विपक्ष पर शिकंजा, अपनों पर ठंडा

एस.के. सिंह और चंदन कुमार
रडार की जद में और बाहर
रडार की जद में और बाहर

एस.के. सिंह और चंदन कुमार
विपक्ष के नेताओं के खिलाफ सीबीआइ, ईडी, आइटी जैसी तमाम केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता से सरकार पर बदले की सियासत के आरोप

आर्थिक अपराधों की जांच करने वाली केंद्रीय एजेंसियों की फेहरिस्त में एक नया नाम जुड़ गया है कर्नाटक में कांग्रेस के कद्दावर नेता डी.के. शिवकुमार का। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में 3 सितंबर 2019 को उन्हें दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया। उनसे पहले 21 अगस्त को सीबीआइ ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व गृह तथा वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को आइएनएक्स मीडिया केस में गिरफ्तार किया था। सीबीआइ और ईडी ने पिछले कुछ समय में राजनैतिक दलों पर शिकंजा कसते हुए कई नेताओं को गिरफ्तार किया या पूछताछ के लिए बुलाया है। इनमें कांग्रेस के अलावा राकांपा, राजद, इनेलो जैसे कई दलों के नेता हैं। दिलचस्प बात है कि जांच एजेंसियों की फेहरिस्त में कुछ ऐसे नाम भी हैं जिनके खिलाफ इन एजेंसियों की सक्रियता उतनी नहीं दिखती। ये ऐसे नेता हैं जो या तो दूसरी पार्टियों से भाजपा में आए या एनडीए के सहयोगी हैं।

सबसे हाइ प्रोफाइल मामला पी. चिदंबरम का है। उनकी गिरफ्तारी बड़े नाटकीय तरीके से हुई। शाम करीब आठ बजे कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बाद चिदंबरम अपने निवास पहुंचे। कुछ देर बाद सीबीआइ की टीम भी उनके घर आ गई। जांच अधिकारियों ने पहले उनके घर के बाहर नोटिस चिपकाया कि दो घंटे में पेश हों। इसके कुछ देर बाद ही वे दीवार फांदकर अंदर गए और गिरफ्तार कर लिया। सीबीआइ के इस तरीके पर भाजपा के ही एक वरिष्ठ नेता ने आउटलुक से कहा कि जांच एजेंसियों को थोड़ा सब्र करना चाहिए था। गिरफ्तारी से एक दिन पहले दिल्ली हाइकोर्ट ने चिदंबरम को अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया था। वह तब से सीबीआइ की हिरासत में हैं और खबर लिखे जाने तक उन्हें जमानत नहीं मिली थी। आरोप है कि विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआइपीबी) ने 2007 में आइएनएक्स मीडिया में 305 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश को मंजूरी देने में नियमों का उल्लंघन किया। तब चिदंबरम वित्त मंत्री थे। सीबीआइ ने 15 मई 2017 को एफआइआर दर्ज की थी। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी मनीलॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। एयरसेल-मैक्सिस केस में भी एजेंसियां उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती हैं।

