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नज़रिया

छोटे-छोटे फासिस्ट

बहुत कुछ खत्म हो चुका है, लेखक मर चुका है, यथार्थ मर चुका है, मीडिया मर चुका है, विचार मर चुका है, भाषा मर...

हम कौन थे, क्या हो गए हैं?

यह प्रश्न भारतवर्ष की दासता के युग में राष्‍ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्‍त ने उठाया था। अपने अतीत और...

राजनीति का उत्तर राजनीति नहीं है

अवधी का एक मुहावरा है, ‘नौ दिन चले अढ़ाई कोस।’ मतलब यह है कि नौ दिन की यात्रा करने के बाद अढ़ाई कोस तक...

मौजूदा दौर में लोग सब देख रहे हैं

आजादी के बाद से देश में काफी विकास हुआ है। देश के सामाजिक, राजनीतिक और साहित्यिक क्षेत्र में बहुत कुछ...

आज की चुनौतियां

आज हमारे सामने कौन-सी चुनौतियां हैं? और क्या इन चुनौतियों का कोई इतिहास है? क्या देश, समाज की चुनौतियां...

इस अकाल वेला में

"साहित्य, संस्कृति, समाज और राजनीति के समक्ष आज की चुनौतियां" बात नब्बे के दशक के आखिरी वर्षों और...

आसिया बीबी और कट्टरपंथ की जकड़ में पाकिस्तान

पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट के असाधारण फैसले में ईसाई महिला आसिया बीबी को ईशनिंदा के आरोपों से बरी कर...

स्वायत्त संस्थाएं और लोकतंत्र

किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका और स्वायत्त संस्थाओं को मजबूत स्तंभ की तरह देखा जाता...

कसौटी पर शुचिता

आखिरकार केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर का इस्तीफा हो ही गया। अकबर पर संपादक रहते हुए उनके मातहत...

खाकी-स्वच्छता की भी दरकार

हाल की कुछ घटनाओं से देश के पुलिसिया तंत्र को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। अगर समय रहते इन सवालों के जवाब...

बहुत देर कर दी हुजूर!

केंद्र सरकार ने हाल में एक अच्छा फैसला किया लेकिन असल में यह अब से चार साल पहले लिया गया होता तो ज्यादा...

तेल में फिसलती सरकार

इन दिनों देश में कई महत्वपूर्ण मसलों पर बहस चल रही है। उम्मीद है, यह हमारे लोकतंत्र और नागरिक...

एम्सटर्डम में आतंकी हमला; यूरोप के जागने का समय

शांतनु मुखर्जी 31 अगस्त के दिन भीड़भाड़ वाले स्टेशनों में शामिल एम्सटर्डम रेलवे स्टेशन पर उस समय...

आपदा में तो एकजुटता दिखे

केरल में सौ साल बाद रिकॉर्डतोड़ बारिश भारी तबाही और संकट ले आई है, उससे निपटने में राज्य सरकार, सेना,...