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टेनिस के लिए मेरी बाजुओं में अब भी दम

टेनिस में शारीरिक फिटनेस का बहुत महत्व है, ऐसे में कड़ी मेहनत करना बहुत आवश्यक
इंटरव्यू/लिएंडर पेस

भारतीय टेनिस में लिएंडर पेस के योगदान को आंकना है तो उनके 30 साल लंबे डेविस कप करिअर की उपलब्धियों को देखना चाहिए।  हर सरफेस पर सिंगल-डबल्स मैचों में 72.65 फीसदी जीत का रिकॉर्ड उनके नाम है। 1996 ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता दुनिया के डेविस कप में 58 मैचों में से 45 में जीत का विश्व रिकॉर्ड भी बना चुके हैं। वे 17 जून को 47 साल के हो गए लेकिन उनमें आज भी दमखम भरपूर है। लॉकडाउन में अपने मुंबई अपार्टमेंट की सफाई करते हुए उन्होंने कैसर मुहम्मद अली से बातचीत की। प्रमुख अंशः

1989 में सचिन तेंडुलकर ने क्रिकेट से और आपने जूनियर ग्रैंड स्लैम टेनिस टूर्नामेंट से अपने करिअर की शुरुआत की थी। सचिन तो 2013 में रिटायर हो गए, पर आपका सुनहरा सफर अब भी जारी है, कैसे?

मेरे मन में सचिन के अद्‍भुत खेल के लिए बहुत सम्मान है। जहां तक मेरी बात है तो टेनिस में शारीरिक फिटनेस का बहुत्व महत्व है, इसलिए मैं इस पर सबसे ज्यादा ध्यान देता हूं। एक खिलाड़ी के रूप में मुझे जो विरासत मिली है, उसमें फिटनेस का स्तर ऊंचा बनाए रखने के लिए मुझे कड़ी मेहनत करते रहना जरूरी है।

टेनिस के लिए शरीर को 47 की उम्र में भी कैसे तैयार रखते हैं?

मैं सात-आठ साल की उम्र से ही कड़ी मेहनत कर रहा हूं। मुझे लगता है कि लोगों को इस बात का शायद ही एहसास हो कि एक ग्रैंडस्लैम जीतने और ओलंपिक में भाग लेने के लिए खिलाड़ी कितनी मेहनत करता है। मैंने तो 18 ग्रैंड स्लैम जीते हैं और सात बार ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया है।

आपने हैशटैग वन लॉस्ट रोर के जरिए रिटायरमेंट का संदेश दिया था। लेकिन कोविड के बाद स्थितियां बदल गई हैं। क्या फैसले पर दोबारा विचार करेंगे?

इन स्थितियों में आप कुछ नहीं कह सकते हैं। कोई नहीं जानता कि स्थितियां कब सामान्य होंगी।  अब तो 2022 में ओलंपिक कराने की चर्चा हो रही है। जब स्थितियां सामान्य होंगी, तब मेरी टीम यह तय करेगी कि मुझे आगे खेलना जारी रखना है या नहीं। मुझे लगता है कि मैं शारीरिक रूप से अभी पूरी तरह फिट हूं, लेकिन मानसिक और भावनात्मक रूप से फिट रह कर खुश रहना भी बेहद जरूरी है।

1990 में जूनियर यूएस ओपन, 1991 में जूनियर विंबलडन जीत कर विश्व का नंबर एक खिलाड़ी बनने के बाद क्या लक्ष्य तय क‌िए?

उस समय, मैं खुद को विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहा था कि मैं भी ग्रैंड स्लैम जीत सकता हूं। तब तक मैंने यह साबित नहीं किया था। 1990 की शुरुआत में, क्वालिफाई करने के बाद मैं जूनियर ऑस्ट्रेलियाई ओपन के फाइनल में पहुंचा। हालांकि, मैं हार गया, लेकिन उस मैच ने मुझमें भरोसा जगाया कि मैं भी ग्रैंड स्लैम जीत सकता हूं। इस भरोसे ने मेरे अंदर कड़ी मेहनत करने की भूख जगाई।

आपने कुल 18 ग्रैंड स्लैम जीते हैं, लेकिन पूरे करिअर पर नजर डाली जाए, तो टेनिस कोर्ट और उसके बाहर कई उतार-चढ़ाव भी आए।

मुझे लगता है कि इस मामले में काफी भाग्यशाली हूं। हर खिलाड़ी के करिअर में उतार-चढ़ाव आते हैं। मेरा डेविस कप में करीब 72 फीसदी मैच जीतने का रिकॉर्ड है, जो बिरले ही बनता है। जहां तक उतार-चढ़ाव की बात है तो यह जरूरी नहीं कि आपके जीवन में जो घटे, वह आपके नियंत्रण में हो। जरूरी यह है कि आप उस वक्त उसका सामना कैसे करते हैं और उस वक्त आपका व्यवहार कैसा होता है। केवल यही चीज आपके वश में होती है। मैंने हमेशा देश को खुद से पहले रखा है।

आपकी उम्र बढ़ रही थी, फिर भी आपको शीर्ष खिलाड़ियों मार्टिना नवरातिलोवा, मार्टिना हिंगिस आदि ने पार्टनर बनाया...

क्योंकि मैं जीत रहा था, इसलिए दूसरे लोग मेरे साथ जीतना चाहते थे। जीतने का मंत्र बहुत ही शक्तिशाली घटक है और यही असली चैंपियन के पास होता है। एक या दो ग्रैंड स्लैम जीतना अलग बात है, लेकिन बार-बार यानी 18 बार ग्रैंड स्लैम जीतने के लिए बहुत साधना करनी पड़ती है। इसका एक निश्चित सूत्र है जिसे आपको अपनी जीवनशैली में, बहुत सारे अनुशासन के साथ, कड़ी मेहनत और सादगी से पालन करना होता है।

आप इन दिनों बहुत प्रेरक भाषण दे रहे हैं।

जीवन भर, चाहे मेरी बहनें हों या मेरे दोस्त, उनके साथ मैं हमेशा कप्तान जैसा रहा। जब मैं लीडर नहीं था, तो उनका अनुसरण करता था। अपने 30 साल के करिअर के दौरान मैंने पाया कि महानता हासिल करने के लिए इंसान को खुद पर ही भरोसा करना चाहिए, तभी वह निखरती है। मुझे लगता है कि लोगों को कुछ उदाहरण देकर प्रेरित करना महत्वपूर्ण है न कि उनसे यह कहना कि ‘जैसा मैं कहता हूं वैसा करो।’ मैं 12 साल की उम्र से अपना पासपोर्ट, यात्रा की जानकारी, होटल बुकिंग, रिजर्वेशन, पैसा आदि सब चीजें संभाल रहा हूं। इसी वजह से कॉरपोरेट के लोगों को मैं यह हुनर सिखा सकता हूं कि कैसे वह अपने दिन-प्रतिदिन के जीवन को संभाल सकते हैं। यह करना मेरे लिए बहुत स्वाभाविक है।

आत्मकथा कब आ रही है?

हम लंबे समय से इस पर काम कर रहे हैं। देखते हैं यह कब तक संभव होता है।

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