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लॉकडाउन की आड़ में घोटाला

एक ही दिन में जारी किए शराब के 436 परमिट, अवैध बिक्री से सरकार को एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान
आरोपों का जवाबः पार्टी नेता सतविंद्र राणा की गिरफ्तारी के बाद उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि उन्हें फंसाया गया

जिस समय पूरा देश लॉकडाउन में कोविड-19 महामारी से लड़ रहा था, उस समय हरियाणा में एक बड़े घोटाले को अंजाम दिया जा रहा था। यह घोटाला अवैध रूप से शराब बेचने का है, जिससे राज्य सरकार को करीब 1,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने का अंदेशा है। इसे अंजाम देने के पीछे कई अधिकारी और नेता हैं। अब इसकी जांच भी ठंडी पड़ती नजर आ रही है। जांच के लिए गठित वरिष्ठ आइएएस अधिकारी टीसी गुप्ता की अध्यक्षता में तीन अधिकारियों की स्पेशल इनक्वायरी टीम (एसईटी) को 31 मई तक रिपोर्ट देनी थी, लेकिन इसने सरकार से दो महीने का समय और मांगा है। एसईटी प्रमुख गुप्ता का कहना है कि जांच के लिए आबकारी विभाग से मांगी गई कुछ फाइलें और जरूरी कागजात अभी तक नहीं मिले हैं। प्रदेश की मनोहर लाल खट्टर सरकार में गृह मंत्री अनिल विज का कहना है कि घोटाला जितना बड़ा समझा जा रहा था, वास्तव में उससे बड़ा है। आउटलुक से बातचीत में उन्होंने कहा, “इस मामले के तार राजस्थान और उत्तर प्रदेश के तस्कारों से भी जुड़े हैं, जिसकी जांच जारी है। इसमें आबकारी विभाग, पुलिस और कई रसूखदारों की भी संलप्तिता है। अभी तक एक पूर्व विधायक सतविंद्र राणा की गिरफ्तारी हुई है, कई और बड़े लोगों की धरपकड़ बाकी है। एसईटी सोनीपत और पानीपत ही नहीं, बल्कि यमुनानगर, रेवाड़ी और नारनौल समेत पूरे राज्य में जहां भी लॉकडाउन दौरान तस्करी हुई है, सबकी जांच करेगी।”

विपक्ष इस जांच पर सवाल उठा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आउटलुक से कहा, “देशभर में शराब के ठेके खुले तो लंबी-लंबी लाइनें लग गईं, लेकिन हरियाणा में कोई लाइन नहीं लगी। इससे साफ है कि लॉकडाउन में भी शराब धड़ल्ले से बेची गई। अब एसईटी का गठन कर सरकार जांच के नाम पर लीपा-पोती कर रही है। सरकार यदि गंभीर होती तो एसईटी की बजाय एसआइटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) का गठन किया जाता या जांच सीबीआइ से कराई जाती।”

विपक्ष के आरोपों में दम है तो इसकी वजहें भी हैं। जांच में ढिलाई पहले दिन से ही नजर आ रही है। सरकार ने पहले जब एसईटी में शामिल करने के लिए आबकारी विभाग से वरिष्ठ अधिकारी का नाम मांगा था, तो कई दिनों तक विभाग ने ही टालमटोल की। इस तरह एसईटी के गठन में ही देरी हुई। एसईटी में टीसी गुप्ता के साथ शामिल एडीजीपी सुभाष यादव 31 मई को सेवानिवृत्त हो गए हैं, लेकिन उनकी जगह किसी को शामिल नहीं किया गया है। गुप्ता के साथ एसईटी में जांच के लिए आबकारी एवं कराधान विभाग के अतिरिक्त आयुक्त विजय सिंह ही बचे हैं। एसईटी को एसआइटी जैसी शक्तियां नहीं दी जा रही हैं। इसलिए विपक्ष को अंदेशा है कि सरकार मामले की जांच को बहुत हल्के में ले रही है और घोटाले में शामिल बड़े नेता, अधिकारी और तस्कर साफ बच जाएंगे। दरअसल गृह मंत्री विज चाहते थे कि घोटाले की जांच एसआइटी से कराई जाए, लेकिन सरकार ने एसआइटी की बजाय एसईटी की अधिसूचना जारी की। शक्तिविहीन एसईटी अगले दो माह में भी रिपोर्ट दे पाएगी, इस बात पर संशय है क्योंकि घोटाला दिनों-दिन बड़ा बनता जा रहा है। पकड़े गए मुख्य आरोपी भूपेंद्र सिंह के पंजाब, यूपी और राजस्थान के शराब तस्करों से भी संपर्क निकलने के बाद अब अन्य राज्यों की पुलिस को भी भूपेंद्र से पूछताछ का इंतजार है।

हरियाणा की गठबंधन सरकार में जननायक जनता पार्टी (जजपा) सुप्रीमो और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के पास आबकारी एवं कराधान विभाग है। इस घोटाले में राजोंद से कांग्रेस के दो बार विधायक रहे सतविंद्र सिंह राणा की गिरफ्तारी के तार दुष्यंत चौटाला से जोड़े जा रहे हैं, क्योंकि अक्टूबर 2019 के चुनाव में राणा ने कांग्रेस का टिकट न मिलने पर जजपा के टिकट पर कलायत से चुनाव लड़ा था। दुष्यंत चौटाला, राणा का बचाव कर रहे हैं। उनका कहना है कि राणा को बेवजह फंसाया गया है। उनका कहना है कि इस मामले में आबकारी विभाग और पुलिस की मिलीभगत एसईटी की जांच रिपोर्ट आने बाद स्पष्ट हो जाएगी।

