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कांग्रेस: विरोध ‘गांधी’ तक सीमित क्यों

एस.के. सिंह
विरोध पर बवालः कांग्रेस मुख्यालय के बाहर पुलिस और कार्यकर्ताओं में धक्का मुक्की
विरोध पर बवालः कांग्रेस मुख्यालय के बाहर पुलिस और कार्यकर्ताओं में धक्का मुक्की

एस.के. सिंह
सोनिया-राहुल पर ईडी की कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस आम लोगों के मुद्दों पर यह जोश क्यों नहीं दिखाती

अरसे बाद हुआ कि कांग्रेस पार्टी इस तरह सड़कों पर उतरी। युवा नेता श्रीनिवास बी.वी. से लेकर वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम तक, सांसद-विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक सड़क पर दिखे। बेशक यह विरोध प्रदर्शन महंगाई या बेरोजगारी जैसे आमजन के मुद्दों पर नहीं, बल्कि पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी और पूर्व प्रमुख राहुल गांधी से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ के खिलाफ था। ईडी के अधिकारी राहुल से चार दिन (20 जून तक) पूछताछ कर चुके हैं। सोनिया से 23 जून को पूछताछ होने की संभावना है। यह पहला मौका होगा जब कांग्रेस के किसी अध्यक्ष से कोई एजेंसी पूछताछ करेगी। पूछताछ नेशनल हेराल्ड के शेयर ट्रांसफर के सिलसिले में हो रही है। नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशन करने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) के शेयर यंग इंडियन नाम की कंपनी ने खरीदे थे, जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी है। भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने 2013 में इस मामले में मनीलॉन्ड्रिंग का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी। उसकी सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट ने आयकर विभाग को जांच करने और टैक्स असेसमेंट की अनुमति दी। सोनिया और राहुल को 19 दिसंबर 2015 को इस मामले में जमानत मिली थी। इन दोनों से पहले अप्रैल में ईडी पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और पवन बंसल से पूछताछ कर चुकी है। खड़गे और बंसल यंग इंडियन और एजेएल में पदाधिकारी रहे। बंसल अभी पार्टी के ट्रेजरर हैं।

कांग्रेस ईडी की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बता रही है। उसका आरोप है कि केंद्र की भाजपा सरकार बदले की भावना के तहत यह सब कर रही है, क्योंकि एकमात्र राहुल ही हैं जो मोदी सरकार के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं। उसका यह भी कहना है कि महंगाई, विकास दर में गिरावट और लोगों के बीच फैले असंतोष से ध्यान हटाने के लिए केंद्र सरकार ऐसा कर रही है। ईडी की कार्रवाई का विरोध करने कई राज्यों से कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे। पूछताछ के पहले दिन, 13 जून को दिल्ली पुलिस ने 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय की घेराबंदी कर दी और पार्टी कार्यकर्ताओं को वहां जाने से रोक दिया। पुलिस के साथ झड़प में कई नेता घायल भी हुए। पूछताछ के तीसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस पार्टी मुख्यालय में जबरन घुस गई, कार्यकर्ताओं को पीटा और उन्हें हिरासत में ले लिया। श्रीनिवास बी.वी. को घसीट कर ले जाते एक वीडियो भी वायरल हुआ जिसमें एक पुलिसकर्मी को उन्हें बूट मारते देखा जा सकता है।

राहुल-सोनिया की खातिर

पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने पुलिस कार्रवाई को गुंडागर्दी बताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा, “जो पुलिस अधिकारी मोदी सरकार की कठपुतली बनकर काम कर रहे हैं उन्हें जान लेना चाहिए कि इसे याद रखा जाएगा।” हालांकि पुलिस ने कांग्रेस मुख्यालय में घुसने से इनकार किया है। उसका कहना है कि मुख्यालय के आसपास धारा 144 लगाई गई थी। अगर पार्टी पहले से प्रदर्शन की जानकारी दे और प्रदर्शन करने वालों की सूची दे तो इससे ट्रैफिक की समस्या से निपटने में आसानी होगी।

