बदलती नौकरियों की फिक्र करो, नए हुनर सीखो

लोला नायर और ज्योतिका सूद
भविष्य की नौकरियां
भविष्य की नौकरियां
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लोला नायर और ज्योतिका सूद
आप युवा हैं और रोजगार की दुनिया में कदम रखने को एकदम तैयार हैं, लेकिन कम होते रोजगार अवसरों से हतोत्साहित हैं? ऐसे में आइए रोजगार बाजार में भविष्य के ट्रेंड के बारे में जानें

क्‍या आप किसी पावर प्लांट में काम करने वाले वेल्डर या सोल्डर मशीन ऑपरेटर हैं? इसकी संभावना न के बराबर है। क्या आप दवाइयों के लिए ट्रांसक्रिप्शन लिखने वाले हैं? डाटा एंट्री ऑपरेटर हैं? मशीन चलाने वाले हैं? क्या आप बैंक के रोकड़िया हैं? आप नहीं तो  शायद, आपकी जान-पहचान का कोई हो, या कोई रहा हो...लेकिन इन सबमें कुछ एक जैसा है। ये सभी कुछ हद तक 20वीं सदी के कामगार लगते हैं, क्या नहीं? यह एक खास तरह की नौकरियों का छोटा नमूना है, जो दुनिया में उसके पहले नहीं था। इनमें अधिकांश के लिए वाकई कौशल, धैर्य और लगातार कठिन परिश्रम की जरूरत होती है, लेकिन बड़े ही निष्ठुर ढंग से तकनीकी चुनौतियों की वजह से ये पिछड़ चुके हैं या पिछड़ने की प्रक्रिया में हैं। यह सच है कि अभी भी हजारों वेल्डर और मशीन चलाने वाले हैं, संभवतः पहले से अधिक हैं। लेकिन यह तेजी से बदल रहा है। कुल नौकरियों के संदर्भ में देखें, तो ऐसी नौकरियों का अनुपात कम होता जा रहा है, जो एक बड़े बदलाव का संकेत है। और हां, इससे नौकरी सुरक्षा के सिकुड़ने का भी पता चलता है। कभी आप दशकों तक एक ही नौकरी में बिता सकते थे, यहां तक कि निजी क्षेत्र में भी। अब, जबकि सरकार ही कटौती कर रही है तो अधिकतम पांच साल से अधिक की उम्मीद मत कीजिए, बशर्ते आप खुशनसीब हों।   

मान लीजिए, आपकी आयु 19 साल की है, जो नौकरी बाजार में प्रवेश करने के लिहाज से एक साल या कुछ कम है। आपकी आयु उस वक्त बहुत छोटी रही होगी, जब टाइपिंग और शॉर्टहैंड सीखने को नौकरी पाने का पक्का हथियार माना जाता था। क्या अब आप वैसा करते हैं? अब यह कोई स्मार्ट तरीका नहीं है? तो, फिर आप क्या करते हैं? सबसे पहली बात, आपको यह समझना चाहिए कि आखिर जॉब मार्केट में क्या चल रहा है।

हम बेहद उथल-पुथल वाले दौर में हैं। अब कई दशकों में सबसे अधिक बेरोजगारी दर्ज की गई है, लेकिन यह महज संख्या नहीं है। इसके भीतर एक प्रक्रिया छुपी हुई है। इसका एक गुणात्मक संदेश है कि हमारे यहां नौकरियों का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और मौजूद स्‍थानों के लिए हमारे पास पर्याप्त नए कौशल नहीं हैं। इसका मतलब है कि जब अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी, तो हम रोजगारविहिन हो जा सकते हैं। मसलन, ये जगहें सॉफ्टवेयर डेवलपर, सिस्टम एनालिस्ट, बिजनेस ऑपरेशन स्पेशलिस्ट के लिए हो सकती हैं। लेकिन, यह जरूरी नहीं है कि इसके लिए उच्च तकनीक कौशल से लैस लोगों को ही बुलाया जाए। बढ़ती आबादी के साथ-साथ कुछ चुनिंदा क्षेत्रों का निश्चित रूप से विस्तार होगा और पुराने मानवीय कौशल कभी भी फीके नहीं पड़ेंगे। उदाहरण के तौर पर चिकित्सा क्षेत्र के बारे में सोचिएः हमें और अधिक नर्स, बच्चों/बुजुर्गों की देखभाल करने वाले, ‌िफजियोथेरेपिस्ट की जरूरत पड़ेगी। ग्राहक सेवा प्रतिनिधि की भी जरूरत होगी, लेकिन उन्हें सॉफ्टवेयर की जानकारी में कुशल होना पड़ेगा। अनुभवी इंजीनियर भी बहुत अधिक संख्या में हैं। गुणवत्तापूर्ण चक्र उस वक्त पूरा होगा, जब तकनीक कामवालियों और सफाईकर्मियों को मदद पहुंचाए।

