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घाटी, लद्दाख, जम्मू में बढ़ीं आशंकाएं

जम्मू-कश्मीर के मुस्लिम बहुल जिलों को मिलाकर दो डिवीजन बनाने की चर्चा की नई सुगबुगाहट
जम्मू-कश्मीर

जम्मू में इन दिनों चर्चा गरम है कि सरकार 1950 के डिक्सन प्लान की तर्ज पर घाटी के चार जिलों को जम्मू के चार मुस्लिम बहुल जिलों के साथ जोड़कर दो अलग डिवीजन बनाने जा रही है। ये चर्चाएं जम्मू और खासकर भाजपा के लोगों तक ही सीमित हैं क्योंकि इसके विरोध में ‘एकजुट जम्मू’ नाम का एक संगठन सक्रिय हो गया है। लेकिन घाटी में तो अब भी सन्नाटा पसरा है। नाराजगी और नाउम्मीदी की फिजा बदस्तूर कायम है। लोग आने वाले महीनों में हालात और बिगड़ने की आशंका से डरे हुए हैं। लद्दाख में भी लोग बाहरी लोगों की आमद से अपनी संस्कृति और पर्यावरण की बर्बादी से सहमे हुए हैं। अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जे को खत्म किए जाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के लगभग पांच महीने बाद कश्मीर घाटी, जम्मू और लद्दाख तीनों ही क्षेत्रों में बेचैनी और आशंकाएं घटने का नाम नहीं ले रही हैं। लेकिन पहले डिक्सन प्लान की चर्चा क्या है, यह जान लें। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 1950 में ऑस्ट्रेलिया के विधिवेत्ता सर ओवेन डिक्सन को जम्मू-कश्मीर के लिए प्रतिनिधि नियुक्त किया था। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय ऑस्ट्रेलिया के राजदूत रह चुके डिक्सन की वाशिंगटन में काफी प्रतिष्ठा थी। कश्मीर समस्या के समाधान के लिए अपने प्लान में उन्होंने जनमत संग्रह सिर्फ घाटी में कराने को प्राथमिकता दी और राज्य के बाकी हिस्सों को वहां के लोगों की संस्कृति और संप्रदाय के आधार पर भारत या पाकिस्तान में जाने की छूट देने का प्रस्ताव किया। सरकार की इससे मिलती-जुलती योजना पर काम करने की आशंकाओं से जम्मू के एक संगठन ‘एकजुट जम्मू’ ने आरोप लगाया है कि भाजपा जम्मू के मुस्लिम बहुल जिलों को घाटी के साथ मिलाने का प्रयास कर रही है। संगठन ने इसे डिक्सन प्लान जैसा बताया है। हिंदुत्ववादी संगठनों से नजदीक दिखने वाले ‘एकजुट जम्मू’ के अध्यक्ष अंकुश शर्मा कहते हैं कि किश्तवाड़, डोडा, भद्रवाह, रामबन, रियासी, राजौरी और पुंछ को अनंतनाग, कुलगाम, शोपियां सहित दक्षिणी कश्मीर के कुछ जिलों के साथ जोड़कर दो डिवीजनों में बांटा जाएगा। पिछले साल कठुआ रेप आरोपी के समर्थन में निकाली गई रैली का बचाव करने वाले शर्मा हैं। हालांकि भाजपा के नेता इसका खंडन करते हैं।

लेकिन घाटी में एक व्यापारी का कहना है, “हम हर रोज अंधेरे गर्त में धंसते जा रहे हैं। मुझे कोई भी उम्मीद नजर नहीं आती है।” कश्मीरी व्यापारी कहते हैं कि पिछले पांच महीने में उन्हें 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा नुकसान हो चुका है। फिर भी वे किसी पैकेज या मुआवजे की मांग नहीं कर रहे हैं। एक व्यापारी ने कहा, “हम जानते हैं कि हमें नुकसान सरकार के फैसले के कारण हो रहा है। हम लोगों को घाटे के बारे में सिर्फ इस वजह से बता रहे हैं ताकि वे समझ सकें कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर में क्या हुआ।” घाटी में कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं दिखाई देती है क्योंकि अधिकांश पार्टियों के नेता या तो जेल में बंद हैं या फिर घरों में नजरबंद हैं। जम्मू-कश्मीर के एक बार फिर विभाजन की चर्चाओं सहित राज्य की राजनैतिक घटनाओं और स्थितियों को कश्मीर घाटी दूर रहकर सिर्फ देख रही है।

कश्मीर के ‍उलट, जम्मू में राजनैतिक पार्टियां जमीन और नौकरियों पर केंद्रशासित प्रदेश के निवासियों के विशेषाधिकार की मांग कर रही हैं। लद्दाख में लोगों को चिंता है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद बाहरी लोग आकर बसने लगेंगे जिससे उनके क्षेत्र की आबादी के स्वरूप और संस्कृति पर प्रभाव पड़ेगा। इन चिंताओं के बीच ‘एकजुट जम्मू’ के अंकुर शर्मा के अनुसार, जम्मू के मुस्लिम बहुल जिलों को कश्मीर के मुस्लिम जिलों के साथ जोड़ा जाएगा और उन्हें अलग प्रशासनिक डिवीजनों में बांटा जाएगा। वे इस कदम को जम्मू के साथ युद्ध करार देते हैं। शर्मा ने कहा, “यह प्रशासनिक ढांचा डिक्सन प्लान का पुनर्जन्म है। यह परवेज मुशर्रफ के विध्वंसकारी फॉर्मूले को भी जिंदा करने जैसा है। हम ऐसा नहीं होने देंगे, फिर चाहे कुछ भी हो जाए।” शर्मा कहते हैं, “हम बैक डोर से मुशर्रफ या डिक्सन प्लान लागू नहीं होने देंगे।” शर्मा ने आउटलुक को बताया कि पिछले एक सप्ताह से नए डिवीजन के बारे में खबरें आ रही हैं और सरकार ने इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। हालांकि भाजपा के महासचिव अशोक कौल इसे हास्यास्पद बताते हैं। उनका कहना है कि कुछ लोग नेता बनना चाहते हैं। यह उनकी महत्वाकांक्षा है।

हालांकि शर्मा के बयान के विपरीत कहा जा रहा है कि सरकार नए डिवीजन में जम्मू क्षेत्र के रामबन, किश्तवाड़ और डोडा जिलों के साथ कश्मीर के शोपियां, अनंतनाग और कुलगाम जिलों को मिला सकती है। इस कदम से सरकार जम्मू-कश्मीर में कश्मीरियों का दबदबा होने की धारणा को खत्म करना चाहती है।

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