दूसरा हाइ प्रोफाइल मामला डी.के. शिवकुमार का है। शिवकुमार वही नेता हैं जिन्होंने पिछले साल भी कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। इससे पहले 2017 में उन्होंने गुजरात से एक राज्यसभा सीट पर चुनाव के दौरान वहां के 44 कांग्रेस विधायकों को कर्नाटक के एक रिजॉर्ट में “सुरक्षित” रखा था। इसी के बाद आयकर विभाग ने उनके ठिकानों पर छापे मारे थे। आयकर विभाग की चार्जशीट के आधार पर ही ईडी ने सितंबर 2018 में मनीलॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। शिवकुमार का बचाव करते हुए कांग्रेस ने उन्हें निर्दोष बताया। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि केंद्र सरकार अपनी आर्थिक नाकामियों को छिपाने के लिए यह सब कर रही है। उन्होंने ट्वीट किया, “जब जीडीपी ग्रोथ पांच फीसदी पर आ गई तो चिदंबरम को गिरफ्तार कर लिया गया, और जब सेंसेक्स और रुपया ढेर हुआ तो शिवकुमार की गिरफ्तारी हो गई।”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने आउटलुक से कहा कि सरकार राजनैतिक बदले की भावना के तहत काम कर रही है। वह अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए विपक्ष के नेताओं को निशाना बना रही है। हालांकि भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों ने जो भ्रष्टाचार किया है, उसी वजह से वे एजेंसियों के शिकंजे में हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि सीबीआइ और ईडी को सूचना लेने का पूरा अधिकार है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सही रवैया नहीं अपनाया, उसे आत्ममंथन करना चाहिए। इससे पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था कि जिस तरह मौजूदा सरकार ईडी और सीबीआइ का दुरुपयोग कर रही है, वैसा पहले किसी सरकार ने नहीं किया। ईडी, सीबीआइ और डर पैदा करना, यही नया लोकतंत्र है।

शिवकुमार और चिदंबरम के अलावा विपक्षी नेताओं की एक लंबी फेहरिस्त है जो केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव का परिवार, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के विधायक बेटे कुलदीप बिश्नोई के खिलाफ भी सीबीआइ, ईडी या आयकर विभाग की जांच प्रक्रिया चल रही है। हरियाणा में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। आइएलऐंडएफएस घोटाले में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे को ईडी ने 22 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया था। उन पर भी मनीलॉन्ड्रिंग का आरोप है। ठाकरे की पार्टी ने 2019 का लोकसभा चुनाव तो नहीं लड़ा था, लेकिन भाजपा के खिलाफ प्रचार किया था। महाराष्ट्र में भी कुछ दिनों बाद चुनाव होने हैं।

दूसरी तरफ कुछ और उदाहरण देखिए। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा, पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता मुकुल रॉय, असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे, तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) से भाजपा में आए सांसद वाइ.एस. चौधरी और सी.एम. रमेश-इन सबके खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों ने मुकदमा दर्ज किया था। इनमें से ज्यादातर नेता पहले दूसरी पार्टी में थे, और जांच एजेंसियों का शिकंजा कसने के बाद भाजपा में आ गए। इसके बाद इनके खिलाफ जांच ठंडे बस्ते में चली गई है।

जांच एजेंसियों का फंदाः अदालत में पेशी के दौरान पूर्व गृह तथा वित्त मंत्री चिदंबरम

सोनिया और राहुल गांधी

भाजपा के राज्यसभा सदस्य सुब्रह्मण्यम स्वामी ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए 1 नवंबर 2012 को दिल्ली की एक अदालत में याचिका दायर की थी। स्वामी का आरोप है कि सोनिया और राहुल ने गलत तरीके से नेशनल हेराल्ड की 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कब्जा कर लिया। मई 2014 में एनडीए सरकार आने के बाद 1 अगस्त 2014 को ईडी ने इस बात की जांच शुरू की कि कहीं इसमें मनीलॉन्ड्रिंग तो नहीं हुई है। पिछले साल आयकर विभाग ने सोनिया और राहुल के 2011-12 के टैक्स रिटर्न का दोबारा आकलन करने का फैसला किया। दोनों नेता इसके खिलाफ दिल्ली हाइकोर्ट गए, जहां उनकी याचिका खारिज हो गई। अंततः सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिसंबर 2018 को आयकर विभाग को इसकी अनुमति दे दी। अभी जांच जारी है और दोनों कांग्रेस नेता जमानत पर हैं।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा

