किसान नाराज तो भावनात्मक मुद्दे पर जोर

जींद, कैथल, नरवाना से हरीश मानव
फिर मौके की तलाशः रोहतक में 8 सितंबर को रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
फिर मौके की तलाशः रोहतक में 8 सितंबर को रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
पीटीआइ

जींद, कैथल, नरवाना से हरीश मानव
किसान नाराज तो भावनात्मक मुद्दे पर जोर

हरियाणा की मंडियों में धान और कपास की नई फसल की आवक शुरू हो गई है। सही भाव की आस में फसल लिए किसान मंडियों में हैं, तो चुनावी फसल काटने के लिए नेता किसानों के घर जा रहे हैं। नमी के नाम पर धान का पूरा भाव (एमएसपी) न मिलने से किसान भले मायूस हैं, पर वे नेताओं की चुनावी फसल का मोलभाव अच्छे से भांप रहे हैं। जींद मंडी में धान बेचने का इंतजार कर रहे इक्कस गांव के किसान रामफल कहते हैं, “यदि खट्टर सही भाव देगा तो हम भी उसे चुनाव में सही भाव देंगे।” गांव निडाना से कपास बेचने आए किसान जयपाल पिछले साल एमएसपी से 400 रुपये प्रति क्विंटल कम भाव पर बिके बाजरा का जिक्र करते हैं। वे कहते हैं, “सब्जी उगाकर भी घाटा ही उठाया। खाद-बीज के भाव करीब दोगुने हो गए हैं। सरकार की भावांतर स्कीम भी काम नहीं आ रही।” सरकार भी किसानों का मूड भांप रही है। एक अक्टूबर से मंडियों में शुरू हुई धान की सरकारी खरीद में खामियां चुनाव के समय परेशानी पैदा न करें, इसके लिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव समेत कई अधिकारियों को 20 दिनों तक मंडियों में डटे रहने के निर्देश दिए हैं।

जींद बस अड्डे से करनाल जाने वाली बस के परिचालक करम सिंह ने कहा, “अबकी बार चुनाव में सरकार का घमंड कर्मचारी और उनके परिवार तोड़ेंगे। रोडवेज की किलोमीटर स्कीम में घोटाले करने वाली खट्टर सरकार ने हम पर तो एस्मा लगा दिया था, अब हम सरकार को तारे दिखाएंगे।” करम सिंह को बीच में टोकते हुए असंध जाने के लिए बस में बैठी सरबती बोलीं, “मुझे लगता है कि यह सरकार फिर आएगी क्योंकि मेरा भांजा और उसके दो दोस्त बगैर रिश्वत और सिफािरश के क्लर्क भर्ती हुए हैं।”

चुनावी मुद्दांे के सवाल पर कैथल के अमरगढ़ गामड़ी के हवा सिंह एडवोकेट कहते हैं, “मुद्दा नहीं, बस मोदी है। मोदी ने अनुच्छेद 370 खत्म करके ऐसा काम किया है जो पहले कोई नहीं कर सका।” मिठाई कारोबारी कृष्ण हलवाई का कहना है कि भले ही नोटबंदी-जीएसटी के बाद कारोबार पटरी पर नहीं चढ़ा, भाजपा से बेहतर विकल्प भी तो नहीं है।

अपनों को टिकट न मिलने से नाराजगी

हरियाणा विधानसभा चुनाव में ‘75 पार’ का नारा देने वाली भाजपा ने अपनी पहली सूची में दो कैबिनेट मंत्रियों विपुल गोयल और राव नरवीर सिंह और डिप्टी स्पीकर संतोष यादव समेत आठ विधायकों के टिकट काटे हैं। पार्टी ने 90 में से 78 सीटों के लिए उम्मीदवारों की जो घोषणा की है, उसमें से 10 टिकट दूसरे दलों से शामिल हुए नेताओं को दिए हैं। इनमें आठ इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के, एक कांग्रेस और एक शिरोमणि अकाली दल से आए हैं। पहली सूची में 40 नए चेहरे हैं। इनमें अंतराष्ट्रीय ख्याति के तीन खिलाड़ियों बबीता फोगाट, योगेश्वर दत्त और संदीप सिंह भी शामिल हैं। पार्टी सूत्रों मुताबिक टिकट वितरण में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की खूब चली। इस पर दो केंद्रीय मंत्रियों राव इंद्रजीत सिंह और कृष्णपाल गुज्जर ने भारी विरोध जताया। राव इंद्रजीत गुड़गांव और कृष्णपाल फरीदाबाद से सांसद हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई चुनाव समिति की बैठक में ये भले ही अपने बेटे-बेटियों के लिए टिकट का जुगाड़ नहीं कर पाए, पर विरोधियों का टिकट कटवाने में जरूर कामयाब रहे। राज्य के उद्योग मंत्री विपुल गोयल का टिकट कटवाने में गुज्जर का हाथ बताया जाता है। वहीं सीएम की पंसद, कैबिनेट मंत्री राव नरवीर सिंह और डिप्टी स्पीकर संतोष यादव को राव इंद्रजीत के विरोध के चलते टिकट गंवाना पड़ा। परिजनों के लिए टिकट मांगने वाले सात सांसदों को यह कहकर मना किया गया कि भाजपा की नीति मौजूदा सांसदों व विधायकों के परिजनों को टिकट नहीं देने की है। इस पर राव इंद्रजीत और कृष्णपाल ने राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की विधायक पत्नी प्रेमलता को टिकट देने का विरोध किया। प्रेमलता को उचाना कलां से उम्मीदवार बनाया गया है। बीरेंद्र सिंह के बेटे बिजेंद्र हिसार से लोकसभा सांसद हैं।