इस बीच मीडिया में खबर आई कि राहुल ने पूछताछ में एजेएल के अधिग्रहण में हुए लेनदेन के लिए मोतीलाल वोरा का नाम लिया। वोरा का दिसंबर 2020 में निधन हो चुका है। पार्टी ने पूछताछ की कार्रवाई लीक करने के लिए ईडी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पार्टी की लीगल सेल के प्रमुख और सांसद विवेक तनखा ने गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कानून मंत्री किरण रिजिजू को नोटिस भेजा। तनखा ने कहा, “यह स्पष्ट है कि ईडी अपने राजनीतिक आकाओं के निर्देश पर काम कर रही है, इसलिए वित्त मंत्री, कानून मंत्री और गृह मंत्री को नोटिस भेजना ज्यादा उचित है।” लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर हस्तक्षेप का आग्रह किया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, “ईडी ऑफिस में कैमरा लगा दीजिए, सभी मीडिया हाउस को लिंक दे दीजिए। देश को भी पता चले कि ईडी के सवाल क्या हैं और राहुल गांधी के जवाब।”

विपक्षी दलों ने भी ईडी की कार्रवाई की आलोचना की है। ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति चुनाव के सिलसिले में 15 जून को दिल्ली में विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक बुलाई, तो उस बैठक में उन्होंने ईडी की कार्रवाई की निंदा की। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, “ईडी का मतलब अब ‘एग्जामिनेशन इन डेमोक्रेसी’ बन गया है। राजनीति में विपक्ष को यह परीक्षा पास करनी होती है। जब सरकार फेल हो जाती है तब वह इस परीक्षा की घोषणा करती है।” महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ गठबंधन सरकार में शामिल शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा, “भाजपा न सिर्फ पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की यादें मिटा देना चाहती है बल्कि वह नेहरू-गांधी वंश की संभावनाओं को भी धूमिल कर देना चाहती है। भाजपा यह दिखाना चाहती है कि वह किसी का भी गिरेबान पकड़ सकती है। यह सत्ता का अहंकार है... अब विपक्ष को मिटाने के लिए हिटलर की तरह गैस चैंबर बनाना बाकी रह गया है।”

नतीजे का इंतजारः ईडी कार्यालय जाने से पहले प्रियंका गांधी वाड्रा, के.सी. वेणुगोपाल, अशोक गहलोत और भूपेश बघेल के साथ राहुल गांधी

नतीजे का इंतजारः ईडी कार्यालय जाने से पहले प्रियंका गांधी वाड्रा, के.सी. वेणुगोपाल, अशोक गहलोत और भूपेश बघेल के साथ राहुल गांधी

कांग्रेस की दलील है कि यंग इंडियन ने एजेएल का अधिग्रहण जरूर किया, लेकिन इससे इसके शेयरधारकों को एक रुपये का भी फायदा नहीं हुआ। ऐसे में मनीलॉन्ड्रिंग का आरोप पूरी तरह गलत है। पार्टी के नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “एजेएल वित्तीय संकट में आ गई थी तो कांग्रेस ने हस्तक्षेप का फैसला किया और कुछ वर्षों में उसे 90 करोड़ रुपये की मदद की।” पार्टी ने सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण जारी किया कि घाटे में चल रहे नेशनल हेराल्ड की देनदारियों के भुगतान के लिए 2002 से 2011 के बीच एक सौ किस्तों में 90 करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया। सिंघवी के मुताबिक एजीएल ने वही किया जो कर्ज में डूबी कंपनियां करती हैं। उसने कर्ज को इक्विटी में बदला जिसे यंग इंडियन ने खरीदा। यंग इंडियन एक नॉन-प्रॉफिट संगठन है इसलिए इसके शेयरधारकों या डायरेक्टर को इससे कोई कमाई नहीं होती है।

कांग्रेस के प्रदर्शन पर राजनीतिक विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि पार्टी तभी क्यों जागृत हुई जब उसके शीर्ष नेता के साथ पूछताछ हो रही है। निचले स्तर के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई होने पर इस तरह का विरोध कभी नहीं दिखा। महंगाई, बेरोजगारी और बुलडोजर जैसे मुद्दों पर भी पार्टी को समान रूप से प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस की जो तस्वीरें सामने आई हैं वह भी विचलित करने वाली हैं। लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन नागरिक का हक है। लेकिन मौजूदा सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों और उसकी नीतियों के खिलाफ बोलने वालों के साथ जो रवैया अपना रही है उससे सत्तारूढ़ दल की असहिष्णुता का ही पता चलता है। विपक्ष और विरोध मुक्त भारत कतई लोकतांत्रिक नहीं हो सकता है।

