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स्टार सिस्टम के दिन तो समझिए लद गए

1999 में मैंने आजाद हिंद फौज के कर्नल गुरबक्श सिंह ढिल्लों और कैप्टन लक्ष्मी सहगल के साथ सिंगापुर से भारत की सरहद तक यात्रा की थी
इंटरव्यू/कबीर खान

बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशकों में एक कबीर खान ने अपने करिअर की शुरुआत 1999 में आजाद हिंद फौज के गुमनाम सिपाहियों पर बनी द फॉरगॉटन आर्मी नामक वृत्तचित्र से की थी। लगभग दो दशक बाद उन्होंने उसी विषय और नाम पर देश में बनी अब तक की सबसे बड़े बजट की वेब सीरीज बनाई है। एक था टाइगर (2012) और बजरंगी भाईजान (2015) जैसी सुपरहिट फिल्में देने वाले कबीर फिलहाल 1983 के विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट में भारत की जीत पर आधारित फिल्म ’ 83 की तैयारियों में जुटे हैं, लेकिन वे नई वेब सीरीज की वजह से भी सुर्खियों में हैं। आउटलुक के गिरिधर झा के साथ उनकी बातचीत के प्रमुख अंशः

कुछ हफ्तों में रणवीर सिंह अभिनीत आपकी फिल्म ’83 आ रही है। यह आपकी वेब सीरीज द फॉरगॉटन आर्मी के कुछ ही दिनों बाद आ रही है। बतौर निर्देशक आपके लिए यह साल कितना अहम है?

यह महज संयोग है कि मेरे दो अहम प्रोजेक्ट एक के बाद एक रिलीज हो रहे हैं। मैंने कुछ ऐसा प्लान नहीं किया था। मैंने ’83 की शूटिंग द फॉरगॉटन आर्मी खत्म होने के बाद शुरू की थी। मुझे इस वेब सीरीज को बनाने में काफी समय लगा, जो आजाद हिंद फौज के गुमनाम सिपाहियों पर है। मैंने इसी विषय पर 1999 में एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जिसके लिए उस वक्त खुद आजाद हिंद फौज के कर्नल गुरबक्श सिंह ढिल्लों और कैप्टन लक्ष्मी सहगल के साथ सिंगापुर से मलेशिया और म्यांमार होते हुए भारत की सरहद तक उसी सड़क मार्ग से यात्रा की, जिससे दूसरे विश्व युद्ध के दौरान आजाद हिंद फौज के सिपाही यहां तक आए थे। इसमें हमें तीन महीने का वक्त लगा। विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका था जब आजाद हिंद फौज के किसी सिपाही ने इस मार्ग पर यात्रा की थी।

लेकिन आपने इसी विषय पर वेब सीरीज अब क्यों बनाने की सोची?

यह विषय हमेशा मेरे जहन में रहा। जब भी मैं किसी नई फिल्म की स्क्रिप्ट लिखता था तो मुझे यह कहानी याद आ जाती थी। मैं दिल से इस पर एक फिल्म बनाना चाहता था। मैंने इसकी स्क्रिप्ट निर्माता आदित्य चोपड़ा को सुनाई थी और उन्हें यह पसंद भी आई, लेकिन उन्होंने मुझे कुछ समय और इंतजार करने की सलाह दी, क्योंकि यह बड़े बजट और बड़े कैनवास की महात्वाकांक्षी स्क्रिप्ट थी। आखिरकार मुझे अमेजन प्राइम वीडियो के साथ यह वेब सीरीज बनाने का मौका मिला। मैं खुश हूं क्योंकि मुझे लगता है कि एक फीचर फिल्म में हम इस विषय के साथ पूरा न्याय नहीं कर सकते थे। मुख्यधारा की फिल्मों में समय की पाबंदी की वजह से हम अमूमन इतिहास का अति सरलीकरण कर देते हैं, लेकिन वेब सीरीज में इसे विस्तारपूर्वक बनाया जा सकता है।

यह वेब सीरीज आपकी डॉक्यूमेंट्री से कितनी अलग है?

डॉक्यूमेंट्री या वेब सीरीज या फीचर फिल्म बनाने की प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं। डॉक्यूमेंट्री के लिए आप तीन-चार लोगों के साथ कहीं जा सकते हैं और कहीं भी आसानी से शूटिंग कर सकते हैं, लेकिन वेब सीरीज के लिए आपको एक आक्रामक फौज की तरह काम करना पड़ता है। फिर भी दोनों की मूल भावनाएं एक समान हैं। जिस कहानी ने मुझे इक्कीस वर्ष पूर्व अभिभूत किया था उसका जादू अब भी बरकरार है। इसलिए इस कहानी को मैं ऐसे माध्यम में बनाना चाहता था जिसकी पहुंच ज्यादा दर्शकों तक हो। अमेजन प्राइम वीडियो की पहुंच दुनिया भर में है। मुझे इस बात का मलाल था कि अब भी देश में ज्यादातर लोगों को नहीं पता कि 1942 से 1945 के बीच आजाद हिंद फौज के पचास हजार सिपाहियों के साथ क्या हुआ, जिन्होंने देश की आजादी के लिए जान की बाजी लगा दी थी। अब पहली बार उनकी कहानी इतने बड़े पैमाने पर परदे पर कही जा रही है। मुझे अब सिर्फ एक बात का अफसोस है कि इस वेब सीरीज को देखने के लिए उस फौज का शायद ही कोई सिपाही बचा हो। फिर भी, देर आए दुरुस्त आए।

आपकी डॉक्यूमेंट्री बने दो दशक से अधिक हो गए हैं। क्या इस वेब सीरीज के लिए आपने इस विषय पर फिर से रिसर्च की?

