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कश्मीर भरोसे सत्तारूढ़

किसानों, बेरोजगारों और बिजनेस समुदाय के बीच बेचैनी चरम पर, विपक्ष ने दुरुस्त की मोर्चेबंदी
महाजनादेश यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री फड़नवीस

नासिक के पिंपलगांव के 20 से अधिक किसानों ने कुछ महीने पहले ठाणे स्थित एक निर्यातक से संपर्क किया, ताकि वे अपनी उपज को विदेश में बेच सकें। बेहतर कीमत की आस में वे खुशी से प्रस्ताव पर सहमत हो गए। कंपनी ने उनके अंगूर और प्याज की खरीद शुरू कर दी। जल्द ही उनका भुगतान आना बंद हो गया और बकाया 30 लाख रुपये हो गया। किसानों ने इसकी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस को किसानों द्वारा दिए गए पते पर कोई नहीं मिला। पिछले एक साल में किसान समूहों को धोखा देने के ऐसे आठ मामले सिर्फ पिंपलगांव में ही दर्ज किए गए हैं। इस तरह के कई और संदिग्ध मामले पूरे महाराष्ट्र में हैं। जब किसानों ने पुलिस में शिकायतें दर्ज कराईं, तो व्यवसायियों ने उनके खिलाफ ही मुंबई और नासिक में अपहरण, मारपीट और यहां तक कि छेड़छाड़ की शिकायतें दर्ज करा दीं।

जहां किसान अपना पैसा पाने और आपराधिक मामलों से लड़ने के लिए भागदौड़ कर रहे हैं, वहीं मराठवाड़ा में कई किसान सूखे से जूझ रहे हैं, क्योंकि मानसून ने उन्हें दगा दे दिया। दूसरी ओर, पश्चिमी महाराष्ट्र में हजारों किसान अपनी फसलें और घर ‘मानव निर्मित’ बाढ़ में गंवा चुके हैं। इस बीच, रिपोर्ट आई कि केंद्र सरकार मिस्र, पाकिस्तान, चीन और अफगानिस्तान से प्याज आयात करेगी। किसान नेता और स्वाभिमानी शेतकारी संघटना के प्रमुख राजू शेट्टी कहते हैं, “अगर हम प्याज आयात करते हैं, तो स्थानीय बाजार बर्बाद हो जाएंगे। क्या भारतीय किसान पाकिस्तान से बड़ा दुश्मन हैं?” उन्होंने भाजपा की अगुआई वाली केंद्र और राज्य सरकारों पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया।

शेट्टी के मुताबिक, महाराष्ट्र में लाखों किसानों को अभी भी दो साल पहले देवेंद्र फड़नवीस सरकार की कृषि ऋणमाफी का लाभ नहीं मिला है। राज्य सरकार के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, 58 लाख योग्य आवेदकों में से अभी तक 44 लाख किसानों का ही ऋण माफ हो पाया है। ऋणमाफी योजना सही से लागू नहीं कर पाने के लिए फंड की कमी बताई जा रही है। फिर भी सरकार ने घोषणा की है कि ऋणमाफी योजना का दायरा बढ़ाया जाएगा। इस घोषणा से बैंक चिंतित हैं, क्योंकि कृषि ऋणमाफी लागू होने के बाद उनका एनपीए बढ़ गया है। राज्य का कर्ज पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 15 फीसदी से अधिक हो गया है। यह पिछले पांच वर्षों में लगभग दोगुना बढ़कर 4.7 लाख करोड़ रुपये हो गया है। राज्य में कारोबार भी चौपट हो गया है।

शरद पवार और सोनिया गांधी के बीच चर्चा

पिंपरी चिंचवाड़ (पुणे) स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अनुसार, लगभग पांच लाख कर्मचारी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से ऑटो उद्योग पर निर्भर हैं और हालिया मंदी ने क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है। पिंपरी-चिंचवाड़ देश के सबसे बड़े ऑटो कंपोनेंट हब में एक है, जहां लगभग 12,000 छोटे और मझोले उद्योग हैं। उनमें ज्यादातर को 25-30 प्रतिशत तक मांग में कमी के कारण गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। एक कंपनी के सीईओ ने आउटलुक को बताया, “उद्योग महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और वही संकट में हैं। कम मांग के कारण प्रोडक्शन में गिरावट की वजह से छह महीने की देरी से वेतन दिया जा रहा है।” कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत कहते हैं, “कृषि संकट और भारी कर्ज के अलावा मराठवाड़ा क्षेत्र में गंभीर सूखा, मुंबई सहित पश्चिमी और तटीय महाराष्ट्र में बाढ़ के दौरान जान-माल की हानि और राहत कार्यों में कोताही, नकारात्मक व्यापार माहौल, नौकरियों की कमी, नोटबंदी और जीएसटी का प्रभाव जैसे मुद्दे अभी काफी अहम हैं।”