 समाज और अर्थव्यवस्था विकसित हो रही है और वह अपने हिसाब से तालमेल बिठा रही है। इसी के अनुरूप आप में कौशल होना चाहिए। 30 साल या 50 साल पहले जो नौकरी हुआ करती थी, वह एक दशक पहले लगभग 10 साल के लिए सिकुड़ गई और अब किसी को प्रासंगिक बने रहने के लिए हर पांच साल पर खुद को अपग्रेड करने की जरूरत है।    

फरीदाबाद के 30 वर्षीय राजीव कुमार (बदला हुआ नाम) इन दिनों तनाव में हैं। वे पंजाब से टेक्सटाइल्स में बीटेक करने के बाद चार वर्षों से काम कर रहे थे। सब कुछ सही चल रहा था। वे एक अग्रणी गारमेंट एक्सपोर्ट हाउस में असिस्टेंट मर्केंडाइजर थे। लेकिन, पिछला छह महीना उनके लिए दुःस्वप्न साबित हुआ। “मुझे एक दूसरी कंपनी से ऑफर मिला और मैंने अपनी नौकरी बदल ली, क्योंकि वह 5000 रुपये का इंक्रीमेंट दे रही थी।” सच में यह बेहद अच्छा था। दो महीने के भीतर ही उसे कहा गया कि कारोबार मंदा चल रहा है और उसे दूसरी नौकरी तलाशनी चाहिए। उन्होंने कहा, “मैंने दूसरी कंपनी ज्वाइन की। वहां भी तीन महीने के भीतर मुझे पिंक स्लिप (नौकरी से निकालने का पत्र) थमा दिया गया।” उन्होंने जैसे काम किया, उसमें कुछ भी गलत नहीं है। दरअसल, यह देश्‍ा के गारमेंट और टेक्सटाइल उद्योग के लिए बुरा दौर चल रहा है, जिसे बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया जैसी अन्य दक्षिण एशियाई देशों से कड़ी होड़ मिल रही है। नतीजतन, मांग में भारी गिरावट आ रही है और व्यापक तौर पर नौकरियां जा रही हैं।

आखिरकार, यह राजीव जैसे लोगों को कहां लाकर छोड़ता है? अच्छा, उसे स्किल अपग्रेडेशन के रास्ते पर चलना पड़ता है। पारिवारिक स्थितियों की वजह से वे पीजी नहीं कर सके, लेकिन वे अब बिजनेस मैनेजमेंट या आगे किसी क्षेत्र में स्पेशलाइजेशन की तलाश कर रहे हैं। संभवतः किसी विदेशी यूनिवर्सिटी से नॉन-वुवेन और नैनो मटीरियल्स टेक्सटाइल्स में एमटेक करना चाहते हैं। यही भविष्य भी है।

इस सदी के शुरुआती 12 वर्षों में भारत ने विरोधाभासी रूप से रोजगाररहित तरक्की के दौर से गुजरा। युवाओं की फौज और नौकरी तलाशने में परेशान बड़ी आबादी की वजह से पिछले सात वर्षों में हालात और बदतर हो गए। हाल में बड़ी संख्या में छंटनी की वजह से इसमें बढ़ोतरी ही हुई। फिलहाल, बड़ी संख्या में यूवा नौकरी ढूंढ़ रहे हैं, जबकि रोजगार उतना ही कम है। हममें अधिकांश ने यह महसूस नहीं किया कि जॉब मार्केट न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में बदल चुका है। ऐसी असंख्य कहानियां हैं। हाल में जोमैटो ने 540 लोगों को निकाल दिया, जो कि उसके कुल स्टाफ का 10 फीसदी है। आपने इस संख्या के बारे में सुना होगा। लेकिन, क्या आपको इसकी वजह पता है? वे सभी ग्राहकों की मदद करने वाले लोग थे। उनकी जगह चैटबोट ऐप (चैटबोट एक सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन है, जो चैट इंटरफेस की तरह काम करता है और अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ग्राहकों के सवालों के जवाब देता है) ने ले ली, जो ग्राहकों के सभी सवालों का जवाब देता है। फर्म अब उनकी जगह चैटबोट मैनेजर्स चाहते थे।

