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चुनावी प्रक्रिया में फेसबुक की भूमिका संदिग्ध

भारत में चुनावों को प्रभावित करता है फेसबुक!

नेताओं के भड़काऊ पोस्ट पर कार्रवाई न करने के आरोप के बाद अब ‘फेसबुक पेपर्स’ के मुताबिक फेसबुक भारत में फर्जी अकाउंट्स से झूठी खबरों के जरिए चुनावों को प्रभावित करता है। फेसबुक को इसकी जानकारी होने के बाद भी वह इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाता। ‘फेसबुक पेपर्स’ नाम से जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि फेसबुक भारत में ‘फेकबुक’ बनता जा रहा है। फेसबुक के कर्मचारियों से मिली जानकारी और बाहर आई कई अंदरूनी रिपोर्ट्स के अध्ययन के आधार पर यह खुलासा किया गया है। समाचार संस्थानों के एक अंतरराष्ट्रीय समूह ने ‘फेसबुक पेपर्स’ नाम से सार्वजनिक किया है। इस समूह में द न्यूयॉर्क टाइम्स और सीएनएन जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं।

फेसबुक की पूर्व प्रोडक्ट मैनेजर फ्रांसिस होगेन ने इन रिपोर्ट्स के लिए कागजात जुटाए हैं। इसी के आधार पर वे फेसबुक के काम करने के ढंग पर खुलासे कर रही हैं। पिछले कुछ महीने से फेसबुक पर लगातार एक के बाद एक आरोप लग रहे हैं। कंपनी के कई निजी दस्तावेज भी सार्वजनिक हुए हैं। कहा जा रहा है कि कंपनी में काम कर चुकी और अब व्हिसलब्लोअर बन चुकीं, फ्रांसिस होगेन ने अमेरिका की सिक्योरिटीज ऐंड एक्सचेंज कमीशन और वॉल स्ट्रीट जनरल अखबार को ये कागजात दिए हैं। होगेन फेसबुक की सिविक मिसइन्फॉर्मेशन टीम की लीड प्रोडक्ट मैनेजर थीं। वे फेसबुक में लोकतंत्र और भ्रामक सूचनाओं पर काम करती थीं। इसी साल मई में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। खुलासे में कहा गया है कि कंपनी इन सबके नकारात्मक असर के बारे में जानते हुए हुए भी इन बातों को नजरअंदाज करती रही है। होगेन का कहना है कि फेसबुक बच्चों को जानबूझकर अपने ऐप की लत लगाने की कोशिश करती है। होगेन ने आरोप लगाया कि फेसबुक बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, लोकतंत्र और समाज के लिए बड़ा खतरा है। यह भेदभाव पैदा करता है। चुने गए जनप्रतिनिधियों को इस पर काबू करना चाहिए। होगेन ने यह भी कहा कि इंस्टाग्राम ऐप सुरक्षित न होने के बाद भी कंपनी इसमें सुधार के लिए कोई काम नहीं करती। अमेरिकी सीनेट में गवाही के दौरान होगेन ने कहा कि म्यांमार और इथोपिया में गृहयुद्ध के दौरान भी इसी के माध्यम से झूठी सूचनाएं फैलीं। फेसबुक भारत में भी नफरत फैलाने वाली पोस्ट पर रोक नहीं लगा पाई।

तमाम आरोपों के बाद फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने कहा है कि इन दावों में कोई सच्चाई नहीं है। अगस्त 2020 में वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट सामने आने के बाद से फेसबुक को भारत में जांच का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया था कि कंपनी की सीनियर एग्जीक्यूटिव अनखी दास पर कई नेताओं से जुड़े पेजों पर कंपनी के हेट-स्पीच नियम लागू करने का विरोध किया था। इसके बाद अनखी दास को इस्तीफा देना पड़ा था। फेसबुक का भारत में बड़ा बाजार है। इसके भारत में 32.8 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं।