क्या है नेशनल हेराल्ड मामला

नेशनल हेराल्ड हाउस

नेहरू ने 1938 में नेशनल हेराल्ड की स्थापना की थी। इसका प्रकाशन एजेएल करती थी जिसके पास दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, पटना, पंचकूला में प्रमुख जगहों पर संपत्ति है। लगातार घाटे में रहने के बाद अप्रैल 2008 में एजेएल ने प्रकाशन बंद कर दिया। इस बीच ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआइसीसी) ने एजेएल को 2010 तक ब्याज मुक्त कर्ज दिया। दिसंबर 2010 तक यह कर्ज 90 करोड़ से अधिक हो गया। आयकर विभाग का कहना है कि एजेएल की प्रॉपर्टी की कीमत 413 करोड़ रुपये थी, फिर भी उसके प्रबंधन ने कांग्रेस को कर्ज लौटाने का कोई प्रयास नहीं किया।

कंपनी कानून की धारा 25 के तहत 23 नवंबर 2010 को यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का गठन हुआ। सुमन दुबे और सैम पित्रोदा इसके डायरेक्टर थे। गठन के तत्काल बाद दोनों ने अपने शेयर सोनिया-राहुल के अलावा कांग्रेस नेता ऑस्कर फर्नांडिस और मोतीलाल वोरा को ट्रांसफर कर दिए। सोनिया-राहुल के पास कंपनी के 38-38 फीसदी और फर्नांडिस-वोरा के पास 12-12 फीसदी शेयर थे। उसके बाद यंग इंडियन ने इनकम टैक्स कानून की धारा 12ए के तहत चैरिटेबल संस्था के रूप में रजिस्ट्रेशन कराया। इससे उसे टैक्स भुगतान से छूट मिल गई।

एआइसीसी ने एजेएल का कर्ज इक्विटी में बदलकर यंग इंडियन को आवंटित करने का फैसला किया। कांग्रेस ने अपना कर्ज यंग इंडियन को सिर्फ 50 लाख रुपये में ट्रांसफर कर दिया। यंग इंडियन का गठन सिर्फ पांच लाख रुपये की पूंजी से किया गया था। उसके पास एजीएल के अधिग्रहण के लिए 50 लाख रुपये नहीं थे, तो उसने कोलकाता की डॉटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से एक करोड़ रुपये का कर्ज लिया। वित्त मंत्रालय की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट ने इस लोन को भी संदिग्ध लेन-देन माना है।

आयकर विभाग ने कांग्रेस की तरफ से एजेएल को दिए गए लोन पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि एजेएल के खातों के अलावा और कहीं इसका जिक्र नहीं है। सवाल हितों के टकराव को लेकर भी है क्योंकि वोरा उस समय एआइसीसी ट्रेजरर होने के साथ एजेएल के सीएमडी और यंग इंडियन के शेयरधारक और डायरेक्टर भी थे।

आयकर विभाग ने बतौर यंग इंडियन डायरेक्टर सूचनाएं छिपाने के आरोप में राहुल गांधी को नोटिस भेजा। विभाग का कहना है कि राहुल के पास जो शेयर हैं उसके हिसाब से उनकी आय 154 करोड़ रुपये बनती है, जबकि टैक्स आकलन में उन्होंने बहुत कम आमदनी दिखाई। ऐसा ही नोटिस सोनिया और फर्नांडिस को भी भेजा गया। तीनों ने सेक्शन 25 की कंपनी का हवाला देते हुए कहा कि इससे डायरेक्टरों को कोई कमाई नहीं होती है। बाद में आयकर विभाग ने 26 अक्टूबर 2017 को धारा 12ए के तहत यंग इंडियन का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। आधार यह बनाया गया कि यह ऐसा कोई काम नहीं कर रही जिसे चैरिटेबल कहा जाए। इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल ने इस फैसले को बरकरार रखा।

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