370 और एनआरसी के सहारे भाजपा

प्रदेश में पांच महीने पहले ही लोकसभा चुनाव हुए थे। तब बालाकोट एयरस्ट्राइक से उठी लहर ने हवा का रुख भाजपा की ओर कर दिया था, अब विधानसभा चुनाव की नैया अनुच्छेद 370 के नाम पर पार होने की उम्मीद है। विपक्ष यह कहकर भाजपा को घेर रहा है कि 370 अब चुनावी मुद्दा नहीं रह गया, क्योंकि यह कानून बन चुका है। विपक्ष द्वारा उछाले जा रहे स्थानीय मुद्दों को दबाने के लिए खट्टर सरकार डबल इंजन (केंद्र-राज्य में एक सरकार), बगैर रिश्वत-सिफारिश के नौकरी और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्ट्रर (एनआरसी) के मुद्दे उठा रही है। स्थानीय मुद्दों के बजाय 370 और एनआरसी को मुद्दा बनाने के सवाल पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने आउटलुक से कहा कि 20 दिन की 1,200 किलोमीटर जनआशीर्वाद यात्रा में लोगों के बीच जाकर मैंने महसूस किया कि जनता में राष्ट्रवाद की भावना सर्वोपरि है। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि खट्टर ने ये मुद्दे इसलिए उठाए हैं, क्योंकि गिनाने के लिए उनके पास कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आउटलुक से कहा, “पांच साल पहले चुनावी घाेषणापत्र के 154 वादों में भाजपा ने एक भी पूरा नहीं किया। भाजपा किसान, कारोबारियों और बेरोजगारों को भ्रमित कर रही है।” सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआइइ) की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में लगभग 20.20 लाख लोग बेरोजगार हैं। आउटलुक से बातचीत में स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा कि हरियाणा 28 फीसदी बेरोजगारी दर के साथ इस मामले में नंबर-1 पर है। यादव के अनुसार सूचना के अधिकार कानून के तहत ली जानकारी के मुताबिक राज्य के 15 जिलों में 15 लाख से ज्यादा युवा बेरोजगार हैं।

पचहत्तर पार बनाम महंगाई-बेरोजगारी

भाजपा ने ‘अबकी बार 75 पार’ का नारा दिया है, लेकिन लेकिन विपक्ष प्याज, पेट्रोल व दालांे के भाव 75 पार बताकर भाजपा को घेर रहा है। दूसरी तरफ, भाजपा भ्रष्टाचार के नाम पर कांग्रेस को घेर रही है। प्लॉट आवंटन घोटाले के आरोपों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपंेद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ सीबीआइ व ईडी की जांच चल रही है। कुलदीप बिश्नोई पर 200 करोड़ रुपये की बेनामी संपति का आरोप है। मनोहर सरकार पांच साल में 69,000 नौकरियां ‘बिन पर्ची, बिन खर्ची’ देने का दावा कर रही है, पर इसकी पोल हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं से खुल चुकी है। प्रश्नपत्र 13 बार लीक हुए हैं और आयोग के चेयरमैन की धांधलियों में सलंप्तिता भी सामने आई है। चुनाव से पहले भूपेंद्र सिंह हुड्डा को नेता प्रतिपक्ष और कुमारी सैलजा को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के बाद कांग्रेस गुटबंदी खत्म करने में कामयाब हुई तो भाजपा का 75 पार का लक्ष्य मुश्किल में पड़ सकता है। दूसरी तरफ, भाजपा इस बात से गदगद है कि विपक्ष बिखरा है। खट्टर की जनआशीर्वाद यात्रा के समापन पर जाटलैंड रोहतक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विजय संकल्प रैली के जरिए भाजपा ने जाट वोट बैंक भी अपनी ओर होने का संदेश देने की कोशिश की है। यह संदेश मतदाताओं तक गया या नहीं, यह 21 अक्टूबर को मतदान और 24 अक्टूबर को चुनाव नतीजों से साफ होगा।

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