सीधी-सी बात है कि तकनीक ने पुरानी नौकरियों को खत्म कर दिया और नई के लिए अवसरों का निर्माण किया है। रोशिनी मलिक को एक अकाउंटेंसी फर्म में तीन साल तक डाटा-एंट्री ऑपरेटर के तौर पर काम करने के बाद अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। कारण, उनका कौशल पुराना हो चुका था। “मैंने खुद से वादा किया है कि अपने कौशल को अपग्रेड करूंगी। मैं नाकाम रही, क्योंकि मुझे लगा कि नौकरी के दौरान प्रशिक्षण पर्याप्त होगा।” हममें से अधिकांश ऐसा ही सोचते हैं, लेकिन यह अतीत की स्थिर दुनिया में सही था। अब जबकि वक्त का पहिया बहुत तेजी से घूम रहा है, तो आपको अपनी जगह बरकरार रखने के लिए और अधिक कौशल और उसे लगातार निखारते रहने की जरूरत है। क्या इससे आपको डर लगता है और आप हताश हो जाते हैं? इसकी आवश्यकता नहीं है। ऑनलाइन और ऑफलाइन ऐसी कई जगहें हैं, जहां आप भविष्य की नौकरियों के लिए खुद को तैयार कर सकते हैं। (ग्राफिक्स देखें)

डिजिटल लहरें रेत के पुराने स्थापत्य को पूरी तरह बहा ले जाएंगी, लेकिन नई आकृतियां यानी नए अवसरों का भी निर्माण करेंगी। उदाहरण के तौर पर रिटेल क्षेत्र को लें। ई-कॉमर्स व्यापक तौर पर अपनी जगह बना रहा है, जिससे नौकरियों में कटौती होना अनिवार्य है। लेकिन, नए अवसर भी आएंगे, क्योंकि उन्हें तकनीक और डाटा साइंस में शिक्षित पेशेवरों जैसे रिटेल डाटा एनालिटिक्स, सप्लाई चेन एनालिटिक्स, डिजिटल मार्केटिंग, कस्टमर एक्सपीरिएंस, फ्रॉड एनालिटिक्स प्रोफेशनल की जरूरत होगी। आप मतलब समझ गए! 

इसी दौरान पुरानी नौकरियां घटती हैं। पूरी दुनिया में इससे बेचैनी है और खुद को आर्थिक राष्ट्रवाद के रूप में जाहिर कर रही है (अमेरिकी संरक्षणवाद और ब्रेग्जिट पर गौर करें)। इसलिए भारत में भी झटके लगेंगे। ईवाइ रिपोर्ट के मुताबिक, पहला रुझान भारत में विदेशी आइटी कार्यों में सुस्ती के तौर पर दिखेगा। यहां तक कि भारतीयों के लिए विदेशों में नौकरियों के अवसर भी कम होंगे। एक विशेष तरह की “मांग में विशेषज्ञता” बढ़ेगी। अगर युवा पारंपरिक कौशल से चिपके रहते हैं और उच्च कौशल हासिल नहीं करते हैं, तो “फिसलते वक्त के प्रभाव” से भारी नुक्सान के शिकार होंगे।

