अंदरखाने

कौशिक बसु
कौशिक बसु

“अप्रैल-जून 2021 में 20.1% जीडीपी ग्रोथ काफी बुरी खबर है, सामान्य अंकगणित से इसे समझा जा सकता है। 20.1% ग्रोथ अप्रैल-जून 2020 की तुलना में है जब जीडीपी में 24.4% गिरावट आई थी। यानी अप्रैल-जून 2019 की तुलना में जीडीपी 9.2% नीचे है।”

कौशिक बसु, केंद्र सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार

 

शिकायतें बेअसर

मध्य प्रदेश में रेरा अध्यक्ष के कामकाज के तरीकों को लेकर बिल्डर लॉबी में असंतोष बना हुआ है। उन्हें आए लंबा समय हो गया, फिर भी प्रोजेक्ट को अनुमति मिलने की प्रक्रिया सामान्य नहीं हो पाई है। बड़ी संख्या में मामले लंबित पड़े हैं। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री तक कई माध्यमों से पहुंच चुकी है, लेकिन अभी तक उसका कोई असर दिखाई नहीं दिया। वास्तव में मुख्यमंत्री इसमें पड़ना नहीं चाहते हैं। रेरा अध्यक्ष मुख्य सचिव से सीनियर हैं, इसलिए वे भी उनसे कुछ नहीं कह पा रहे हैं। दोनों यह मान कर चल रहे हैं कि समय बीतने के साथ स्थितियां सामान्य हो जाएंगी इसलिए कोई हस्तक्षेप न किया जाए।

टिक कर रहने की हिदायत

हरियाणा के भाजपा नेता अपने शीर्ष केंद्रीय नेताओं की ही नहीं मानते। कृषि कानूनों को लेकर आंदोलनरत किसानों के विरोध को देखते हुए शीर्ष नेताओं ने मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर और प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ को सलाह दी थी कि जब तक किसानों का विरोध मंद नहीं पड़ता तब तक सरकार और संगठन के सार्वजनिक कार्यक्रम स्थगित किए जाएं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 15 अगस्त को ध्वजारोहण के कार्यक्रम उन शहरों में रद्द कर दिए गए जहां किसान आंदोलन का जोर था। लेकिन उसके बाद से किसानों के विरोध के बीच सरकार और संगठन के तमाम कार्यक्रम जारी हैं। हाल ही मुख्यमंत्री अपने निवार्चन क्षेत्र करनाल में पार्टी के कार्यक्रम में पहुंचे तो बेकसूर किसानों पर पुलिस ने लाठियां इस आशंका से भांज डालीं कि कहीं मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में खलल न पड़ जाए। किसानों पर लाठीचार्ज का मसला उछला तो फटकार के साथ फिर हिदायत मिली कि ‘टिक कर रहो’।

कॉमेडी से बुलावा

बिहार की राजनीति में उछल-कूद मचाने वाले ‘बड़े भाई’ से सब परेशान हैं। छोटा भाई से लेकर पार्टी के दूसरे नेता तक। पत्‍नी से मधुरता नहीं रही तो रास्‍ते भी अलग हो गए। उम्रदराज बीमार पिता भी बड़े बेटे की हरकतों से परेशान हैं। कभी जेल-अस्‍पताल तो कभी दिल्‍ली बुलाकर समझाते-झिड़कते रहे। बड़ों के सम्‍मान की नसीहत देते रहे। गंभीर स्‍वभाव वाले प्रदेश अध्‍यक्ष बड़े भाई की हरकत से परेशान हैं। अध्‍यक्षजी से विवाद के बाद पिता ने दिल्‍ली तलब किया था। लौटे तो पार्टी दफ्तर में पिताजी के कमरे में ही काबिज हो गए। अब बड़े भाई को कपिल शर्मा के कॉमेडी शो से बुलावा आया है। अपनों से गर्व से बोले, टिकट का इंतजार है। वहां मौजूद एक दूसरे नेता ने कानाफूसी करते हुए कहा कि इनके लिए वही जगह अच्‍छी है।

अफसर हुए तो क्या

मध्य प्रदेश में दो महीने तक तबादलों की लंबी प्रक्रिया चली। यह प्रक्रिया पहले जुलाई में खत्म हो जानी थी, लेकिन मंत्रियों के दबाव के बाद इसे अगस्त में भी जारी रखा गया। तबादलों का पूरा सीजन केवल मंत्रियों के नाम रहा। विभागीय अधिकारी फाइलों पर हस्ताक्षर करने के अलावा कुछ नहीं कर पाए। मंत्रियों ने उनके भेजे गए नामों को बदलकर अपने अनुसार नाम तय किए। हर सूची के हर नाम पर मंत्री जी की मंजूरी ली गई। यह मंजूरी तब तक नहीं मिली जब तक उनके स्टाफ की विशेष खातिरदारी नहीं हुई। ऐसे में अधिकारियों का परेशान होना स्वभाविक है।

सफाई वाला पर्चा

पुरानी पार्टी के डॉक्‍टर साहब बड़बोलेपन के लिए जाने जाते हैं। इलाके में खूब सक्रिय रहते हैं। इधर सरकार गिराने की साजिश प्रकरण में सुर्खियों में थे। उस प्रकरण से पहले कुछ उम्मीद लेकर कई विधायकों के साथ संगठन के बड़े दक्षिण भारतीय नेता के पास गए थे। उम्‍मीद तो पूरी हुई नहीं, नए फेरबदल में पार्टी संगठन में उनकी कुर्सी भी चली गई। कुर्सी जाते ही संगठन नेता के पास जा पहुंचे। उनके करीबी एक नेता ने कहा कि इस बार साथ में मांग वाला पर्चा नहीं, सफाई देने वाला पर्चा था।

साहब के ऊपर बड़े साहब

झारखंड में फूल वाली पार्टी में उनकी मोनोपोली थी। मगर पार्टी के लोगों की शिकायत थी कि वे नीचे के कार्यकर्ताओं से मिलते ही नहीं हैं। पार्टी कार्यालय की ऊपरी मंजिल पर सिर्फ बड़े लोगों से घिरे रहते हैं। क्षेत्र भ्रमण भी न के बराबर करते हैं। आरोप यह भी है कि पार्टी पर अपेक्षित ध्‍यान नहीं दे रहे थे और एक पूर्व मुख्‍यमंत्री के कुनबे को ही प्राथमिकता दे रहे थे। मगर संगठन के हाकिम की शिकायत करे तो कौन। अब उनके ऊपर पार्टी ने एक नया ‘अधिकारी’ तैनात कर दिया।

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