पंचकूला में औद्योगिक प्लॉट आवंटन और गुड़गांव-मानेसर में लैंड यूज बदलने (सीएलयू) से जुड़े तथाकथित घोटाले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ सीबीआइ और ईडी के करीब आधा दर्जन मामले चल रहे हैं। 2011 में हुड्डा सरकार के समय पंचकूला में आवंटित करीब 30 करोड़ रुपये के 14 औद्योगिक प्लॉट इडी ने अटैच कर दिए हैं। नेशनल हेराल्ड की पेरेंट कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को 2005 में 1982 की दरों पर प्लॉट आवंटन मामले में ईडी ने हुड्डा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एजेएल के तत्कालीन चेयरमैन मोतीलाल वोरा के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। इस पर अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी। आउटलुक से बातचीत में हुड्डा ने कहा कि केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार उनके खिलाफ बदले की भावना के तहत कार्रवाई कर रही है। 

कुलदीप बिश्नोई

आय से अधिक संपत्ति के मामले में आयकर विभाग ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के विधायक बेटे कुलदीप बिश्नोई और उनके भाई चंद्रमोहन बिश्नोई का गुड़गांव में 150 करोड़ से अधिक का होटल बेनामी संपत्ति के तौर पर अटैच किया। विभाग ने बिश्नोई और उनके परिवार के खिलाफ जुलाई में छापेमारी के बाद 200 करोड़ रुपये से अधिक की गोपनीय विदेशी संपत्ति होने की आशंका जताई। परिवार का कहना है कि 2014 का लोकसभा चुनाव भाजपा और हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) गठबंधन में लड़ने वाले कुलदीप 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में चले गए। इसी वजह से उन पर छापे डलवाए जा रहे हैं।

चौटाला परिवार

आय से अधिक संपत्ति मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के परिवार को नोटिस जारी किए गए हैं। खुद चौटाला शिक्षक भर्ती घोटाले में 10 साल की सजा काट रहे हैं। जेबीटी टीचर भर्ती घोटाले में सीबीआइ की स्पेशल कोर्ट ने 16 जनवरी 2013 को ओमप्रकाश चौटाला और उनके बेटे अभय चौटाला समेत 55 लोगों को आइपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार दिया था।

मायावती

मायावती के मुख्यमंत्री रहते मूर्ति और मेमोरियल निर्माण में 111 करोड़ रुपये की अनियमितता के मामले में ईडी ने 31 जनवरी 2019 को कई जगहों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी ने मनीलॉन्ड्रिंग का भी केस दर्ज किया। ईडी ने इस साल जनवरी में छापे भी मारे थे। अभी जांच जारी है। आयकर विभाग ने इसी साल 16 जुलाई को मायावती के भाई आनंद कुमार की 400 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति जब्त की थी। विभाग आनंद कुमार की कथित 1,300 करोड़ रुपये की संपत्ति की जांच कर रहा है। आरोप है कि 2007 से 2014 के दौरान उनकी संपत्ति 7.1 करोड़ से बढ़कर 1,300 करोड़ रुपये हो गई।

लालू यादव परिवार

आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति मामले में लालू प्रसाद यादव के रिश्तेदारों की 12 संपत्तियां जब्त की हैं। इनमें कुछ लालू की बेटी मीसा भारती, बेटे तेजस्वी यादव और पत्नी राबड़ी देवी की भी हैं। लालू यादव अभी चारा घोटाला मामले में जेल में हैं। सीबीआइ कोर्ट ने उन्हें इस घोटाले से जुड़े कई मामलों में अलग-अलग सजा सुनाई है। कोर्ट चाईबासा, दुमका, देवघर कोषागार से अवैध तरीके से पैसे निकालने के मामले में सजा सुना चुकी है।