पेगासस जासूसी और लखीमपुर खीरी कांड पर कड़ा रुख

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच पेगासस जासूसी मामले और लखीमपुर खीरी हिंसा की सुनवाई कर रही है। पेगासस मामले में स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस जासूसी मामले की जांच एक विशेषज्ञ कमेटी करेगी। उच्चतम न्यायालय ने जासूसी पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी कीमत पर लोगों की जासूसी मंजूर नहीं की जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है और जांच के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है। इसी तरह उच्चतम न्यायालय ने लखीमपुर खीरी कांड में गवाहों की कम संख्या पर सवाल किया है। यूपी सरकार की ओर से पेश हुए हरीश साल्वे ने बताया था कि 30 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए, इनमें 23 चश्मदीद गवाह थे। चीफ जस्टिस ने कहा कि घटनास्थल पर बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे क्योंकि वहां रैली चल रही थी, तब सिर्फ 23 चश्मदीद ही क्यों मिले? साल्वे ने बताया कि राज्य सरकार ने सार्वजनिक विज्ञापन देकर आग्रह किया है कि चश्मदीद सामने आएं। 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों पर एसयूवी गाड़ी चढ़ा दी गई थी, जिसमें 4 प्रदर्शनकारी किसानों की जान चली गई थी। इसके बाद हुई हिंसा में दो भाजपा कार्यकर्ता, एक ड्राइवर और एक पत्रकार की मौत हो गई। किसानों के गाड़ी से कुचले जाने के बाद गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया था और कथित तौर पर ड्राइवर पीटकर हत्या कर दी थी। इस मामले में गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्र समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

विज्ञापनों पर विवाद

आपत्ति के बाद डाबर ने वापस लिया विज्ञापन

भारत में कुछ दिनों से विज्ञापन जगत पर बहुत हमले हो रहे हैं। मान्यवर और फैब इंडिया के बाद ताजा विवाद डाबर कंपनी का है। अपने एक उत्पाद फेम ब्लीच के विज्ञापन में कंपनी ने एक समलैंगिक जोड़े को करवा चौथ मनाते हुए दिखाया था। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा समेत कुछ लोगों ने डाबर के इस विज्ञापन पर कड़ी आपत्ति जताई थी। सोशल मीडिया में आलोचना के बाद कंपनी ने इस विज्ञापन को हटा लिया है और लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए माफी भी मांगी है।

घट रही है भारतीयों की लंबाई

‘ट्रेंड ऑफ एडल्ट हाइट इन इंडिया फ्रॉम 1998 टू 2015’ नाम की एक स्टडी में बताया गया है कि भारतीयों की औसत लंबाई घट रही है। 2005-06 से 2015-16 तक वयस्क पुरुषों और महिलाओं की औसत ऊंचाई में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि गरीब तबके की महिलाओं, खासतौर से आदिवासी महिलाओं में यह गिरावट सबसे ज्यादा है। चिंता की वजह यह है कि भारतीयों की लंबाई कम होने के पीछे गैर-आनुवंशिक कारण भी हैं। इनमें जीवनशैली, पोषण, सामाजिक और आर्थिक कारण शामिल हैं। पूरे भारत में वयस्कों की औसत लंबाई के विभिन्न ट्रेंड्स पर अध्ययन के नतीजों में स्पष्ट प्रमाण मिले हैं कि 15-25 वर्ष के आयु वर्ग में महिलाओं और पुरुषों की औसत ऊंचाई घटी है। इसमें महिलाओं की औसत ऊंचाई लगभग 0.42 सेमी और पुरुषों की औसत ऊंचाई में 1.10 सेमी की बड़ी गिरावट आई।

बीच बहस में

प्रकाश झा

प्रकाश झा

आश्रम-3 वेबसीरीज की शूटिंग के दौरान उन पर स्याही फेंकी गई। भोपाल में बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने उनके साथ धक्कामुक्की की और तोड़फोड़ के बाद आरोप लगाया कि सीरीज में हिंदुओं के खिलाफ दृश्य दिखाए जा रहे हैं, जो स्वागतयोग्य नहीं है।

योगेंद्र यादव

योगेन्द्र यादव

संयुक्त किसान मोर्चा ने लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में मारे गए भाजपा कार्यकर्ताओं की मृत्यु पर शोक प्रकट करने उनके घर जाने के कारण यादव को संगठन से एक महीने के लिए निलंबित कर दिया। इस दौरान वे मोर्चा की किसी भी बैठक में भाग नहीं ले सकेंगे।

तेज प्रताप यादव

तेज प्रताप यादव

वर्चस्व और नेतृत्व की लड़ाई में पिछड़ रहे तेज प्रताप हर दिन कोई न कोई शिगूफा छेड़ रहे हैं। मां राबड़ी के घर से बैरंग लौटे, तो अपने घर के बाहर धरना दे दिया। आखिरकार लालू और राबड़ी को उन्हें मनाने आना पड़ा। राजद में अपनी भूमिका को लेकर वे हर दिन कोई न कोई बयान देते रहते हैं।

कदमों के निशां

अमित शाह

370 और 35ए के बारे में हम बचपन से सुनते आ रहे थे। कई लोग मानते थे कि ये कभी नहीं हटेंगे। प्रधानमंत्री को जनता ने समर्थन दिया और उन्होंने कश्मीर से हमेशा के लिए इसे खत्म कर दिया।

अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री

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