राजू शेट्टी कहते हैं, “इन ज्वलंत मुद्दों के साथ-साथ ओबीसी, एससी-एसटी समुदायों के बीच बड़े पैमाने पर भय का माहौल है कि मोदी सरकार अनुच्छेद 370 की तरह एक ही झटके में आरक्षण को भी खत्म कर सकती है।” मतदाताओं का एक वर्ग ईवीएम को लेकर भी चिंतित है। नागपुर विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने आउटलुक को बताया, “कई लोगों का मानना है कि भाजपा-शिवसेना जीतने के लिए ईवीएम में छेड़छाड़ करती है।”

भाजपा-शिवसेना को 'राष्ट्रवाद' से आस

लोकसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना ने राज्य की 48 में से 41 सीटों पर जीत हासिल की। उन्हें यह जीत इस साल के शुरू में पाकिस्तान के खिलाफ एयरस्ट्राइक के कारण देश में पैदा हुई राष्ट्रवादी लहर के कारण मिली। कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के कारण उन्हें इस बार भी राष्ट्रवाद की लहर का जादू चलने की उम्मीद है। अमित शाह, फड़नवीस और ठाकरे की रैलियों में मुख्य मुद्दा कश्मीर ही होता है।

राकांपा के प्रवक्ता नवाब मलिक कहते हैं, “लोकसभा और विधानसभा चुनाव पूरी तरह अलग होते हैं। आम चुनाव में जहां राष्ट्रीय मुद्दे अहम होते हैं, वहीं विधानसभा चुनाव में क्षेत्रीय मुद्दे नतीजों पर असर डालते हैं। सत्ताधारी गठबंधन की लोकसभा चुनाव में भारी जीत का यह मतलब नहीं है कि राज्य चुनाव में भी यही नतीजे होंगे। इस बार लोग फड़नवीस के प्रदर्शन पर वोट देंगे।” विपक्ष का मानना है कि फड़नवीस का प्रदर्शन खराब रहा है।

लेकिन इन सबसे से बेफिक्र फड़नवीस भाजपा के प्रचार अभियान और उद्घाटन कार्यक्रमों वाली महा-जनसंदेश यात्रा का तीसरा दौर शुरू कर चुके हैं। फड़नवीस रैलियों में आत्मविश्वास से घोषणा करते हैं, “मैं अप्रत्याशित जनादेश के साथ सत्ता में लौटूंगा।” इस यात्रा में उन्होंने 288 विधासभा क्षेत्रों में से 100 क्षेत्रों का दौरा कर लिया है। सहयोगी दल शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ने भाजपा से काफी पहले जन-आशीर्वाद यात्रा और विजय संकल्प मेला शुरू किया है।

निर्वाचन आयोग ने अभी तक चुनाव कार्यक्रम की घोषणा नहीं की है। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल इस साल 9 नवंबर को पूरा हो रहा है। शाह ने महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों में से 216 सीटें जीतकर भाजपा-शिवसेना के लिए तीन-चौथाई बहुमत का लक्ष्य रखा है। 2014 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना ने 63 और भाजपा ने 123 सीटें जीती थीं। लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनाव में शानदार प्रदर्शन और बहुत मजबूत विपक्ष न होने के बावजूद भाजपा और शिवसेना जीत के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। लक्ष्य हासिल करने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान, आकर्षक विज्ञापन और कांग्रेस और राकांपा के नेताओं को अपने साथ मिलाने का काम जोरों पर चल रहा है। हाल में राकांपा के सतारा से सांसद ‍उदयनराजे भोसले ने भाजपा का दामन थामा है। भोसले छत्रपति शिवाजी के वंशज हैं। कुछ महीनों पहले हुए लोकसभा चुनाव में राकांपा के जीतने वाले चार सांसदों में से एक हैं। भोसले 14 सितंबर को अमित शाह और फड़नवीस की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए।