दयानिधि मारन

द्रमुक सांसद और पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन के खिलाफ एयरसेल-मैक्सिस डील में भ्रष्टाचार की जांच चल रही है। दयानिधि और उनके भाई कलानिधि मारन पर आरोप है कि उन्होंने एयरसेल कंपनी को खरीदने में मलेशियाई कंपनी मैक्सिस की मदद की। इसमें उन्होंने 700 करोड़ रुपये की रिश्वत ली। विशेष अदालत ने पिछले साल दोनों को रिश्वत और मनीलॉन्ड्रिंग के आरोपों से बरी कर दिया था। सीबीआइ और ईडी ने इस फैसले को दिल्ली हाइकोर्ट में चुनौती दी है, जहां इसकी आखिरी बार सुनवाई 29 अगस्त 2019 को हुई थी। सीबीआइ के और समय मांगने के बाद कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 1 अक्टूबर तय की है।

बी.एस. येदियुरप्पा

कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा पर 2011 में पांच मामलों में खनन के लिए अवैध तरीके से जमीन अधिसूचित करने का आरोप लगा था। लोकायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार के दो मामलों में गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद येदियुरप्पा को 15 अक्टूबर 2011 को गिरफ्तार किया गया। 23 दिनों के बाद उन्हें जमानत मिली। कर्नाटक हाइकोर्ट ने खनन संबंधी मामलों में उनके खिलाफ एफआइआर को रद्द कर दिया। मामला सुप्रीम कोर्ट में गया, जहां कोर्ट ने सीबीआइ जांच का आदेश दिया। येदियुरप्पा के पास से बरामद डायरी से पता चला कि शीर्ष भाजपा नेताओं, जजों और वकीलों को भारी रकम दी गई। सीबीआइ वर्षों से उनके खिलाफ जांच कर रही थी, लेकिन आखिरकार मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाई।

मुकुल रॉय

पूर्व रेल राज्यमंत्री मुकुल रॉय कभी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी थे और तृणमूल कांग्रेस में नंबर दो की हैसियत रखते थे। 2017 से वे राज्य में भाजपा के बड़े नेता बन गए हैं। वे सारदा चिटफंड मामल में आरोपी हैं। एक स्थानीय चैनल के स्टिंग ऑपरेशन (नारद स्टिंग) में उन्हें और कई अन्य तृणमूल नेताओं को रिश्वत लेते दिखाए जाने के बाद ईडी ने उनसे पूछताछ की थी। लेकिन दो साल पहले वह भाजपा में शामिल हुए तो उसके बाद से उनके खिलाफ जांच की रफ्तार धीमी पड़ गई है। लंबे अरसे बाद सीबीआइ ने 28 अगस्त को नारद स्टिंग मामले में पूछताछ के लिए बुलाया था।

हेमंत बिस्वा सरमा

असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने 2016 के विधानसभा चुनाव से पहले अगस्त 2015 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। भाजपा ने भ्रष्टाचार को लेकर उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। 21 जुलाई 2015 को उनके खिलाफ बुकलेट भी जारी की थी। उन्हें गुवाहाटी के जल आपूर्ति घोटाले का ‘मुख्य आरोपी’ बताया गया। सीबीआइ ने सारदा घोटाले की जांच के दौरान सरमा के घर छापा मारा था और 26 नवंबर 2014 को उनसे पूछताछ की थी। आरोप था कि असम में सारदा का बिजनेस फैलाने के लिए उसके चेयरमैन सुदीप्त सेन से सरमा हर महीने 20 लाख रुपये लेते थे। हालांकि सीबीआइ की चार्जशीट में उनका नाम नहीं है। वे 28 अगस्त 2015 को भाजपा में शामिल हुए, इसके बाद सीबीआइ ने पूछताछ के लिए नहीं बुलाया।

नारायण राणे

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे पहले शिवसेना और फिर कांग्रेस में रहने के बाद अब भाजपा के कोटे से राज्यसभा सदस्य हैं। एक समय राणे और उनके परिवार पर भाजपा ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। उनका नाम आदर्श सोसायटी घोटाले में भी आया था। ईडी उनके खिलाफ मनीलॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रही थी। भाजपा के करीब आने के बाद उनके खिलाफ भी जांच सुस्त पड़ गई है।

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