हिंसा का नया दौर

श्रीनगर से नसीर गनई
आतंकी वारदातः दक्षिण श्रीनगर के कतरस्सु गांव, जहां पांच मजदूरों को आतंकियों ने गोली मारी थी
आतंकी वारदातः दक्षिण श्रीनगर के कतरस्सु गांव, जहां पांच मजदूरों को आतंकियों ने गोली मारी थी
पीटीआइ

श्रीनगर से नसीर गनई
घाटी में गैर-कश्मीरियों पर आतंकी हमलों से सामने आई सुरक्षा चूक

घाटी में 29 अक्टूबर को पांच गैर-कश्मीरियों की हत्या से दूसरे राज्यों से आए मजदूरों और ट्रांसपोर्टरों के बीच सदमे की लहर है। पांचों मजदूर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के रहने वाले थे। जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के बाद से आतंकी लगातार ट्रक ड्राइवरों, कारोबारियों और दूसरे राज्यों से आए मजदूरों को निशाना बना रहे हैं। 24 अक्टूबर को आतंकवादियों ने शोपियां जिले में दो गैर-कश्मीरी ट्रक ड्राइवरों की हत्या कर दी थी। इससे पहले 14 अक्टूबर को राजस्थान के नंबर प्लेट वाले ट्रक के ड्राइवर को गोली मार दी थी। 16 अक्टूबर को शोपियां में ही पंजाब के सेब कारोबारी चरणजीत सिंह की आतंकियों ने हत्या कर दी और एक अन्य सेब कारोबारी संजीव को जख्मी कर दिया था। एक स्थानीय फल उत्पादक ने चरणजीत को पुलवामा के जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। संजय की हालत गंभीर होने के कारण श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल में भेज दिया गया। संजय के चाचा सुभाष चंदर फल व्यवसाय में हैं और अपने वाहनों-मजदूरों को घाटी में भेजते रहते हैं। उन्होंने आउटलुक को बताया, “यह दुखद है कि एक कश्मीरी ने जान जोखिम में डालकर संजय को अस्पताल पहुंचाया और पुलिस उसे ही पूछताछ के लिए बुला रही है।” चरणजीत और संजय पर हमले के कुछ घंटे पहले ही एक ईंट भट्ठा मजदूर सेठी कुमार सागर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके दो दिन पहले राजस्थान के ड्राइवर शरीफ खान को मारकर उसके ट्रक में आग लगा दी गई थी। 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 को प्रभावहीन करने के बाद शरीफ की हत्या किसी बाहरी पर पहला हमला था।

सरकार का दावा है कि ये हत्याएं कश्मीर की अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारने की आतंकवादियों की साजिश का हिस्सा हैं, और इसका अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी करने से कोई लेना-देना नहीं है। राज्यपाल के सलाहकार के. विजय कुमार का कहना है कि आतंकवादी उकसावे को एक बहाने के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। कुमार कहते हैं, “हमें मालूम है कि ये लोग (आतंकवादी) ऐसा क्यों कर रहे हैं। वे लोगों को आतंकित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सरकार को पता है कि इन हमलों से कैसे निपटना है।” सेना के मुताबिक, अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के बाद से घाटी में कुल मिलाकर शांति है। एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है, “लोग सामान्य जन-जीवन की ओर बढ़ रहे हैं। अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के बाद जो आशंकाएं व्यक्त की गई थीं, वास्तव में वैसा नहीं हुआ। आतंकवादियों और पाकिस्तान को यह पसंद नहीं आया, इसीलिए उन्होंने बाहर से आए लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।”

लेकिन सभी सुरक्षाकर्मियों की राय ऐसी नहीं है। दक्षिण कश्मीर में तैनात एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमने सुना है कि पंजाब के ट्रक ड्राइवरों को उनके नाम पूछे जाने के बाद उन पर हमला किया गया था। अनुच्छेद 370 के संदर्भ में देखें, तो यह इस तरह की पहली हत्या थी। जब आप 50,000 मंदिरों का निर्माण करने, कश्मीर में जमीन खरीदने, घाटी की लड़कियों से डेटिंग करने और आबादी का अनुपात बदलने की बात करते हैं, तो आप पाकिस्तान के हाथों में खेल रहे होते हैं। अगर यह सब यहीं थम जाता है, तो यह किसी पैटर्न का हिस्सा नहीं है। लेकिन अगर इस तरह की हत्याएं जारी रहीं, तो समझिए कि पाकिस्तान और आतंकवादी खतरनाक खेल के लिए तैयार हैं।”

हालांकि, भाजपा इन दलीलों को खारिज करती है। पार्टी के नेता सूफी यूसुफ का कहना है, “हमें इन गरीब मजदूरों की हत्या को अनुच्छेद 370 पर फैसले से नहीं जोड़ना चाहिए। इन बेकसूर मजदूरों की उसी तरह गोली मारकर हत्या की गई, जैसे घाटी में वर्षों से हजारों लोगों की हत्या की गई।” भाजपा महासचिव अशोक कौल ने आउटलुक से कहा कि घाटी में एक ‘बाहरी व्यक्ति’ मारा गया है और इसे लेकर वहां चिंता होनी चाहिए। वे कहते हैं, “अगर जम्मू-कश्मीर के किसी व्यक्ति पर हमला होता है या उसे बाहर परेशान किया जाता है, तो जम्मू-कश्मीर के लोग तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। मुझे लगता है कि इस बार भी वही प्रतिक्रिया होनी चाहिए।”

सरकार का कहना है कि वह हत्या की इन घटनाओं को लेकर 'बेहद चिंतित' है और वह घाटी में प्रवासी मजदूरों को सुरक्षा देने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है। लेकिन यह जवाब जम्मू-कश्मीर से बाहर के लोगों को भरोसा दिलाने के लिए काफी प्रतीत नहीं होता है।

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