आवरण कथा/इंटरव्यू : “ब्रांडिंग-होर्डिंग के अलावा कुछ नहीं हुआ”

प्रशांत श्रीवास्तव
कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू
कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू

प्रशांत श्रीवास्तव
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा सरकार के चार साल पूरे हो रहे हैं। ये चार साल कैसे रहे, इस पर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू से आउटलुक के प्रशांत श्रीवास्तव ने बात की। प्रमुख अंश:

सरकार के चार साल के कार्यकाल को किस तरह से देखते हैं?

ये सरकार पूरी तरह से ब्रांडिंग, होर्डिंग और झूठे आंकड़ों की बाजीगरी में लिप्त है। किसान से लेकर आम आदमी, छोटे कारोबारी, मजदूर, युवा सब परेशान हैं। राज्य में अपराध बढ़ा है, महिलाएं असुरक्षित हैं, फिर भी सरकार ब्रांडिंग में लगी हुई है। वह प्रदेश की जनता के साथ छल कर रही है।

सरकार का कहना है कि उसने किसानों की आय बढ़ाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए हैं और उसका असर दिख रहा है। आपकी राय क्या है?

सरकार ने वादा किया था कि वह किसानों की आय दोगुनी करेगी, उनके कर्ज माफ करेगी, गन्ने का दाम 14 दिन में देंगे, ऐसा नहीं होने पर ब्याज सहित भुगतान करेंगे, बंद चीनी मिलें चलाएंगे। लेकिन 4 साल में आय दोगुना करने की जगह यूपी के किसानों के साथ सरकार ने विश्वासघात किया है। सिर्फ एक साल में 850 किसानों ने आत्महत्या की है। गौशाला के नाम पर ब्रांडिंग हुई, स्थानीय स्तर पर रख-रखाव की कमी के कारण भूख से तड़प-तड़प कर गायें मर गईं। आगरा, ललितपुर, महोबा और मैनपुरी की गौशालाएं गवाह हैं।

फसल बीमा में 2,800 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। फसल बर्बाद होने पर बीमा कंपनी के साथ राजस्व विभाग की तरफ से मुआवजा देने का प्रावधान है। पिछले 4 साल से धान, गेहूं, तिलहन, आलू, मक्का, गन्ना की फसलें बर्बाद हुईं। बीमा कंपनियां हर साल बदलती रहीं लेकिन मुआवजे के नाम पर किसान को कुछ नहीं मिला। मैं 68 जिलों में किसानों से मिला हूं। सरकार ने केवल ट्विटर पर मुआवजा दिया है। इसी तरह, धान खरीद सेंटर को लेकर भी केवल बातें हुई हैं। सरकार ने जो भी आंकड़े दिए हैं, उसमें से 90 फीसदी फर्जी हैं। केवल सांठ-गांठ करने वाले लोगों को ही खरीद का फायदा मिला है। किसान एमएसपी पर फसल नहीं बेच पा रहा। उसे मजबूरी में धान को 1868 रुपये की जगह 1100-1200 रुपये प्रति क्विंटल में बेचना पड़ रहा है। आलू उत्पादक किसानों को सड़कों पर आलू फेंकने के लिए मजबूर होना पड़ा।

सरकार वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) स्कीम को काफी सफल बता रही है। उसका कहना है कि इससे बड़े संख्या में रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं और आर्थिक विकास को रफ्तार मिली है।

यह योजना भी केवल ब्रांडिंग का खेल है। इस योजना का सपना कांग्रेस ने न केवल देखा बल्कि उसे चरित्रार्थ भी किया। अलीगढ़ का ताला सहारनपुर की लकड़ी, फिरोजाबाद का चूड़ी उद्योग, भदोही में कारपेट और तमाम चीनी मिलें, नोएडा में हजारों छोटी कंपनियों का विकास, यह सब कांग्रेस की देन है। अब हालात यह हैं कि चूड़ी उद्योग खत्म होने के कगार पर है। बुनकर परेशान हैं, उन्हें पहले बिजली फ्लैट रेट 45 रुपये पर मिलती थी। उसे समाप्त कर दिया गया हैं। बुनकर सड़क पर हैं पर सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। भदोही का कारपेट उद्योग 12 सौ करोड़ का कारोबार करता था, वह भी समाप्ति के कगार पर है जिससे हजारों मजदूर सड़क पर आ गए हैं। बनारस का साड़ी उद्योग भी इसी स्थिति में है। मुरादाबाद का 20000 करोड़ रुपये का पीतल उद्योग भी बेहाल है।