वक्त की मांग

जैसा पश्चिम में हुआ, आने वाले समय में नौकरियों का पदक्रम पिरामिड की तरह नहीं होगा, बल्कि तिरछी रेत घड़ी की तरह होगा। तथाकथित मिडिल जॉब्स की संख्या कम होगी, अधिकांश निचले पायदान पर लुढ़क जाएंगे और चुनिंदा ही अपग्रेड होकर शीर्ष पर बने रहेंगे। अगर मान लें कि दुनिया में एक सौ कर्मचारी हैं। शीर्ष के 20 फीसदी सालाना आय का 80 फीसदी कमाएंगे। बाकी 20 फीसदी हिस्से का बंटवारा दर्जनों या अधिकतर मिडिल जॉब में लगे और बड़ी संख्या में निम्न तबके के बीच होता है, जिनकी संख्या 60-70 फीसदी है। उदाहरण के तौर पर, डिजिटल ऐप की दुनिया में ऐप डिजाइनर शीर्ष ओहदे पर होंगे, जबकि कैब चलाने वाले और डिलिवरी बॉय जैसे निर्देश पाने वाले बड़ी संख्या में लोग निचले स्तर पर काम करेंगे। ग्लोबल ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म उडेमी इंडिया के एमडी इरविन आनंद बताते हैं, “यह उम्मीद की जाएगी कि लोग स्मार्ट हों और मशीन के साथ काम करने में सक्षम हों। नए कौशल और मौजूदा कौशल में बदलाव की जरूरत तेजी से बढ़ी है।”  

विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी 70 फीसदी संभावना है कि लगभग आधी मौजूदा नौकरियां- सटीक रूप से 47 फीसदी- अगले एक दशक में बदल जाएंगी। इनकी जगह नई मौलिक नौकरियों का निर्माण होगा। ईवाइ सर्वे के मुताबिक, 2022 तक भारत के जॉब बाजार में लगभग नौ फीसदी ऐसी नौकरियां होंगी, जिनका अभी अस्तित्व नहीं है और अन्य 34 फीसदी नौकरियां ऐसी होंगी, जिसके लिए कौशल में बुनियादी बदलाव की जरूरत होगी। 50-60 फीसदी नौकरियां मुहैया कराने वाले आइटी और ऑटो जैसे सेक्टर में बदलाव का तेज रुझान देखने को मिलेगा। लगभग एक चौथाई मौजूदा काम पर खतरा मंडरा रहा है। इस खतरे की जद में आइटी (20-35 फीसदी) और वित्तीय सेवा (20-25 फीसदी) क्षेत्र सबसे अधिक हैं। उडेमी-डेलोइट सर्वे में पाया गया कि पारंपरिक क्षेत्र में कौशल की आधी आयु पांच वर्ष है और यह इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी में 12-18 से भी कम है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मुताबिक, 2022 तक वैश्विक रूप से 21 फीसदी मौजूदा पद बेकार हो जाएंगे और 27 फीसदी में बिलकुल नए काम शामिल होंगे। नए बिजनेस मॉडल की वजह से कार्यक्षेत्र की प्रकृति में भी बदलाव आएगा। गिग इकोनॉमी (अस्थायी रोजगार वाली अर्थव्यवस्था/जरूरत के हिसाब से श्रम उपलब्ध कराने वाली अर्थव्यवस्था) तेजी से बदलने वाले व्हाइट कॉलर नौकरियों का निर्माण करेगी। ‘उबर मॉडल’ हेल्थकेयर, में‌िटनेंस और होम सर्विस जैसे सेक्टर की जगह ले लेगा। ऐसी बेहद कम नौकरियां ही होंगी, जिसके लिए किसी तरह के डिजिटल कौशल की जरूरत नहीं होगी। मैक्केंसी के एक अध्ययन से पता चलता है कि डिजिटल रूप से शिक्षित लोगों की मांग पूरी दुनिया में 2030 तक 55 फीसदी बढ़ जाएगी और यह कुल मानव श्रम का 17 फीसदी का प्रतिनिधित्व करेगा, जो कि 2016 के 11 फीसदी से कहीं अधिक है। शुरुआती दौर में तकनीक को अपनाने की वजह से भारत में यह अंतर और अधिक हो सकता है।     

फिर, यह केवल विविधता वाले आइटी साक्षरता की बात नहीं करता है, बल्कि एक अत्यधिक अनुकूलनीय, लगातार विकसित मस्तिष्क- यहां तक कि प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के लिए भी आह्वान करता है। कोई भी कोर्स आपको इस तरह का मस्तिष्क उपलब्ध नहीं कराएगा। भविष्य के कर्मचारी को स्वयं-सीखने की मशीन के रूप में देखें।

