कैमरे की जद में वीआइपी

जीवन प्रकाश शर्मा
दिल्ली में नेताओं के कटे ट्रैफिक चालान
दिल्ली में नेताओं के कटे ट्रैफिक चालान
इलस्ट्रेशनः साहिल

जीवन प्रकाश शर्मा
दिल्ली में लगे कैमरे ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर नजर रखने लगे तो पुलिसवालों को धमकाकर बचने वाले वीआइपी लोगों का भी चालान

आप हैरान हैं कि रेड लाइट जंपिंग, गलत पार्किंग, तय सीमा से ज्यादा गति से वाहन चलाने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के नोटिस कैसे आ गए, आखिर यह उल्लंघन कब और कहां हुआ? मगर घबड़ाइए नहीं, इससे आप वीआइपी और रसूखदार लोगों की पांत में शुमार हो गए हैं क्योंकि उन्हें भी इफरात में चलान मिले हैं। कुछ महीनों में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए नोटिस या आम बोलचाल में कहें तो चालान पाने वाले हजारों लोगों में केंद्रीय मंत्री और तमाम पार्टियों के नेता भी शामिल हैं। इनमें से एक नाम केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की पत्नी कंचन गडकरी का भी है, जो ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना कई गुना बढ़ाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के नाम से पंजीकृत कई वाहनों में से एक के खिलाफ 15 नोटिस लंबित हैं। हालांकि किसी के नाम नोटिस जारी होने का आशय यह नहीं होता कि वाहन वही व्यक्ति चला रहा था जिसके नाम से पंजीकृत है। अहम बिंदु यह है कि टेक्नोलॉजी ने आम आदमी और वीआइपी के बीच का अंतर खत्म कर दिया है। किसी चौराहे पर तैनात पुलिसकर्मी केंद्रीय मंत्री के वाहन का चालान न कर पाए, लेकिन ट्रैफिक कैमरे बिना भेदभाव के यह काम कर रहे हैं।

दिल्ली की सड़कों पर नेताओं, सेलिब्रिटी और अमीर व्यवसायियों की संतानों के बारे में एक जुमला चलता है। जब कोई पुलिसकर्मी ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए उन्हें रोकता है तो उनका एक लाइन का जवाब होता है, “जानता नहीं, मेरा बाप कौन है।” ट्रैफिक पुलिसवाले इसके मायने बखूबी समझते हैं। कई बार तो नियम तोड़ने वाला दबाव डालने के लिए अपने पिता का नाम भी नहीं लेता है। दक्षिण दिल्ली के एक चौराहे पर तैनात पुलिस कांस्टेबल ने कहा, “कुछ दिनों पहले, मैंने एक कार को रोका। कार ने रेड लाइट का उल्लंघन किया था। एक प्रभावी सांसद की इस गाड़ी के ड्राइवर ने मुझे धमकी दी कि चालान काटा तो गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे।” नाम न जाहिर करने की शर्त पर इस पुलिसवाले ने कहा कि ऐसे वाहनों पर जुर्माना लगाना मुश्किल होता है क्योंकि इनके ड्राइवर न सिर्फ रौब गांठते हैं, बल्कि मुअत्तल करा देने  की धमकी भी देते हैं। लेकिन कैमरे यह काम आसानी से कर रहे हैं

दिल्ली में गाड़ियों की तेज रफ्तार पर नजर रखने के लिए 25 कैमरे लगाए गए हैं और ऐसे 100 कैमरे और लगाए जा रहे हैं। रेड लाइट का उल्लंघन पकड़ने के लिए 10 कैमरे लगे हैं। इनकी भी संख्या जल्दी ही बढ़कर 34 हो जाएगी। दुनिया में सर्वाधिक वाहन घनत्व वाले शहर दिल्ली में ये कैमरे ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के प्रयासों के तहत लगे हैं। उम्मीद है कि हाल में जुर्माने में भारी बढ़ोतरी के लिए मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन के साथ इन कैमरों की मदद से दिल्ली की सड़कें ज्यादा सुरक्षित हो जाएंगी। ऑटोमोबाइल केस देखने वाली सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रानी छाबड़ा कहती हैं, “ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का नोटिस जारी करने के साथ ट्रैफिक विभाग वाहन स्वामी को जुर्माना भरने के लिए समय देता है। अगर वाहन स्वामी जुर्माने को अदालत में चुनौती देना चाहता है तो वह नोटिस को नजरंदाज कर सकता है। अगर जुर्माना गलत तरीके से लगा है तो कोर्ट उसे माफ कर सकता है। लेकिन वह जुर्माने की रकम को अधिनियम के तहत तय सीमा से ज्यादा नहीं कर सकता है।”

आउटलुक ने ऐसे दर्जनों नोटिस देखे हैं जो कैबिनेट मंत्रियों, उनके जीवनसाथी, संसद सदस्यों और भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) सहित विभिन्न पार्टियों के नेताओं को ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए जारी किए गए। शहर में लगे कैमरों ने उनके वाहनों को ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते पकड़ा था।

कांग्रेस के नेता सलमान खुर्शीद के कई वाहनों में से एक टोयोटा फॉर्च्यूनर के खिलाफ अप्रैल 2018 से अगस्त 2019 के बीच 15 चालान हुए। आउटलुक को जांच में पता चला कि इसका जुर्माना 22 अक्टूबर तक नहीं भरा गया था। जुर्माना नहीं भरने के कारण इनमें से पांच चालान अदालत में भेज दिए गए। जांच के लिए आउटलुक ने पहले नेताओं के शपथ-पत्र हासिल किए जो उन्होंने आम चुनाव के नामांकन दाखिल करते समय निर्वाचन आयोग को दिए थे। इन शपथ पत्रों में नेताओं ने अपनी संपत्ति और अन्य विवरणों के साथ अपने और अपने जीवनसाथी की कारों के रजिस्ट्रेशन नंबर, निर्माण वर्ष और कीमत के बारे में बताया था। इन वाहनों का रजिस्ट्रेशन नंबर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट में फीड करके जुर्माने का स्टेटस और नोटिस के साथ कार की फोटो देखी जा सकती है। शपथ-पत्र के अनुसार कई शीर्ष नेता जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी तथा राहुल गांधी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पास कोई वाहन नहीं है।

सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और उनकी पत्नी के पास महाराष्ट्र में पंजीकृत छह कारें हैं। एक कार टोयोटा इनोवा, जिसका चालान किया गया, लगता है दिल्ली में इस्तेमाल होती है। क्रिकेटर से नेता बने गौतम गंभीर के पास पांच कारें और एक बाइक है। गलत तरीके से पार्किंग करने और तय सीमा से ज्यादा स्पीड पर चलाने के लिए उनकी दो कारों पर जुर्माना लगा। लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार ने अपने पति के नाम पर दो कारें होने की घोषणा की है। इन दोनों वाहनों पर रेड लाइट जंपिंग अथवा ओवर स्पीडिंग के लिए पांच बार जुर्माना लगाया गया।

गायक से नेता बने हंसराज हंस के वाहन पर जुर्माना ओवरस्पीडिंग और रेड लाइट तोड़ने के लिए लगाया गया। जब आउटलुक ने उनसे बात की तो उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। हंस ने कहा, “मैं ट्रैफिक नियमों का पालन करने का प्रयास करता हूं, फिर भी संभव है कि ड्राइवर ने ये उल्लंघन अकेले जाते हुए किए हों। मैं ड्राइवर को समझाने का प्रयास करूंगा।”

सिर्फ वीआइपी ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में आम लोग भी अनभिज्ञ हैं कि उनके खिलाफ ट्रैफिक पुलिस का नोटिस जारी हो चुका है। पुलिस का कहना है कि या तो वाहन स्वामी का फोन नंबर उनके पास पंजीकृत नहीं है अथवा उन्होंने अपना नंबर बदल लिया है। संयुक्त आयुक्त (ट्रैफिक) नरेंद्र सिंह बुंदेला कहते हैं, “सभी नोटिस कैमरों से मिले डाटा पर आधारित हैं, इसमें कोई भेदभाव नहीं है। हम पारदर्शी तरीके से काम करने का प्रयास करते हैं। हमारे पास जो टेक्नोलॉजी है, वह बहुत अच्छी है और गलती होने की संभावना न के बराबर है। फिर भी अगर कोई गलती होने की जानकारी मिलती है तो हम उसकी समीक्षा करते हैं।”

ट्रैफिक व्यवस्था के जानकार कहते हैं कि वीआइपी, संसद सदस्य और मंत्री खुद वाहन नहीं चलाते हैं, उनके ड्राइवर ही ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते पकड़े जाते हैं। वे सोचते हैं कि उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकती है। बेंगलूरू सिटी ट्रैफिक पुलिस के पूर्व चीफ ट्रैफिक वार्डन एस. सत्यपाल कहते हैं, “वीआइपी और वीवीआइपी को अपने ड्राइवरों को ट्रैफिक नियमों का पालन करने को समझाना चाहिए और निर्देश देना चाहिए। उन्हें ड्राइवरों पर सख्ती करनी चाहिए। उल्लंघन के लिए कोई बहाना नहीं चल सकता।” वीआइपी के बारे में वह जोर देकर कहते हैं कि आमतौर पर वे नियमों का पूरी तरह पालन करते हैं, लेकिन वे भी इंसान हैं, इसलिए उनसे भी गलती हो सकती है।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत चालान में गड़बड़ियों के लिए ट्रैफिक सिस्टम को दोषी ठहराते हैं। रावत की पत्नी के नाम दो वाहनों पर सात बार जुर्माना हुआ। रावत सवाल उठाते हैं, “मैंने ट्रैफिक सिस्टम को व्यावहारिक बनाने का अनुरोध किया। राष्ट्रीय राजमार्गों के कई हिस्सों पर 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा तय है। क्या यह व्यावहारिक है?” वे कहते हैं, “पहले दिल्ली में ट्रैफिक सिग्नलों पर हरी या लाल लाइट जलने से पहले पीली लाइट जलती थी। इससे ड्राइवर गति कम कर लेते थे। लेकिन पीली लाइट हटा दी गई।” नोटिसों पर उन्होंने कहा कि उनके परिवार के सदस्य वाहन चलाते हैं। हो सकता है उनसे उल्लंघन हुआ हो। जब आप ड्राइविंग करते हैं तो सावधानियों के बाद भी उल्लंघन हो जाता है। कांग्रेस नेता जयवीर शेरगिल कहते हैं, “जब बात निगरानी और जुर्माने की आती है तो टेक्नोलॉजी तय करती है कि कानून के लिए सब बराबर हैं।” हालांकि हो सकता है कि उनका यह नजरिया इसलिए है क्योंकि उन्हें ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का कोई नोटिस नहीं मिला है।

अंत में एक तथ्य यह भी। आउटलुक के एडिटर-इन-चीफ को ऑफिस की तरफ से दी गई कार के लिए पांच नोटिस जारी किए गए। यह कार कंपनी का ड्राइवर चलाता है। चार नोटिसों का जुर्माना भर दिया गया और पांचवां अदालत में लंबित है। खास बात यह है कि नोटिस लंबित होने की जानकारी तभी मिली जब इस स्टोरी के लिए हम जानकारियां जुटा रहे थे।

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