पचहत्तर पार आसान तो नहीं

कालका, हिसार, भिवानी और चंडीगढ़ से हरीश मानव
राष्ट्र वाद की टेरः वल्लभगढ़ की रैली में प्रधानमंत्री मोदी और अन्य नेता
राष्ट्र वाद की टेरः वल्लभगढ़ की रैली में प्रधानमंत्री मोदी और अन्य नेता

कालका, हिसार, भिवानी और चंडीगढ़ से हरीश मानव
भाजपा को कश्मीर और एनआरसी के सहारे बड़े लक्ष्य की उम्मीद लेकिन विपक्ष का कृषि संकट, महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर जोर

हरियाणा के आखिरी छोर पर हिमाचल प्रदेश से लगती शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में कालका से पहले पिंजोर से हिमाचल की औद्योगिक धुरी बद्दी-बरोटीवाला (फार्मा कंपनियों का हब) की ओर जाती सिंगल लेन सड़क की हालत आज भी 25 बरस पहले जैसी है। हरियाणा-हिमाचल के सियासी पेच में फंसी यह सड़क मानो कालका विधानसभा क्षेत्र की भी तस्वीर बयान करती है। यह‌ां लंबे-लंबे ट्रैफिक जाम ही परेशानी का सबब नहीं, सड़क हादसों में आए दिन लोगों की जान भी जाती है। कालका से लगातार दूसरी बार चुनाव में उतरीं भाजपा की लतिका शर्मा के प्रति भारी नाराजगी जाहिर करते हुए जट्टी माजरा में ढाबा चलाने वाले नायब सिंह कहते हैं, “चुनाव के समय वोट के लिए आने वाले नेता जीतने के बाद गांवों का रुख भी नहीं करते। पांच महीने पहले लोकसभा चुनाव के लिए मौजूदा सांसद, केंद्रीय मंत्री रतनलाल कटारिया तो प्रचार के लिए भी नहीं आए, बस मोदी के नाम पर जीत गए।” जट्टी माजरा के ही किसान गुरमेल सिंह बताते हैं, “पीएम किसान सम्मान निधि के 6,000 रुपये सालाना के लिए उनके गांव के 91 किसानों के फार्म तो भरे गए, पर आज तक उनके खाते में पैसे नहीं आए। चुनाव प्रचार के लिए गांव आए विधायक लतिका के देवर को टोका तो वे प्रचार छोड़ कर भाग खड़े हुए।” कालका में ललिता की टक्कर में कांग्रेस के प्रदीप चौधरी हैं। इधर पंचकूला में भाजपा के ज्ञानचंद गुप्ता को कांग्रेस के चंद्रमोहन से कड़ी टक्कर मिल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के पुत्र चंद्रमोहन इससे पहले चार बार कालका से विधायक और उप-मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

हरियाणा विधानसभा की 90 सीटों के लिए 21 अक्टूबर को मतदान होगा और 24 को नतीजे आएंगे। कश्मीर के अनुच्छेद 370 पर सवार भाजपा भले 75 पार का दावा कर रही है, पर लोगों के बीच जमीनी मुद्दे इससे अलग हैं। भाजपा के स्टार प्रचारकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर समेत सभी नेता अपनी प्रचार रैलियों में अनुच्छेद 370 और राष्ट्रवाद की ही बात करते हैं। विपक्ष में कांग्रेस के राहुल गांधी विकास, बेरोजगारी, महंगाई, किसान और स्थानीय मुद्दों पर भाजपा को घेर रहे हैं। राहुल कहते हैं, “भाजपा हर दसवें दिन ‘मन की बात’ करती है, लेकिन मैं यहां काम की बात करने आया हूं।” भाजपा की एकतरफा जीत के दावे के उलट करीब 50 सीटों पर भाजपा की टक्कर में कांग्रेस, जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला समेत करीब आधा दर्जन कैबिनेट मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। दो दर्जन बागी उम्मीदवार भी भाजपा और कांग्रेस की हार-जीत के अंतर का समीकरण बिगाड़ सकते हैं।

कांग्रेस ने 16 बागियों को निष्कासित किया है। पूर्व उप-प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के पड़पोते दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व में जेजेपी करीब 10 सीटों पर तेजी से उभर रही है। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला परिवार के लिए अपने सियासी गढ़ सिरसा जिले को बचाना भी मुश्किल हो सकता है। बिखरे विपक्ष के समक्ष भाजपा के राष्ट्रवादी ब्रह्मास्‍त्र, अनुच्छेद 370 का असर सैनिक परिवारों में हो सकता है, पर आम जनता चुनाव को भाजपा विधायकों के प्रति नाराजगी और स्थानीय मुद्दों से जोड़ रही है। इससे भाजपा के 75 पार का लक्ष्य मुश्किल हो सकता है।