पीडब्ल्यूसी इंडिया (सोशल सेक्टर) के लीडर अशोक वर्मा कहते हैं, “सबसे अधिक क्षमताओं वाले पांच क्षेत्र ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक, रिटेल, खाद्य प्रसंस्करण, निर्माण, पर्यटन और हॉस्पिटेलिटी हैं। लेकिन नियोक्ता डिजिटल कौशल और डेटा को समझने की क्षमता रखने वाले लोगों को पसंद करेंगे।” ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के अध्ययन से पता चलता है कि अमेरिका में 2002 और 2016 के बीच पहले से ही कम डिजिटल कौशल आवश्यकताओं वाली नौकरियों की हिस्सेदारी 56 फीसदी से गिरकर 30 फीसदी हो गई थी, जबकि दूसरी तरफ पांच फीसदी से 23 फीसदी हो गई थी। ऐसे में, आगे की चुनौतियों की अपेक्षा की जा सकती है।

कभी नौकरियों के आकर्षक और सैलरी पैकेज के लिए फायदेमंद रही इंजीनियरिंग की डिग्री अब पर्याप्त नहीं होगी। लिंक्डइन वैश्विक सर्वेक्षण में पाया गया कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्रों में इंजीनियरिंग और तकनीशियन की भूमिका कम हो गई है। आइटी में सिस्टम प्रशासक की जगह उन लोगों ने ले ली है, जो इसके साथ डिजाइन और मार्केटिंग का अनुभव रखते हैं। खुद को ढालिए और तरक्की करिए या बर्बादी की राह पर देखिए। लगता है कि भारतीय छात्रों ने इसे एक हद तक महसूस किया है। एआइएसएचई की आधिकारिक रिपोर्ट कहती है कि 2018-19 में पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश चार साल के निचले स्तर पर था। पिछले पांच वर्षों में बीटेक और एमटेक में नामांकन में 50 फीसदी की गिरावट आई है! हालांकि, एमबीए को लेकर दीवानगी बनी हुई है, इसी अवधि के दौरान इसमें दाखिला लगभग 13 फीसदी बढ़ गया।

डिजिटल आंगनबाड़ी

माना जाता है कि सेक्टरों में कम तकनीक वाले लोगों ने भी एक परिवर्तन देखा है। सरकार द्वारा प्रायोजित इन्फ्रास्ट्रक्चर और कल्याणकारी योजनाओं में भी अब डिजिटल कौशल सर्वोपरि है। आंगनबाड़ी महिला और आशा कार्यकर्ताओं को अब स्वच्छ भारत मिशन और पोषण अभियान के डाटा रिकॉर्डिंग के लिए मोबाइल ऐप और डिजिटल टूल का उपयोग करना होगा। राज्य के अधिकारियों को इन परियोजनाओं की निगरानी के लिए उस डाटा को संभालना होगा। ई-गवर्नेंस अब निचले स्तर तक पहुंच रहा है। मैक्किंसे कहते हैं कि इसके साथ ही कई तरह के सामाजिक क्षेत्रों में मानवीय कौशल और सहानुभूतिपूर्ण जुड़ाव की जरूरत भी बढ़ेगी।

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर कमलेश व्यास का कहना है कि सेवा क्षेत्र देश में "रोजगार का सबसे बड़ा निर्माता" बनकर उभरेगा। वे आगे कहते हैं, दूसरी जगहों की तरह यहां भी, “नौकरियों में (भविष्य की) स्वरोजगार की हिस्सेदारी 50 फीसदी होगी।” जाहिर है कि इंटरप्रेन्योरशिप और स्टार्ट-अप एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बेशक, यह चुनौतीपूर्ण तरीकों से ‘नौकरी’ के पारंपरिक विचार को फिर से परिभाषित करता है। आइआइटी (रोपड़) के निदेशक सरित के. दास कहते हैं कि चुनौती सिर्फ इनोवेशन करने की नहीं है, बल्कि इन्हें बाजार तक ले जाने की भी है। वे इसके “व्यावसायिक पक्ष” के साथ विचारों को एक व्यवहारिक रूप से नए सिरे से तैयार करने और उन्हें विलुप्त कड़ी के रूप में भुनाने की क्षमता के रूप में देखते हैं। यदि एक युवा और कल्पनाशील व्यक्ति स्टार्ट-अप इंडिया, मुद्रा और अन्य योजनाओं की तलाश करता है, तो इस लिहाज से सामाजिक, भावनात्मक और नेतृत्व कौशल महत्वपूर्ण है।

