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क्या कोई शोक था

पुस्तक समीक्षा
पुस्तक समीक्षा

समकालीन भारतीय कविता की महत्त्वपूर्ण उपस्थिति अशोक वाजपेयी की शहर अब भी संभावना है से लेकर कम से कम कविता संग्रह तक की कविताएं अपने विस्तृत परिसर और मानवीय स्पर्श के लिए हमेशा याद रखी जाएंगी। ये न हारे हुए जीवन की कविताएं हैं और न झटके में सबकुछ बदल देने की हनक में लिखी कविताएं हैं। कम से कम संग्रह की शीर्षक कविता में जब वे कहते हैं, ‘उम्मीद के पास/कम से कम एक घर तो होना चाहिए/ हमारे अंधेरे के मुहल्ले में न हो/ चकाचौंध की दमकती कालोनी में भी न सही/कहीं तो/’ तब लगता है यह सकारात्मक सोच और मनुष्यता को सही दिशा में ले चलने का आग्रह है। एक पाठक के रूप में हमें उसे समझने की कोशिश करने की जरूरत महसूस होती है। सोलह-सत्रह की उम्र से लगातार लिखता कवि ईंट-गारे के घर या मांसल प्रतीकों में अपने अस्तित्व के विलयन को स्वीकार नहीं कर पाता। अशोक वाजपेयी के उम्मीद का घर की कुछ पंक्तियों को देखें, ‘उम्मीद का ऐसा घर अभी वक्त है/ थोड़ी-सी मुहलत की हिम्मत और मेहनत कर/ हम बना लें। कहीं और नहीं तो कविता में ही सही/एक अक्षर घर जिसे फिर ढहाया न जा सकेगा।’

लेकिन जब वर्तमान समय में बुद्ध, महावीर और गांधी की धरती पर सत्ता जनता की रहनुमाई की जगह औद्योगिक घराने के साथ जा खड़ी हो, तब अशोक वाजपेयी जैसे संवेदनशील कवि का यह कहना जायज है, “कविता से दुनिया को समझने, सहने, उसमें शिरकत करने, उसे थोड़ा ही सही, बदलने की कोशिश की कुल मिलाकर नाकामी सामने है।” इसके बावजूद वे ऐसे समय में ‘यह समय इनकार का है’ शीर्षक कविता में नायक बनने की जगह कवि बने रहना पसंद करते हैं। यहां एक पंक्ति की भी कई कविताएं हैं। जैसे, ‘हमने ईश्वर नहीं देखा/फिर भी हम एक-दूसरे पर इतना भरोसा करते हैं।’ ‘अधेड़ आंखें, झुर्रियों भरा माथा- हम हर दिन नया-युवा संसार देखते हैं।’ या बेहतर भविष्य निहारती इस पंक्ति को देखें- ‘चकाचौंध रोशनी नहीं है: रात अंधेरा नहीं है।’

‘सब कुछ’, ‘पृथ्वी पर उम्मीद कम हो रही है’, ‘कहां खोजें उम्मीद’, ‘थोड़ी-सी बचाकर’ और ‘हुआ यह है,’ ये तीनों कविताएं वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक वातावरण का प्रतिरोध रचती हैं। वहीं, ‘अभी बन रहा है’ जैसी कविता आशा का संचार करती है।

एक ऐसे परिदृश्य में जब सच लहूलुहान नजर आ रहा हो, तो अशोक वाजपेयी की कविताएं बेहतर भविष्य की संभावना और जीने का संबल प्रदान करती हैं। कविता युवा पाठक और कवि को आज की स्थिति में प्रतिरोध की जरूरत और सुंदर संसार की ओर लौटने की प्रेरणा देती है।

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