कविता की चुनौती

नीरज कुमार मिश्र
इसी से बचा जीवन
इसी से बचा जीवन

नीरज कुमार मिश्र
आज बाजार के बढ़ते प्रभाव ने ऐसी दुनिया को रचा है, जिसकी चकाचौंध ने कविता में आई मां को अकेला कर दिया है
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