उच्च शिक्षा कौशल- विकसित साक्षरता, मात्रात्मक और सांख्यिकीय, महत्वपूर्ण सोच, सूचना प्रक्रिया, व्याख्या- ऐसे क्षेत्र हैं, जहां अधिक मौके होंगे। डाटा एंट्री, डाटा प्रोसेसिंग, कैशियर, ग्राहक सेवा जैसी नौकरियों के लिए बुनियादी कौशल की जरूरत होती है और ऐसी नौकरियां घट रही हैं। हो सकता है कि इस बात को लेकर मतभेद हो कि पश्चिम और यहां पर यह कैसे सामने आता है, लेकिन यदि आप स्मार्ट हैं, तो केवल उन प्रतियोगिताओं पर ध्यान केंद्रित न करें जो आपके दायरे को संकुचित करती हों। इसके दो कारण हैं। सबसे पहले, यह एक तीव्र प्रतिस्पर्धा से लैस भीड़भाड़ वाला क्षेत्र है। जो बदले में मजदूरी को कम करेगा। होशियारी इसी बात में है कि खुद को अपग्रेड और सिर्फ अपग्रेड करें।

यही वजह है कि कौशल विकास चक्र के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण एक नया केंद्र बन गया है। लाखों भारतीय युवा अल्पकालिक ऑनलाइन पाठ्यक्रमों जैसे कि ऑस्ट्रेलिया- आधारित प्लेटफॉर्म, कोर्सेरा पर जोर दे रहे हैं। वैश्विक रूप से 42 लाख शिक्षार्थियों के साथ अमेरिका के बाद भारत इसका दूसरा सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा है। इसने 2018 में 10 लाख से अधिक नए शिक्षार्थियों को जोड़ा, जो औसतन 95,000 प्रति माह है। इनमें 64 फीसदी से अधिक कंप्यूटर/डाटा विज्ञान और व्यवसाय से संबंधित हैं। कोर्सेरा के एमडी (भारत और एपीएसी) राघव गुप्ता कहते हैं, “इनमें ज्यादातर महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली-एनसीआर, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश से हैं।” और, इनमें लगभग तीन चौथाई 18-29 आयु वर्ग के हैं, जबकि 30-39 वर्ष की आयु वर्ग वालों की संख्या 20 प्रतिशत है। एचआर सॉल्यूशन प्रोवाइडर हेड्सअप के संस्थापक सुमित कुमार बताते हैं कि अधिक आयु वर्ग वालों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां 20 फीसदी लोग आमतौर पर अपनी जरूरत के हिसाब से कौशल हासिल करने में सक्षम होते हैं।

जाहिर है कि यह सिर्फ उन लोगों की बात नहीं है, जिन्हें रचनात्मक सोच की जरूरत है। दो अंकों की टिकाऊ जीडीपी वृद्धि के लिए रोजगार सृजन की खातिर सक्षम वातावरण वक्त की मांग है। ईवाइ "विचलन प्रभाव" की बात करता है, जिससे नई अतिरिक्त नौकरियों के विकास में देरी हुई है। “लचीले रोजगार” को आधा करने के साथ पहले जीडीपी की 10 फीसदी वृद्धि ने नई नौकरियों में चार फीसदी की वृद्धि निश्चित की है, अब यह दो फीसदी है। उद्योग और सरकार को मिलकर काम करने की जरूरत है। कंपनियों को फिर से अपने कौशल को दुरुस्त करने की जरूरत है और इसे अतिरिक्त लागत के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के विकास के केंद्र के रूप में देखना चाहिए। सरकार को अपनी मौजूदा पहलों–आइटीआइ, पॉ‌िलटेक्निक और अन्य कौशल विकास संस्थानों का विस्तार भविष्य के बदलाव को देखते हुए करना चाहिए। इसे न केवल मौजूदा नौकरियों के लिए कौशल मुहैया करना चाहिए, बल्कि भविष्य की नौकरियों के लिए युवाओं को प्रशिक्षित करना चाहिए। ऐसे किसी भी कौशल के लिए अथक प्रयास और धन खर्च करने का कोई मतलब नहीं,जो कुछ वर्षों में बेकार हो जाए। अगर पर्याप्त संख्या में लोग खुद को अपग्रेड करते हैं, तो वह रेत-घड़ी बिखर सकती है।

डरे नहीं, सोचें, क्या कर सकते हैं...

