हमारी जड़ खोपड़ी में ज्ञान का प्रकाश

राजेंद्र धोड़पकर
नरम-गरम
नरम-गरम

राजेंद्र धोड़पकर
हमारे देश में अक्सर ऐसे ज्ञान के सर्चलाइट जलते रहते हैं, जिससे सारे भारतीय समाज के दिमागों में ज्ञान का प्रकाश फैलता रहा है

लोग कहते हैं कि पढ़ने-लिखने से ज्ञान बढ़ता है। हालांकि, यह भी सच है कि ऐसा कुछ पढ़ने को कम ही मिलता है जिसे पढ़कर ज्ञान का प्रकाश दिमाग में फैल जाए। पिछले दिनों आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का एक बयान पढ़कर ऐसा ही हुआ कि ज्ञानचक्षु खुल गए। भागवत जी ने बताया कि “लिंचिंग” एक विदेशी अवधारणा है, और इसका इस्तेमाल भारत को विदेशों में बदनाम करने के लिए हो रहा है। तभी मुझे पता चला कि यह कितना बड़ा षड्यंत्र है, लगभग वैसे ही जैसे अंग्रेजों ने भारत को पराधीन बनाकर इसकी सारी दौलत लूट ली थी। बताइए, हमारे देश के लोग हमारे ही देश के दूसरे लोगों को पीट-पीटकर मार रहे हैं, अपने ही हाथ-पैर और अपनी ही लाठियां वगैरह इस्तेमाल कर रहे हैं, मारने में बेचारे जो ऊर्जा खर्च कर रहे हैं वह भी अपने देश का ही अनाज खाकर पैदा हो रही है। और तो और, जो कारण पीट-पीटकर हत्या के बताए जा रहे हैं, वे भी मुख्यत: भारतीय हैं। बच्चा चुराने वगैरह की अफवाहें तो शायद दुनिया में और भी जगह होती होंगी, लेकिन बताइए दुनिया के और किस देश में गाय के नाम पर किसी की हत्या होती है? यानी सब कुछ शत-प्रतिशत भारतीय मामला और श्रेय एक विदेशी अवधारणा को मिल रहा है। घोर अन्याय है।

यह हमारी विनम्रता है कि हमने इस अवधारणा को कोई नाम नहीं दिया। इसका अर्थ यह तो नहीं कि विदेशी इसे लिंचिंग कह दें। यह सही है कि लिंचिंग के कई उदाहरण विदेशों में मिलते हैं और पिछली शताब्दी के शुरुआती दशकों तक अमेरिका में अश्वेत लोगों की लिंचिंग करना एक लोकप्रिय कार्यक्रम था। लेकिन हम दावे से कह सकते हैं कि हमारे देश के वीरों ने इन विदेशी लोगों के बारे में पढ़कर नहीं सीखा है, क्योंकि यह भी तय है कि इन वीरों का कुछ भी पढ़ने-लिखने से कोई ताल्लुक नहीं है। यह हमारे लोगों का पूरी तरह मौलिक कार्यक्रम है और इसका विदेशी लिंचिंग से कोई ताल्लुक नहीं है।

हमारे देश में अक्सर ऐसे ज्ञान के सर्चलाइट जलते रहते हैं, जिससे सारे भारतीय समाज के दिमागों में ज्ञान का प्रकाश फैलता रहा है। कुछ वर्षों पहले जब बलात्कार को लेकर कुछ चर्चा हो रही थी, तब भागवत जी ने एक और चौंकाने वाली बात बताई थी। उन्होंने कहा- “ये बलात्कार भारत में नहीं हो रहे हैं।” यहां वे कुछ रुके और फिर रहस्य खोला, “ये बलात्कार इंडिया में हो रहे हैं।” मैं चौंक गया। मुझे यह मालूम ही नहीं था। यानी भाई साहब, बलात्कार करने वाले इंडियन हैं और बलात्कार की शिकार महिलाएं भी इंडियन, जहां बलात्कार हो रहा है वह भी इंडिया और बदनाम बेचारा हमारा भारत देश हो रहा है। मुझे यह भी समझ में आया कि भारत जितना ही पुराना इंडिया भी है, क्योंकि बलात्कार की घटनाएं हमारे देश में हजारों साल से बताई जा रही हैं। अब मैं यह समझ गया कि इंडिया और भारत को अलग-अलग कैसे पहचाना जाए। एकदम सरल है, जहां बलात्कार हो वह इंडिया और जहां न हो वह भारत।

मैं सोच रहा हूं कि अपना बिजली का कनेक्शन कटवा दूं। हमारे राज्य में बिजली वैसे ही महंगी हुई जा रही है और जब ज्ञान का इतना प्रकाश हो तो बिजली की जरूरत क्या है।

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