भाजपा के चार बड़े जाट चेहरों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की विधायक पत्नी प्रेमलता भारी विरोध के बीच दूसरी बार उचाना कलां से भाजपा उम्मीदवार हैं। 2014 के विधानसभा चुनाव में प्रेमलता से 6,500 मतों से हारने वाले जेजेपी के दुष्यंत चौटाला इस बार कांटे की टक्कर दे रहे हैं। नारनौंद सीट पर वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु जेजेपी के रामकुमार गौतम के चक्रव्यूह में इस कदर फंसे हैं कि भाजपा के अन्य उम्मीदवारों के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए भी नहीं जा पा रहे हैं। नारनौंद सीट हिसार लोकसभा क्षेत्र में पड़ती है। मई में हुए लोकसभा चुनाव में नारनौंद विधानसभा क्षेत्र में भाजपा सांसद बिजेंद्र सिंह जेजेपी और कांग्रेस के बाद तीसरे स्थान पर रहे थे। इसी तरह रोहतक लोकसभा क्षेत्र की बादली विधानसभा सीट पर कृषि मंत्री धनखड़ की प्रतिष्ठा दांव पर है। लोकसभा चुनाव के दौरान 90 में से 79 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को बढ़त मिली थी। टोहाना सीट पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला की टक्कर में कांग्रेस के परमवीर सिंह हैं।

तीन दशक तक हरियाणा की सियासत में छाए रहे लाल (देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल) परिवारों की दखल अभी बरकरार है। इस चुनाव में तीनों लाल परिवारों से नौ उम्मीदवार कांग्रेस, भाजपा, इनेलो, जेजेपी और निर्दलीय के तौर पर मैदान में हैं। पूर्व उप-प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल की विरासत संभाल रहे चौटाला परिवार के पांच सदस्य पहली बार चार पार्टियों और एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं। एलनाबाद से इनेलो से अभय चौटाला चुनाव लड़ रहे हैं, तो उनके बड़े भाई अजय चौटाला की पत्नी नैना चौटाला और बेटा दुष्यंत चौटाला जेजेपी से मैदान में हैं। परिवार के चौथे सदस्य देवीलाल के पोते आदित्य चौटाला डबवाली से भाजपा के टिकट पर ताल ठोक रहे हैं। रानिया से ओमप्रकाश चौटाला के भाई रणजीत चौटाला आजाद उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं। चौटाला परिवार के इन पांचों सदस्यों के खिलाफ दूसरे दलों ने मजबूत प्रत्याशी उतारे हैं। डबवाली सीट से दुष्यंत चौटाला की मां नैना चौटाला विधायक हैं, लेकिन इस बार बदले राजनीतिक समीकरण के चलते उन्होंने यह सीट छोड़ दी है। नैना इस बार बाढ़डा क्षेत्र से किस्मत आजमाने उतरी हैं। उन्हें घेरने के लिए कांग्रेस ने पूर्व सीएम बंसीलाल के बेटे रणबीर सिंह महेंद्रा को उतारा है। डबवाली में आदित्य चौटाला ने इनेलो और जेजेपी की चिंता बढ़ा दी है। तोशाम से बंसीलाल की पुत्रवधू किरण चौधरी मैदान में हैं। भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई को उनकी परंपरागत सीट आदमपुर में घेरने के लिए भाजपा ने ‘टिकटॉक गर्ल’ सोनाली फोगाट को उतारा है। कांग्रेस से कुलदीप के बड़े भाई चंद्रमोहन पंचकूला सीट से भाजपा के ज्ञानचंद को टक्कर दे रहे हैं।

कांग्रेस के मौजूदा 17 विधायकों में से 16 फिर से मैदान में हैं। भाजपा की रणनीति कांग्रेस के दिग्गजों भूपेंद्र सिंह हुड्डा, रणदीप सुरजेवाला, किरण चौधरी और कुलदीप बिश्नोई को उनके विधानसभा क्षेत्रों में ही घेरे रखने की है। रोहतक लोकसभा क्षेत्र में पड़ने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गृह क्षेत्र गढ़ी सांपला-किलोई विधानसभा सीट पर भाजपा ने सतीश नांदल को उतारा है। 2014 के विधानसभा चुनाव में नांदल इनेलो के टिकट पर लड़े थे और हुड्डा से 47,000 वोटों से हार गए थे। दो महीने तक इस सीट का सर्वे करके भाजपा मानकर चल रही है कि जाट-गैर जाट फॉर्मूला चल गया तो हुड्डा का हारना तय है।

बहरहाल, कांग्रेस, इनेलो और जेजेपी के घोषणा-पत्रों में बुढ़ापा पेंशन, किसान कर्जमाफी के वादे हैं, जबकि भाजपा के संकल्प-पत्र में ऐसे वादे कम हैं। मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर कहते हैं, इन मुफ्तखोरी के वादों के लिए 1.26 लाख करोड़ रुपये लगेंगे, जबकि भाजपा के वादों पर 32,000 करोड़ रुपये ही खर्च होंगे। शायद उन्हें यह ध्यान हाे कि उनके राज में हरियाणा पर 2014 में 70,000 करोड़ रुपये का कर्ज 2019-20 में बढ़कर अनुमानित 1.70 लाख करोड़ रुपये हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आउटलुक से कहा कि 2014 में 154 वादे करने वाली भाजपा सरकार ने एक भी वादा पूरा नहीं किया। खैर, फैसला तो जनता ही सुनाएगी।

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