यह वाकई मिथक है कि डाटा साइंटिस्ट बनने के लिए पीएचडी की डिग्री जरूरी है। इसके लिए पेशेवर सर्टिफिकेट के साथ कंप्यूटर कौशल और खुद से सीखने का जुनून उपयुक्त है। इसके पहले कंप्यूटर साइंसtया प्रोग्रामिंग की जानकारी जरूरी नहीं है

- अब 12वीं तक की पढ़ाई करने वाला भी गूगल आइटी सपोर्ट गेटवे सर्टिफिकेट कोर्स कर सकता है। इसके लिए बस 20 हजार से 25 हजार रुपये तक खर्च होंगे। गूगल द्वारा तैयार पांच पाठ्यक्रम वाले सर्टिफिकेट कोर्स से कोई भी आइटी सपोर्ट की शुरुआती नौकरी के लिए खुद को तैयार कर सकता है। आइटी में नौकरी का मतलब है कि कोई दफ्तर में या घर से छोटे उद्योगों या गूगल जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए हेल्प डेस्क का काम कर सकता है। इस पाठ्यक्रम को कई राष्ट्रीय और वैश्विक आइटी फर्म से मान्यता प्राप्त है। यह आपको इस क्षेत्र में भविष्य में अपने कौशल को विकसित करने में मदद करता है।

 - दूसरा उपयोगी पाठ्यक्रम है, डाटा साइंस। इसे आइबीएम कराती है, जिसकी लागत 2700 रुपये प्रति महीना है। इसमें नौ पाठ्यक्रम शामिल हैं, जो आपको नौकरी के लिए जरूरी कौशल और तकनीक मुहैया कराते हैं। इसमें ओपन सोर्स टूल ऐंड लाइब्रेरी, पद्धतियों, पाइथॉन, डाटाबेस, एसक्यूएल, डाटा विजुअलाइजेशन, डाटा एनालिसिस और मशीन लर्निंग सहित डाटा साइंस जैसे व्यापक विषय शामिल हैं। आप रियल डाटा साइंस टूल्स और रियल वर्ल्ड डाटा सेट का इस्तेमाल करते हुए आइबीएम क्लाउड पर अभ्यास करेंगे।

इसके अलावा, कोई भी ऑस्ट्रेलिया की कोर्सेरा पर कम अवधि वाले ऑनलाइन पाठ्यक्रम चुन सकता है। वैश्विक रूप से 42 लाख शिक्षार्थियों वाले इस प्लेटफॉर्म पर लगभग 64 फीसदी कंप्यूटर ऐंड डाटा साइंस पढ़ते हैं। भारत अमेरिका के बाद इसका दूसरा सबसे बड़ा बाजार है।

 

बदलती काम की दुनिया

उभरते हुएः सभी क्षेत्र में कुछ खास तरह के कौशल की मांग आम है। उनकी बार-बार जरूरत पड़ती है, चाहे वह ऊर्जा और खनन, बैंकिंग और बीमा, हेल्थकेयर, मैन्युफैक्चरिंग या रिटेल के क्षेत्र हों।

 आइटी औंड टेलकमः  सॉफ्टवेयर डेवलपर्स (ऐप, वेब, कंप्यूटर) ग्राहक सेवा प्रतिनिधि कंप्यूटर सिस्टम एनालिस्ट फाइनेंशियल एनालिस्ट कंप्यूटर ऐंड इन्‍फॉर्मेशन सिस्टम मैनेजर्स बिजनेस ऑपरेशंस स्पेशलिस्ट जनरल ऐंड ऑपरेशंस मैनेजर्स

