50 लोग हर रोज जान दे रहे हैं। 20 साल में देश की सत्ता और सिस्टम इन मौतों के जिम्मेदारों की शिनाख्त नहीं कर पा रही है। चूंकि, शिनाख्त नहीं हुई इसलिए आगे की कार्रवाई की भी जरूरत नहीं। एक खेल चल रहा है जिसमें राजनीतिक दल एक-दूसरे को निशाना बना रहे हैं। उनका ध्यान समस्या ओर उसके समाधान पर नहीं है, बल्कि खुद को दूसरों से उजला, ईमानदार और संवेदनशील दिखाने पर है। ऐसे में कोई गजेंद्र मरे तो मरता रहे, उनकी बला से।
पिपली लाइवः दिल्ली में किसान की जान के मायने

पिपली लाइवः दिल्ली में किसान की जान के मायने

शर्म इनको नहीं आती। एक किसान ने अपनी जान दी। उसने किस गहरे नैराश्य में डूबकर अपनी जिंदगी को फांसी लगाई, इस पर चर्चा करने के बजाय बाकी सारे पहलुओं पर बात पूरी बेहयायी के साथ बैटिंग चल रही है। किसान अपनी जेब में अपनी व्यथा की जो छोटी सी पुर्जी लेकर चल रहा था, वैसी ही पुर्जी लाखों किसानों ने आत्महत्या करने से पहले अपने दिलों में लिखी होगी।
अक्षय तृतीया के पार है बाल विवाह का क्षय

अक्षय तृतीया के पार है बाल विवाह का क्षय

21 अप्रैल को आखा तीज यानी अक्षय तृतीया का अबूझ सावां बीत गया। अबूझ सावां मतलब हिंदु विवाह का सर्वव्यापी शुभ लग्न। कहते हैं, इस दिन विवाह के लिए मुहर्त निकालने या जन्मकुंडली मिलान की जरूरत नहीं पड़ती। अक्षय तृतीया को आरंभ विवाह का शुभ काल पीपल पून्यो यानी पीपल पूर्णिमा तक 12 दिन रहता है।
ईरान पर भारत को दिखलानी थी फुर्ती

ईरान पर भारत को दिखलानी थी फुर्ती

अमेरिका और उसके मित्र पश्चिमी देशों तथा ईरान के बीच परमाणु फ्रेमवर्क करार के रूप में संबंधों की बर्फ पिघलने का फायदा उठाने के लिए पाकिस्तान ने भारत के मुकाबले ज्यादा फुर्तीला कूटनीतिक फुटवर्क दिखाया है।
वसुधैव कुटुम्बकम

वसुधैव कुटुम्बकम

लव जिहाद के नाम पर हिन्दू और मुसलमान के बीच जहां कुछ लोग वैमनस्य फैलाने में जुटे हैं, वहीँ महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका दिनों के साथी इमाम अब्दुल कादर बवाज़िर के खानदान के सदस्य पिछली चार पीढ़ी से संप्रदाय और धर्म के बंधनों को तोड़ कर 'वसुधैव कुटुम्बकम' के सिद्धांत को अपने जीवन से प्रस्थापित कर रहे हैं।
न्याय को मोदी की नसीहत का असगुन

न्याय को मोदी की नसीहत का असगुन

भाजपा सरकार आने के बाद पहले जजों की नियुक्ति का कानून बदला गया, फिर आई न्यायपालिका को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नसीहत। इन दोनों बातों ने बरबस चार दशक पहले के भारतीय इतिहास के घाव हरे कर दिए।
आम आदमी के सपनों में दफन पार्टी

आम आदमी के सपनों में दफन पार्टी

नव संवत्सर आत्महत्या की अजीब प्रवृत्तियों के लपेटे में दिख रहा है। फ्रांस में एक विमान के जर्मन सह पायलट जैसी भौतिक और भयानक आत्महंता प्रवृत्ति तो इस देश में नहीं दिखी जिसने अपने साथ-साथ 150 लोगों की जान और हवाई जहाज का विनाश ही कर दिया। लेकिन यहां एक अन्य तरह का राजनीतिक आत्महंता रुझान जरूर दिख रहा है। दिल्ली चुनाव में करारी हार के बाद संसद के महत्वपूर्ण सत्र से राहुल गांधी के अज्ञातवास पलायन और कश्मीर तथा पाकिस्तान के मामले में मोदी सरकार की बेपेंदी के लोटे की तरह लुढ़काऊं नीति के जरिये क्रमश: कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी गिर पड़ने के लिए कुल्हाड़ी तलाशती दिख रही हैं। लेकिन सबसे गजब निकली आम आदमी पार्टी।
पाकिस्तानी उच्चायोग में एक ‘राष्ट्रविरोधी’ शाम

पाकिस्तानी उच्चायोग में एक ‘राष्ट्रविरोधी’ शाम

पाकिस्तान उच्चायोग अब्दुल बसीत ने 23 मार्च को अपने देश के राष्ट्रीय दिवस पर हुर्रियत नेताओं को दावत दी कि मीडिया के एक हिस्से ने इसे द्विपक्षीय वार्ताओं से कश्मीरी अलगाववादी नेताओं को अलग रखने के भारत-पाक करार का पुन: उल्लंघन बताया। लेकिन सरकारी प्रतिक्रिया को देखें तो असहज होते हुए भी भारत सरकार के लिए यह मसला इतना बड़ा नहीं है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत फिर स्थगित कर दी जाए।
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