प्रथम दृष्टि: कब कहें अलविदा

गिरिधर झा
अमिताभ बच्चन
अमिताभ बच्चन

गिरिधर झा
एक समय ऐसा भी आया जब अमिताभ के पास कोई काम नहीं था। यह उनके लिए सबक रहा होगा और इसलिए वे तब तक काम जारी रखना चाहते हैं जब तक उन्हें लोगों का प्यार मिलता रहे

एक खिलाड़ी को अपनी जर्सी हमेशा के लिए खूंटी पर कब टांग देनी चहिए? एक कलाकार को किस वक्त रंगमंच से रुखसत लेना चाहिए? किसी डॉक्टर को अपना आला और वकील को अपना काला कोट आलमारी में कब बंद कर देना चाहिए? किसी नेता को कब यह एहसास हो जाना चाहिए कि अब उनके मार्गदर्शक मंडल में शामिल होने का समय आ गया है? क्या हर व्यक्ति के लिए, चाहे वह किसी भी पेशे में हो, रिटायर होने का कोई नियत समय या उम्र है? नौकरीपेशा लोगों के लिए तो सेवानिवृत्त होने की आयु निर्धारित होती है, लेकिन क्या किसी रंगकर्मी, रचनाधर्मी, अदाकार, चित्रकार या फिर नेता के लिए कोई वक्त मुकर्रर किया जा सकता है, भले ही उस समय वह शोहरत की बुलंदियों पर हो?

आज ये सवाल फिर से मौजूं हैं, क्योंकि गुजरे जमाने के मशहूर पटकथा लेखक सलीम खान ने पिछले दिनों अमिताभ बच्चन को फिल्मों से अवकाश ग्रहण की सलाह दी। पिछले 11 अक्टूबर को बॉलीवुड के शहंशाह ने 79 वर्ष पूरे कर जीवन के अस्सीवें वर्ष में प्रवेश किया। इस अवसर पर एक साक्षात्कार में तीन दशकों से रिटायर्ड जिंदगी जी रहे सलीम ने कहा कि अमिताभ ने अपने करियर में सब कुछ हासिल कर लिया और अब उन्हें बाकी जिंदगी सुकून से बितानी चाहिए। सलीम की सलाह अमिताभ के अनेक प्रशंसकों को नागवार लग सकती है, क्योंकि ‘सहस्राब्दि के महानायक’ अब भी अपने करियर के शिखर पर हैं। उनके साथ काम करने वालों की भीड़ बढ़ती ही जा रही है। लंबे समय से अनुशासित जीवन जीने वाले अमिताभ अब भी उतने ही व्यस्त हैं, जितना युवावस्था में थे। फिलहाल, उनके लिए कोई कारण नहीं है कि अपने मित्र सलीम की सलाह पर अमल करें।

हालांकि विभिन्न क्षेत्रों की चर्चित हस्तियों का इस मसले पर अलग-अलग नजरिया रहा है। सुनील गावस्कर ने क्रिकेट को उस समय अलविदा कह दिया, जब वे पूरे फॉर्म में थे। उनकी अंतिम पारी की गिनती उनके सबसे बेहतरीन प्रदर्शन में की जाती है। उनका मानना था कि किसी व्यक्ति को उसी समय रिटायर हो जाना चाहिए जब वह सफलता की चोटी पर हो, न कि करियर की ढलान पर। इसके विपरीत, कपिल देव और सचिन तेंडुलकर को खिलाड़ी के रूप में रिटायरमेंट की घोषणा विलंब से करने के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

पाश्चात्य देशों में तो आज भी अनेक पेशेवर लोग 50 वर्ष की आयु तक ढेर सारा पैसा कमाकर अपनी बाकी जिंदगी टेनिस और गोल्फ खेलने, मछली मारने और विश्व भ्रमण में बिताते हैं। दुनिया की आपाधापी और भागदौड़ से दूर वे अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पर जीते हैं। इसके विपरीत ऐसे भी लोग हैं जिनके लिए जीवन का मतलब ही चलते चले जाना है। उनके हिसाब से जब तक आप शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम हैं, तब तक आप को अपना काम बेफ्रिक होकर करते रहना चाहिए। अभिनेता देवानंद इसी फलसफे को मानने वाले थे। जिंदगी के आखिरी दो-तीन दशकों में उनकी कोई भी फिल्म सफल नहीं हुई, लेकिन इससे विचलित हुए बगैर वे अपनी धुन में काम करते रहे। यहां तक कि 88 वर्ष की उम्र में जब लंदन के होटल में उन्होंने अंतिम सांस ली, उस समय भी वे अगली फिल्म बनाने की योजना में जुटे थे। मकबूल फ़िदा हुसैन, खुशवंत सिंह, राम जेठमलानी, जोहरा सहगल जैसी अन्य कई हस्तियां उम्र के दसवें दशक में बखूबी अपना-अपना काम करती रहीं। तुलसीदास और रवींद्रनाथ टैगोर से लेकर अंग्रेजी उपन्यासकार सिडनी शेल्डन तक कई लेखकों ने उत्कृष्ट रचनाएं ढलती उम्र में ही लिखीं। राजनीति में भी मोरारजी देसाई अस्सी वर्ष पूरे कर चुके थे जब प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने देश के बागडोर संभाली। चालीस पार लिएंडर पेस भी टेनिस कोर्ट पर अपने से आधी उम्र के खिलाड़ी का दमखम दिखाते रहे हैं। जाहिर है, उम्र का किसी रचनात्मक, सामाजिक या राजनीतिक कार्य से कोई सीधा सरोकार नहीं लगता है। ऐसे लोगों के लिए आयु महज एक संख्या है।

जहां तक अमिताभ का सवाल है, उनमें कलाकार के रूप में कुछ नया करने की इच्छाशक्ति आज भी बरकरार है। ऐसा नहीं है कि उन्होंने अभिनय की दुनिया से दूर होने की कोशिश नहीं की। नब्बे के दशक की शुरुआत में वे खुदा गवाह के बाद फिल्म इंडस्ट्री को खुदा हाफिज बोलकर अमेरिका चले गए, लेकिन जब वे कुछ वर्षों के बाद मायानगरी लौटे तो उनकी फिल्मों को उन्हीं दर्शकों ने नकार दिया, जो कभी उन्हें सिर-आंखों पर बिठाए रखते थे। जैसा कि आप इस अंक में पढ़ेंगे, एक समय ऐसा भी आया जब उनके पास कोई काम नहीं था। यह वह दौर था जब उन्हें एहसास हुआ होगा कि काम मिलने और करने की जीवन में क्या अहमियत है। शायद यह अमिताभ के लिए सबक रहा होगा। वैसे भी किसी कलाकार को तब तक अपना सफर जारी रखना चाहिए जब तक उसे लोगों का प्यार मिलता रहे। लेकिन जब उसे यह लगने लगे कि उसका दौर बीतने लगा है और चाहने वाले दूर होने लगे हैं तो उसे अलविदा कहने में देर नहीं करनी चाहिए। अमिताभ को ऐसा कब करना चाहिए, यह उनसे बेहतर कोई और नहीं जान सकता है।

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