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नीरव मोदी : अभी प्रत्यर्पण दूर की कौड़ी

इंग्लैंड से अपराधियों को भारत लाने का रिकॉर्ड अच्छा नहीं, इस हीरा कारोबारी के सामने अभी कई विकल्प बाकी
प्रत्यर्पण पर संशयः नीरव मोदी मार्च 2019 से इंग्लैंड की जेल में

अपराधियों को दूसरे देश से पकड़ कर लाना हमेशा मुश्किल रहा है। इंग्लैंड से तो खास कर। प्रत्यर्पण संधि के बावजूद भारत तीन दशक में इंग्लैंड से सिर्फ तीन अपराधियों को ला सका। पहला 2016 में, दूसरा 2020 में और तीसरा इसी साल मार्च में। पंजाब नेशनल बैंक को 13,500 करोड़ रुपये का चूना लगाकर फरवरी 2018 में भारत से भागने वाले नीरव मोदी के कारण यह मुद्दा एक फिर चर्चा में है। ऐसे मामलों के लिए विशेष तौर से बनी लंदन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने मोदी पर लगाए सभी आरोपों को सही पाया और दो साल की सुनवाई के बाद 25 फरवरी 2021 को प्रत्यर्पण का फैसला दिया। इंग्लैंड की गृह मंत्री प्रीति पटेल ने 15 अप्रैल को प्रत्यर्पण आदेश पर दस्तखत भी कर दिए। इसके बावजूद उसे भारत लाने में समय लग सकता है। उसके पास हाइकोर्ट में अपील का विकल्प है। वहां प्रत्यर्पण पर मुहर लगी तो यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट जाने और फिर इंग्लैंड में शरण के लिए आवेदन करने का विकल्प होगा। नीरव मोदी मार्च 2019 से लंदन की जेल में है।

नीरव मोदी के प्रत्यर्पण पर संशय की वजह अतीत के मामले और हाल का विजय माल्या का उदाहरण है। वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने 2018 में माल्या के प्रत्यर्पण की अनुमति दी थी, जिसे हाइकोर्ट ने भी सही ठहराया। फिर भी अभी तक उसे भारत नहीं लाया जा सका है। इंग्लैंड सरकार का कहना है कि कुछ गोपनीय कार्रवाई चल रही है जिसके पूरा होने तक प्रत्यर्पण संभव नहीं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक पूर्व अधिकारी के अनुसार वैसे तो भारत में अपराध करने वाले अनेक देशों में जाते रहे हैं, लेकिन इंग्लैंड उनकी पसंदीदा जगह बनता जा रहा है। गोवा के एक शेल्टर होम में 100 से ज्यादा अनाथ बच्चों का यौन शोषण करने के बाद रेमंड एंड्रयू वर्ली 1991 में इंग्लैंड भाग गया। 1993 में सूरत में बम विस्फोट कराने वाला मोहम्मद हनीफ उमरजी पटेल उर्फ टाइगर हनीफ भी 2010 में इंग्लैंड में पकड़ा गया। उसी साल नौसेना अधिकारी रवि शंकरन इंग्लैंड में गिरफ्तार हुआ। उस पर गोपनीय सूचनाएं लीक करने का आरोप था। माल्या और मोदी भी भाग कर वहीं गए तो इसकी भी वजह है।

भारत और इंग्लैंड के बीच 22 सितंबर 1992 को प्रत्यर्पण संधि हुई थी। इसके अनुच्छेद 9 में कहा गया है कि नस्ल, धर्म या राजनीतिक विचारों के कारण किसी के खिलाफ कार्रवाई की संभावना हो तो प्रत्यर्पण से इनकार किया जा सकता है। तय समय में पर्याप्त सबूत नहीं देने पर भी यह संभव है। अपराध के लिए दोनों देशों के कानून में कम से कम एक साल की सजा का प्रावधान जरूरी है। मौत की सजा का प्रावधान होने पर भी आश्रयदाता देश प्रत्यर्पण से मना कर सकता है।

