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पंकज त्रिपाठी: बेशुमार किस्सों में भीगा अभिनेता

“आस-पड़ोस में चलती-फिरती, टहलती कहानियों के बीच उन्होंने सीखी सहजता” पंकज मेरे पटना के दिनों के...

प्रथम दृष्टि: चुनावी गुरु

“चुनावी गुरुओं की पूछ और महत्ता तब तक बनी रहेगी जब तक हर राजनीतिक दल फिर से यह नहीं समझ लेता कि अंततः...

कैशलेस अर्थव्यवस्था का सपना सच करने के लिए ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी जरूरी

किसी देश की वृद्धि और विकास का प्रमुख सूचक अर्थव्यवस्था में सब का समावेश होता है। बहुत से देशों की...

कुर्सियों के संग्रहालय में संग्रह करने लायक क्या?

कई बार तीनमूर्ति भवन गया हूं। जवाहरलाल की स्मृतियों को हर बार कई कोणों से निहारा है। हर बार यह पछतावा...

प्रथम दृष्टि: संवेदनशीलता चाहिए

"ट्रांसजेंडर बिरादरी को मुख्यधारा में शामिल किए बगैर समावेशी समाज की कल्पना नहीं की जा सकती" हाल में...

रूस-यूक्रेन वॉर: जंग खत्म करना नैतिक युद्ध हार चुके पुतिन की जिम्मेदारी!

48 घंटे में खत्म होने वाला युद्ध, 48 दिनों से जारी है। यूक्रेन ने रूस को ये बखूबी जता दिया है कि आज के दौर...

कश्मीर/नजरिया: कितनी फाइलें खोलेंगे आप

“अर्ध-सत्य से सांप्रदायिक एजेंडे में दम भरने का प्रहसन है फिल्म द कश्मीर फाइल्स, पूरा सच तो इससे दीगर,...

आवरण कथा/नजरिया: पांच राज्यों में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पार्टी में जान फूंकना सबसे बड़ी चुनौती

“कांग्रेस पार्टी के अंदर की कलह को इस तरह निपटाए कि बाहर की अपेक्षाएं कुछ पूरी हो सकें” पांच...

नजरिया: कांग्रेस की आखिरी लड़ाई

"10 जनपथ का परदा हटा, 24 अकबर रोड का दरवाजा खुला, मगर कई सवाल बाकी” यह कांग्रेस की अपनी लड़ाई है। ताकत...

माखनलाल चतुर्वेदी: जिनकी आत्मा पराधीन भारत की दुर्दशा देखकर चीत्कार करती थी

माखनलाल चतुर्वेदी शिक्षक-कवि, निबंधकार-पत्रकार, कई पत्रिकाओं के सम्पादक, क्रांतिकारी अर्थात बहुमुखी...

प्रथमदृष्टिः गांधी-मुक्त कांग्रेस?

“पार्टी को नए सिरे से पुनर्निर्माण करना होगा। लेकिन क्या राहुल और प्रियंका इस चुनौती के लिए तैयार...

जनादेश 2022/नजरिया: आधे से अपूर्ण बने अखिलेश यादव

“अखिलेश इस चुनाव से जो हासिल हुआ वह भी कम नहीं है” अखिलेश यादव पिछली बार उत्तर प्रदेश के...

प्रथम दृष्टि: नेतृत्व की अहमियत

विपक्ष को दीर्घकालीन रणनीति बनानी होगी। भविष्य में उन्हें एकजुट होकर ऐसा नेतृत्व प्रदान करना होगा, जो...

जनादेश 2022 के मायने- ब्रांड योगी और केजरीवाल मॉडल की जीत

पारंपरिक राजनीति के दिन लद चुके हैं। कमंडल और मंडल की राजनीति की उम्र पुरी हो चली है। सांप्रदायिक...


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