मुझे नहीं लगता कि इस दौरान इस विषय पर कोई नया शोध हुआ है। इसका कारण है कि उस फौज का शायद ही अब कोई जीवित हो। मेरे लिए कर्नल ढिल्लों और कैप्टन सहगल के साथ बिताए तीन महीने एक खजाने की तरह हैं। इसके अलावा मैं मलेशिया में जानकी थेवर और उस फौज के कुछ अन्य महारथियों से भी मिला था। मैंने इंग्लैंड और जापान के कई संग्रहालयों में बहुत समय बिताया। अपने देश में हम विरासत को संभालने के प्रति उदासीन हैं। यहां शुरू से ही परंपरा और विरासत एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक मौखिक रूप से हस्तांतरित होती है। इस वेब सीरीज के लिए मैंने मूलतः उन्हीं स्रोतों का इस्तेमाल किया, जो मैंने उस समय इकठ्ठा किए थे।

आपका शुमार बॉलीवुड के बड़े निर्देशकों में होता है। वेब सीरीज को बनाने में आपका अनुभव कैसा रहा?

मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे किसी फिल्म को बनाने में किसी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा। मुझे किसी ने कभी यह नहीं कहा कि यह मत करो या वह मत करो। वेब सीरीज बनाने में भी अमेजन प्राइम वीडियो के साथ मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा। मुझे जिस तरह का समर्थन मिला वह वाकई सुखद था। इस वेब सीरीज में कहानी ही स्टार है, और उन्होंने कहानी की बदौलत ही अपना समर्थन दिया। एक फिल्मकार के रूप में मेरे लिए यह काफी उत्साहजनक था। मुख्यधारा की फिल्मों में अब भी स्टार सिस्टम है, लेकिन यहां हमारी सारी ऊर्जा एक खूबसूरत कहानी का बेहतर से बेहतर फिल्मांकन करने पर केंद्रित रहती है। एक फिल्मकार के लिए यह सबसे सुकून वाली बात है।

बॉलीवुड में कॉरपोरेट स्टूडियो के आने के बाद स्वतंत्र रूप से फिल्में बनाने वाले निर्माताओं की संख्या कम रह गई है। क्या अमेजन प्राइम वीडियो, नेटफ्लिक्स और अन्य ओवर-द-टॉप प्लेटफॉर्म के आने के बाद फिल्म निर्माण का स्वरूप एक बार फिर बदलेगा?

आजकल के निर्माता जागरूक हो गए हैं। उन्हें यह बात समझ में आ गई है कि बड़े परदे के लिए उन्हें कुछ ऐसी भव्य फिल्में बनानी पड़ेंगी जो दर्शकों को थिएटर तक खींच लाएं। आज हॉलीवुड में या तो बहुत छोटे बजट की फिल्में बनती हैं या बहुत बड़े बजट की। बीच वाली अधिकतर फिल्में इन प्लेटफॉर्म पर चली गई हैं। यहां भी यही होगा। इस माध्यम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक अभिनेता का माध्यम है। अच्छी भूमिका के लिए आपका बड़ा स्टार होना जरूरी नहीं। द फॉरगॉटन आर्मी में भले ही कोई बड़ा स्टार न हो, लेकिन यह मेरी किसी भी फीचर फिल्म से बड़ी है।

इसका मतलब है कि वेब सीरीज के लिए कंटेंट वाकई किंग है?

बेशक। ये प्लेटफॉर्म जिस तरह के विषय चुन रहे हैं उससे तो यही लगता है कि यह अवधारणा अब सच साबित हो रही है। फिल्मों में आप अब भी पूछते हैं कि हीरो कौन है, लेकिन वेब सीरीज में यह कोई नहीं पूछता।

क्या इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में स्टार सिस्टम खत्म हो जाएगा?

स्टार सिस्टम भले ही पूरी तरह खत्म न हो, इसका प्रभुत्व जरूर कम हो जाएगा। इसमें थोड़ा वक्त लगेगा। हॉलीवुड में निर्देशक ही स्टार है। जेम्स कैमरून की 20 करोड़ डॉलर की फिल्म अवतार (2009) में कोई बड़ा स्टार नहीं था। लेकिन मुझे लगता है कि हमारी संस्कृति में नायकों को बहुत पसंद किया जाता है। सौ करोड़ की फिल्म के लिए आज भी आपको एक स्टार चाहिए, लेकिन पांच से दस साल में इस स्थिति में बदलाव आ सकता है।

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आजादी के सिपाहीः द फॉरगाटन आर्मी का रोमांचक मंजर

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 इस माध्यम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अभिनेता का माध्यम है। आपका बड़ा स्टार होना जरूरी नहीं

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