सरकार का दावा है कि उसने कोरोना संकट में न केवल श्रमिकों का ख्याल रखा, बल्कि रोजगार के अवसर भी मुहैया कराए। आगे भी रोजगार के अवसर पैदा कर रही है। यह दावा कितना सच है?

रोजगार की बात केवल दिखावा है। पिछले एक साल में बेरोजगारी दर दोगुने से अधिक हो गई है। जितनी भी भर्तियां निकाली गईं, उनके लिए कोई भी ऐसी परीक्षा नहीं जिसका पेपर आउट न हुआ हो। यूपीपीएससी के पेपर 50 से 60 लाख रुपये में बिक रहे थे। सभी विश्वविद्यालयों में वरीयता और अर्हता को छोड़कर केवल अपने लोगों की नियुक्ति की गई है। सिपाही और दरोगा की भर्ती और 69 हजार शिक्षकों की भर्ती में पिछड़ों और दलितों के साथ बड़ा घोटाला हुआ है, यह सबने देखा है। पुलिस भर्ती में भी 48 हजार में से कुछ लोगों को ही ट्रेनिंग पर भेजा गया, बाकी बेचारे धरने पर बैठे हैं। ग्राम विकास अधिकारी में जिन बच्चों का चयन हुआ, वे नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं, सड़कों पर धरना दे रहे हैं और लाठी खा रहे हैं। सरकार का जोर ठेके पर नौकरी देने पर है। राज्य में करीब 40 बड़े घोटाले हुए हैं, जो जांच का विषय है।

सरकार राज्य में एक्सप्रेस-वे का जाल बिछा रही है। इस कदम को कैसे देखते हैं?

एक्सप्रेस-वे अभी पूरे नहीं हुए हैं। सरकार का केवल दावा है और ज्यादातर दावे किताबी हैं। यह बात सही है कि काम चल रहे हैं, जब बन जाएंगे तो देखेंगे कि क्या हुआ। इसी तरह डिफेंस कॉरिडोर में भी केवल ब्रांडिंग ही दिखा, पोस्टर लगे लोगों ने खाना खाया, इसके अलावा कुछ नहीं हुआ है। जमीन पर अभी कुछ भी नहीं दिखा है।

मुख्यमंत्री का दावा है कि उनके कार्यकाल में अपराध ग्राफ गिरा है, माफियाओं में खौफ है, प्रदेश की छवि बदली है। आपकी राय?

इन दावों पर आप कैसे यकीन कर सकते हैं? राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े देखिए। प्रदेश लूट, डकैती, महिला उत्पीड़न में नंबर एक है। मुख्यमंत्री के यह कहने के बावजूद कि “अपराधी डरें, नहीं तो उनका राम नाम सत्य हो जाएगा,” बदायूं, उन्नाव, गाजियाबाद, गोरखपुर में महिलाओं का उत्पीड़न हुआ है। उन्हें समझना चाहिए फिल्मी डायलॉग से कुछ नहीं होगा। जहां तक भू माफिया की बात है तो केवल गरीबों, पिछड़ों और कमजोर लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। कहा जा रहा है कि मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद पर कार्रवाई हो रही है, इस पर कोई आपत्ति नहीं है।

लेकिन सरकार का आरोप है कि मुख्तार अंसारी को जानबूझ कर पंजाब की कांग्रेस सरकार, उसे सौंप नहीं रही है।

यह भ्रमित करने वाली बात है। अंसारी को सौंपने का फैसला न्यायालय को करना है। जो न्यायालय का निर्देश होगा उसे कांग्रेस पार्टी और पंजाब की सरकार मानेगी। इसके अलावा और कुछ नहीं है।

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