समित क़दम, भाजपा के सहयोगी दल “जन सुराज्य शक्ति” के प्रदेश अध्यक्ष, दावा करते हैं,”फड़नवीस सरकार ने इन्फ़्रस्ट्रक्चर के क्षेत्र में शानदार काम किया है-मुंबई मेट्रो की कई लाइनें, मुंबई नागपुर इंडस्ट्रीयल कॉरिडर, नागपुर मेट्रो और अधूरे पड़े कई बाँध परियोजनाओं का काम पाँच साल में तेज़ी से हुआ. इसके अतिरिक्त, जलयुक्त शिवार (जल संरक्षण) योजना, दशकों से लम्बित मराठा आरक्षण और धनगर समाज के लिए योजना लागू करना भी इसी सरकार के दौरान हुआ. सबसे बड़ी बात, करप्शन का कोई दाग़ इस सरकार पर नहीं लगा जिससे फड़नवीस की इमेज बरक़रार रही.”जन सुराज्य शक्ति पहले एनसीपी के साथ थी लेकिन तीन साल पहले उसने भाजपा का दामन थाम लिया.

 भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला कहते हैं, “जमीनी स्तर पर योजना और अनुशासित काडर के अलावा हमने धीरे-धीरे सहकारी क्षेत्र (चीनी मिल और बैंकों) में अपना प्रभाव बढ़ाया है। इस क्षेत्र पर कांग्रेस और राकांपा कई दशकों तक काबिज रहीं। इसके अधिकांश प्रभावशाली नेता हमारी ओर आ चुके हैं। इससे हमें ग्रामीण महाराष्ट्र में फायदा मिलेगा।” शेट्टी और मलिक का दावा है कि सत्ताधारी गठबंधन ने विपक्षी नेताओं को सीबीआइ और ईडी के झूठे केसों में फंसाने की धमकी देकर और पैसे की ताकत से यह सब हासिल किया है।

विपक्ष भी सक्रिय

पर्यवेक्षक कहते हैं कि विपक्षी दलों को अभी तक अपना गठबंधन, चुनावी रणनीति और प्रमुख नेताओं की भूमिका तय कर देनी चाहिए थी। लेकिन बड़े पैमाने पर दलबदल के कारण वे हतोत्साहित हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री हर्षवर्धन पाटिल पिछले सप्ताह भाजपा में शामिल हो गए। राधाकृष्ण विखे पाटिल जैसे प्रमुख नेता और कुछ अन्य लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में चले गए थे। राकांपा के प्रमुख नेता गणेश नाइक ने भाजपा का दामन थाम लिया जबकि विधायक भास्कर जाधव, पांडुरंग बरोड़ा, मुंबई इकाई के प्रमुख सचिन अहीर और पूर्व मंत्री जयदत्त क्षीरसागर शिवसेना में शामिल हो गए। कुछ विधायक जैसे शिवेंद्रसिंह भोसले, संदीप नाइक और वैभव पिचाड भी भाजपा में चले गए। यहां तक कि शरद पवार के रिश्तेदार राणा जगजीत सिंह पाटिल भी भाजपा में चले गए। लेकिन पवार कहते हैं, “मैंने वह समय देखा है, जब मेरे साथ 60 विधायक होते थे। 52 विधायक पार्टी छोड़ गए, लेकिन फिर वापस आए।”

राकांपा प्रमुख शरद पवार ने ट्वीट कर कांग्रेस से गठबंधन के लिए सीटों की घोषणा कर दी। राकांपा और कांग्रेस 125-125 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी, जबकि 38 सीटें अन्य सहयोगियों के लिए छोड़ी गई हैं। उन्होंने ट्वीट किया कि यह भी जल्द ही तय हो जाएगा कि स्वाभिमानी शेतकारी संघटना, बहुजन विकास अघाड़ी, अवामी लीग और वाम दलों को कितनी सीटें मिलेंगी। हालांकि, बसपा सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ सकती है।

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (मुंबई) के सोशल साइंटिस्ट और उप-निदेशक प्रोफेसर अब्दुल शबान कहते हैं, “आम आदमी को प्रभावित करने वाले कई मुद्दे हैं, जैसे घनी आबादी और सार्वजनिक परिवहन। लेकिन विपक्षी दल इनका फायदा उठाने में विफल रहे हैं।” विपक्ष की सुस्ती पर मलिक कहते हैं, “हम कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राजू शेट्टी की स्वाभिमानी शेतकारी संघटना और कुछ छोटी पार्टियों के साथ समझौते के अंतिम चरण में हैं। हमारी टीमें पहले से ही जमीन पर काम कर रही हैं।” वरिष्ठ पत्रकार और चुनाव विश्लेषक उदय निर्गुडकर कहते हैं, “इस समय महाराष्ट्र में विपक्ष की अनुपस्थिति सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है। नकारात्मक भावनाओं को भुनाने के लिए कांग्रेस और राकांपा दोनों में से कोई नहीं है।”

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