अपराधी इन्हीं प्रावधानों का दुरुपयोग करते हैं। माल्या की दलील है कि सीबीआइ स्वतंत्र नहीं, वह सरकार के प्रभाव में काम करती है तो जांच भी स्वतंत्र नहीं होगी। मुंबई की आर्थर जेल की ‘खराब हालत’ का हवाला देते हुए कहा कि वहां रहना अमानवीय होगा। बुकी संजीव चावला का प्रत्यर्पण भी तिहाड़ जेल की ‘खराब हालत’ के कारण लंबे समय तक रुका रहा।

कागजी कार्रवाई में देरी से भी प्रत्यर्पण टल सकता है, जैसा गुजरात की आरती धीर और उसके पति कंवलजीत रायजादा के मामले में हुआ। उन पर बीमा की रकम की खातिर गोद लिए बेटे की हत्या के प्रयास का आरोप है। भारत की तरफ से आश्वासन पत्र में देरी के कारण मजिस्ट्रेट कोर्ट ने प्रत्यर्पण याचिका खारिज कर दी। नेवल वार रूम लीक मामले में नौसेना अधिकारी रवि शंकरन ने 2010 में इंग्लैंड में सरेंडर किया। मार्च 2013 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने तो प्रत्यर्पण की मंजूरी दे दी पर हाइकोर्ट ने फैसला खारिज कर दिया। कहा कि भारत ने पर्याप्त सबूत नहीं दिए हैं। बाल यौन शोषण के आरोपी रेमंड एंड्रयू वर्ली खुद को डिमेंशिया पीड़ित बता प्रत्यर्पण से बच गया।

इंग्लैंड से पहला प्रत्यर्पण, संधि के 34 साल बाद, 18 अक्टूबर 2016 को हुआ जब समीरभाई वीनूभाई पटेल को गुजरात दंगों के मामले में भारत लाया गया। हालांकि माना जाता है कि वह स्वयं आना चाहता था। विदेश मंत्रालय के अनुसार अभी 45 देशों के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि है। 2002 से करीब 75 अपराधियों को 20 अलग-अलग देशों से लाया गया है।

इंग्लैंड के अलावा देखा जाए तो दूसरे देशों से प्रत्यर्पण में भारत को सफलता मिली है। पुर्तगाल ने 2006 में अबू सलेम और मोनिका बेदी का प्रत्यर्पण इस शर्त पर किया कि मौत की सजा नहीं दी जाएगी। अगस्तावेस्टलैंड रिश्वत मामले में माइकल जेम्स, राजीव सक्सेना और दीपक तलवार को अमीरात से लाया गया। हत्या और अपहरण के मामले के आरोपी छोटा राजन को इंडोनेशिया से, भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में अनूप चेटिया को बांग्लादेश से लाया गया।

बहरहाल, पीएनबी घोटाले के एक और मुख्य आरोपी, नीरव के मामा मेहुल चोकसी ने एंटीगुआ की नागरिकता ले ली है। गीतांजलि ग्रुप के मालिक, चोकसी के मामले में भारत को कोई खास सफलता नहीं मिली है। नीरव के भाई नेहल मोदी के प्रत्यर्पण के लिए सीबीआइ ने महीने भर पहले अदालत में हलफनामा दिया है। उसे पिछले साल दिसंबर में अमेरिका में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जमानत मिल गई। नेहल पर सबूत मिटाने/गायब करने के भी आरोप हैं। फिलहाल तो इनका प्रत्यर्पण भी दूर की कौड़ी लगती है।

 

प्रत्यर्पण में सफलता कम, विफलता ज्यादा

जिन्हें भारत लाया गया

 

संजीव चावला

2000 में दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट टीम के कप्तान हैंसी क्रोनिए के साथ मैच फिक्सिंग का आरोपी। तिहाड़ जेल की खराब हालत को आधार बना प्रत्यर्पण का विरोध किया था, जिसे मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मान लिया। हाइकोर्ट ने भी भारत के आश्वासन पत्र को नाकाफी करार दिया। तीसरे पत्र में भारत ने आश्वासन दिया कि उसे अलग सेल में रखा जाएगा और चिकित्सा मुहैया कराई जाएगी। तब उसके प्रत्यर्पण पर मुहर लगी। मानवाधिकार कोर्ट में भी उसकी अपील खारिज हो गई। उसे फरवरी 2020 में भारत लाया गया।

 

