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क्या जरूरी है बैंकों का निजीकरण?

बैंकों के राष्ट्रीयकरण के 52 वर्षों के बाद आज सरकारी बैंकों की संख्या घटकर 12 रह गई है। 19 जुलाई 1969 को देश के...

लोकतंत्र और विशेषाधिकार

“नागरिक अधिकारों, स्वतंत्रताओं को सीमित और सत्ता-प्राप्त व्यक्तियों के अधिकारों को व्यापक बनाया जा...

प्रशांत किशोर: कितनी हकीकत कितना फसाना?

एक सफलता के बाद अनेक सफलताएँ मिलती हैं, इस बात का सबसे अच्छा जीवंत उदाहरण चुनावी रणनीतिकार प्रशांत...

बेलगाम धोखाधड़ी

“2014-19 के बीच 38 लोग फ्रॉड करके देश छोड़ गए, इससे कई सवाल खड़े होते हैं” भारत का बैंकिंग क्षेत्र पिछले...

स्मृति/जब तक एक्टिंग है, दिलीप साहब जिंदा रहेंगे

“पूरी दुनिया में फिल्मों में अगर कोई पहला मेथड एक्टिंग करने वाला अभिनेता था तो वे दिलीप साहब ही...

संघीय संरचना और कोविड प्रबंधन

भारत में कोविड 19 की टीकाकारण नीति इतिहास में दर्ज हो रही है क्योंकि इस अदूरदर्शी नीति के कारण भारत की...

मी लॉर्ड, हम कुछ कहेंगे

स्टेन स्वामी की मृत्यु के बाद कुछ भी लिखने-कहने की फूहड़ता से बचने की बहुत कोशिश की मैंने। मुझे लगता...

संख्याओं और शब्दजाल के पीछे की अनकही कहानी

कोविड ने एक व्यापी रूप से अर्थव्यवस्था और परिवारों की वित्तीय सुरक्षा को बाधित किया है। जब विशेषज्ञ...

जनसंख्या नियंत्रण: उठते सवाल

आजादी के 74 वर्ष के बाद भी जब किन्हीं मुद्दों पर बात होती है तो उसके पीछे के व्याप्त कारणों और तथ्यों को...

गलवन टकराव वर्षगांठ: गफलतों से सीखने का वक्त

“गलवन घाटी में हुई गफलतों के सबक अल्पकालिक राजनैतिक फायदे की खातिर दफन करना मुनासिब नहीं” लद्दाख...

संपादक की कलम से: किसका दुखड़ा रोऊं!

“इंसाफ के बहाने कामयाब बिक्री का कारनामा सुशांत की गर्ल फ्रेंड रिया चक्रवर्ती को मुख्य संदिग्ध...

संपादक की कलम से: पीएम मोदी की कश्मीर वार्ता- बल प्रयोग से बेहतर है बातचीत

मुझे सीधा-सादा कहिए, लेकिन मैं ये अवश्य कहूंगा कि कश्मीर पर हमारी केंद्र सरकार ने जो आश्चर्यजनक...

सलाह देने का दोहरापन: "सेवानिवृत्त बाबुओं की सुविधावादी क्रांति"

वो खुद को ऐसा दर्शाते हैं कि वो इस देश की अंतरात्मा के रखवाले हैं पर अधिकांश लोग उन्हें स्वयं नियुक्त...

लक्षद्वीप : स्वर्ग-दोहन का लालच

“देश के सबसे छोटे केंद्र शासित सुरम्य द्वीप समूह में विकास के नाम पर पर्यावरण की बर्बादी का...