क्या है घोटाला

22 मार्च को जनता कर्फ्यू और उसके बाद लॉकडाउन में जब तमाम सरकारी तंत्र कोरोना से बचाव में जुटा था, उस समय हरियाणा का आबकारी विभाग शराब ठेकों को परमिट दे रहा था। अन्य सरकारी विभागों में जहां फाइलें महीनों धूल फांकती रहती हैं, वहीं आबकारी विभाग ने लॉकडाउन के दूसरे दिन 26 मार्च को इतनी तेजी दिखाई कि एक ही दिन में शराब के 436 परमिट जारी कर डाले।

आबकारी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 26 मार्च को एक्साइज परमिट के लिए 471 आवेदन आए। औपचारिकतावश केवल 11 आवेदन खारिज किए गए और 24 को लंबित छोड़ दिया गया। बाकी बचे 436 आवेदनों को स्वीकार करते हुए उसी दिन सबको परमिट जारी कर दिए गए। जींद, रेवाड़ी और रोहतक जिलों में ही 50 से अधिक परमिट जारी किए गए। सोनीपत, सिरसा, पानीपत, नारनौल, कुरुक्षेत्र, करनाल और गुरुग्राम जिलों के लिए तो जितने आवेदन आए थे, उन सबको स्वीकार कर परमिट दे दिया गया। इस परमिट के बल पर फैक्ट्री में तैयार की गई शराब को होलसेल की दुकानों तक पहुंचाया गया। एसईटी की जांच से पहले छह जिलों में आबकारी एवं कराधान विभाग ने लॉकडाउन के पहले दिन और लॉकडाउन-3 के समय शराब के स्टॉक का मिलान किया तो बड़ा खेल सामने आया। स्पष्ट था कि लॉकडाउन में अवैध तरीके से शराब बेची गई, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ। जांच से साफ हुआ कि घोटाले की जड़ें सोनीपत, पानीपत और यमुनानगर ही नहीं बल्कि सभी जिलों में फैली हो सकती हैं। जजपा नेता और पूर्व एमएलए सतविंद्र सिंह राणा की गिरफ्तारी के बाद कई सफेदपोश भी रडार पर हैं। सूत्रों का कहना है कि इस घोटाले के तार कई पुलिस अफसरों तक भी पहुंच सकते हैं।

घोटाले की परत सबसे पहले सोनीपत जिले में और फिर पानीपत में खुली। सोनीपत पुलिस और एक्साइज विभाग ने पकड़ी गई अवैध शराब को रखने के लिए खरखौदा में गोदाम बना रखा है। ऐसा ही एक गोदाम समालखा में भी है। लॉकडाउन के दौरान इन दोनों गोदामों से शराब निकाल कर बेच दी गई। फतेहाबाद में भी करोड़ों रुपये का खेल हुआ। यमुनानगर में शराब के खेल में एक ठेकेदार पर भी मामला दर्ज किया गया। इसके पीछे भी बड़ा राजनीतिक खेल देखने को मिला। नारनौल में भी पुलिस द्वारा पकड़ी गई शराब को लॉकडाउन का फायदा उठाते हुए बेच दिया गया। रेवाड़ी में स्टॉक में शराब की दो हजार पेटियां कम मिली हैं। रेवाड़ी के डीसी यशेंद्र सिंह ने बताया कि आबकारी एवं कराधान विभाग के मुख्यालय को रिपोर्ट भेज दी है। यह बात तो साफ है कि इतने बड़े पैमाने पर कोई घोटाला बड़े अधिकारियों और नेताओं के शामिल हुए बिना संभव नहीं है। ऐसे में सवाल है कि क्या इसकी जांच निष्पक्ष हो सकेगी?

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सरकार जांच के नाम पर लीपा-पोती कर रही है। यदि वह गंभीर होती तो एसईटी की बजाय एसआइटी का गठन किया जाता या जांच सीबीआइ से कराई जाती

भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष

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इस मामले के तार राजस्थान और उत्तर प्रदेश के तस्करों से भी जुड़े हैं, जिसकी जांच जारी है। इसमें आबकारी विभाग, पुलिस और कई रसूखदारों की भी संलप्तिता है

अनिल विज, गृह मंत्री, हरियाणा

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एक दिन का कमाल

       जिला   जारी परमिट

       जींद    65

       रेवाड़ी   50

       रोहतक  57

       भिवानी  47

       फरीदाबाद 41

       गुरुग्राम (ईस्ट)   15

       गुरुग्राम (वेस्ट)   7

       हिसार   6

       जगाधरी 7

       झज्जर  24

       कैथल   25

       करनाल  20

       कुरुक्षेत्र  13

       मेवात   6

       नारनौल 7

       पानीपत 9

       सिरसा  20

       सोनीपत 14

       अंबाला  3

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