किशन सिंह

राजस्थान निवासी किशन ने 2015 में इंग्लैंड की नागरिकता ले ली थी। बड़े लोगों की पार्टियों में ड्रग्स सप्लाई करता था। ये ड्रग्स अमेरिका, मलेशिया और अरब देशों को भी भेजे जाते थे। किशन को 2018 में लंदन में गिरफ्तार किया गया। वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने मई 2019 में उसे भारत भेजने का फैसला सुनाया। प्रत्यर्पण के खिलाफ उसकी याचिका लंदन हाइकोर्ट और फिर यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स में भी खारिज हो गई। आखिरकार दिल्ली पुलिस की टीम 21 मार्च 2021 को उसे लेकर आई।

 

इन्हें लाने में नाकामी

 

विजय माल्या

भारत ने 9,000 करोड़ रुपये गबन के इस आरोपी के प्रत्यर्पण के लिए 9 फरवरी 2017 को आवेदन किया था। माल्या ने कहा कि राजनीतिक कारणों से भारत उसका प्रत्यर्पण चाहता है। जेल की हालत का भी हवाला दिया। उसकी अपील लंदन हाइकोर्ट ने 20 अप्रैल 2020 को और सुप्रीम कोर्ट ने 14 मई 2020 को खारिज की। फिर भी प्रत्यर्पण नहीं हुआ है। इंग्लैंड के गृह मंत्रालय का कहना है कि गोपनीय कानूनी प्रक्रिया चल रही है। माना जा रहा है कि वह इंग्लैंड में शरण लेना चाहता है। उसे इंग्लैंड के कुछ बड़े नेताओं का संरक्षण मिलने की भी चर्चा है।

 

ललित मोदी

आइपीएल के प्रसारण अधिकार की नीलामी में हेरा फेरी, सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोप हैं। ललित मोदी ने कुल 2,200 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है। मार्च 2010 में वह लंदन चला गया और ईडी ने दिसंबर 2012 में केस दर्ज किया। उसके प्रत्यर्पण के मामले में जांच एजेंसियों की काफी ढिलाई भी सामने आई। मार्च 2016 में भारत ने इंटरपोल से नोटिस जारी करने का आग्रह किया जो खारिज हो गया। मोदी ने इंटरपोल के पूर्व प्रमुख रोनाल्ड नोबल के साथ अपनी तस्वीरें साझा कीं जिसमें उसने नोबल को ‘भाई’ कह कर संबोधित किया था। दिल्ली हाइकोर्ट में जिन वकीलों ने मोदी की पैरवी की थी, उनमें एक वरिष्ठ भाजपा नेता की बेटी भी शामिल थीं।

 

तहव्वुर राना

26/11 हमले का एक आरोपी तहव्वुर राना अभी अमेरिका की जेल में है। एनआइए उससे पूछताछ करना चाहती है। इसके लिए 22 अप्रैल को प्रत्यर्पण पर सुनवाई होनी थी जिसे कोर्ट ने 24 जून तक टाल दिया। हालांकि अमेरिकी सरकार का रवैया भारत के लिए सकारात्मक है। इसलिए मार्च में जब राना ने कोर्ट में अतिरिक्त जवाब देने के लिए आवेदन किया तो अमेरिकी सरकार ने यह कह कर विरोध किया कि इससे 22 अप्रैल को शुरू होने वाली प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में बाधा आएगी।

 

नदीम सैफी

संगीतकार नदीम-श्रवण जोड़ी के नदीम अख्तर सैफी को टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार की हत्या में आरोपी बनाया गया था। मुंबई के अंधेरी वेस्ट इलाके में 12 अगस्त 1997 को जीतेश्वर महादेव मंदिर के सामने गुलशन कुमार की हत्या कर दी गई थी। पुलिस का कहना है कि इसके लिए नदीम सैफी ने दाऊद गैंग को पैसे दिए थे। घटना के बाद नदीम इंग्लैंड चले गए थे। मुख्य गवाह मोहम्मद अली हुसैन शेख ने पहले तो हत्याकांड में नदीम के भी शामिल होने की बात कही, लेकिन बाद में मुकर गया। लंदन हाइकोर्ट ने यह कह कर प्रत्यर्पण याचिका खारिज कर दी कि प्रथम दृष्टया कोई आधार नहीं बनता है। बाद में नदीम ने इंग्लैंड की नागरिकता ले ली।

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