एनर्जी ऐंड माइनिंगः इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स इलेक्ट्रिकल ऐंड एलेक्र्टॉनिक्स टेक्नीशियन अकाउंटेंट और ऑडिटर मैनेजमेंट एनालिस्ट सेल्स रिप्रजेंटेटिव प्रशिक्षित इंजीनियर

बैंकिंग और बीमाः लोन अधिकारी पर्सनल फाइनेंस एडवाइजर

हेल्थकेयरः पंजीकृत नर्स व्यक्तिगत सेवा सहयोगी घर पर स्वास्थ्य सेवा सहयोगी बच्चों की देखभाल के लिए डेंटल हाइजेनिस्ट काम वाली और सफाईकर्मी ‌फिजियोथेरेपिस्ट मेडिकल ऐंड हेल्थ सर्विस मैनेजर 

मैन्युफैक्चरिंगः प्रशिक्षित इंजीनियर अकाउंटेंट और ऑडिटर सेल्स मैनेजर फर्स्ट लाइन सुपरवाइजर ऑफ ऑफिस सपोर्ट वर्कर्स

रिटेलः सेल्स रिप्रेजेंटेटिव, डेमॉन्सट्रेटर और प्रोडक्ट प्रोमोटर फर्स्ट लाइन सुपरवाइजर ऑफ ऑफिस सपोर्ट वर्कर्स मजदूर और माल ढोने वाला स्टॉक ऐंड मटीरियल मूवर्स मार्केट रिसर्च ऐंड मार्केटिंग स्पेशलिस्ट फार्मासिस्ट्स

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गर्त की ओरः खास तरह के कौशल की मांग में वैश्विक रूप से गिरावट का पैटर्न भी देखा जा रहा है। उनके साथ-साथ क्षेत्रों में बदलाव का ताल्लुक कम तकनीकी कौशल या पूरी तरह से तकनीक इसके लिए जिम्मेदार हैं। जैसेः

प्रशासनः ऑफिस क्लर्क (बिलिंग, एकाउंटिंग, रिसेप्शन वगैरह) वर्ड प्रोसेसर और टाइप करने वाले डाटा एंट्री करने वाले फोन ऑपरेट करने वाले खाना तैयार करने वाले

एनर्जीः पावर प्लांट ऑपरेटर स्टेशनरी इंजीनियर और बॉयलर ऑपरेटर कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट इंजीनियर और ऑपरेटर वेल्डिंग, ब्रेजिंग और सोल्डिंग मशीन चलाने वाले सर्विस यूनिट ऑपरेटर, ऑयल, गैस और माइनिंग मीटर रिडर हेवी ऐंड ट्रैक्टर-ट्रॉली ट्रक ड्राइवर माइन शटल कार ऑपरेटर विंड टरबाइन सर्विस टेक्नीशियन

बैंकिंग और बीमाः बिल और खाता संग्रहक कंप्यूटर नेटवर्क सपोर्ट स्पेशलिस्ट सेक्रेटरी ऐंड एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट बीमा बेचने वाले एजेंट रोकड़िया कंप्यूटर यूजर सपोर्ट स्पेशलिस्ट  

हेल्थकेयरः मेडिकल सेक्रेटरी फार्मेसी टेक्नीशियन मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन लिखने वाला क्लिनिकल लैब टेक्नीशियन मेडिकल उपकरण मरम्मत करने वाला 

मैन्युफैक्चरिंगः मशीन चलाने वाला असेंबलर पैकर और पैकेजर फूड रोस्टिंग, बेकिंग ऐंड ड्राइंग मशीन ऑपरेटर मेटल ऐंड प्लास्टिक ड्रिलिंग/बोरिंग मशीन टूल लगाने वाला एयरक्राफ्ट स्ट्रक्चर ऐंड सिस्टम असेंबलर कोटिंग, पेंटिंग ऐंड स्प्रेयिंग मशीन सेट करने वाला पैकेजिंग ऐंड फिलिंग मशीन ऑपरेटर ऐंड टेंडर मशीन फीडर ऐंड ऑफबीयरर

रिटेलः कार्गो और मालढुलाई एजेंट ट्रक ड्राइवर माप-तौल, जांच और सैंपल करने वाला कसाई और मांस काटने वाला ऑटोमेटिव सर्विस टेक्नीशियन ऐंड मैकेनेक पैकर और पैकेजर

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