देश बचाएं या कैश

आलोक पुराणिक
विरोध की राजनीति
विरोध की राजनीति

आलोक पुराणिक
चीन सीमाओं और अर्थव्यवस्थाओं में इस कदर इतने अंदर तक घुस आता है कि बाद में पता चलता है कि जो मारिस गैरेज ब्रांड है, यह कोई पश्चिमी नहीं बल्कि चाइनीज ब्रांड है

उनने अपने चाइनीज फोन से दोस्त के चाइनीज फोन पर एक देशभक्तिपूर्ण मैसेज भेजा। जिसका आशय था, “पाकिस्तान को उड़ा देना है, खत्म कर देना है, राख कर देना है, तबाह कर देना है।” यह देशभक्ति आगे बढ़ी और करीब सत्तर भारतीयों के चाइनीज फोनों पर प्रसारित हो गई।

‘मेरा जूता है जापानी, ये पतलून इंगलिस्तानी, सिर पर लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’ वाले गीत के दिन पुराने हो गए। अब ‘तेरा भी चाइनीज, मेरा भी चाइनीज, दोनों का चाइनीज’, ‘सिर्फ दिल है इंडियन, मोबाइल है चाइनीज’ इस किस्म के गीत के दिन आ गए हैं। मुल्क में दस में सात स्मार्ट फोन चाइनीज हैं। महान कलाकार अमिताभ बच्चन चाइनीज ब्रांड वन प्लस के ब्रांड एंबेसडर हैं। महान एक्टर आमिर खान चाइनीज ब्रांड वाईवो बेच रहे हैं। आमिर खान तो अपनी फिल्में चीन में धुआंधार बेच रहे हैं।

एक पाकिस्तानी ने मुझसे पूछा, “तुम इंडियन लोग सारी देशभक्ति लेकर सिर्फ पाकिस्तान पर ही हमला क्यों करते हो।”

मैंने कहा, क्योंकि पाकिस्तान पैदाइशी बदमाश है। वह सुधरने वाला नहीं है, तब तक, जब तक उसके पांच-सात टुकड़े न हो जाएं। फिर ये टुकड़े आपस में ही लड़ा करेंगे, भारत को पाकिस्तान नामक राक्षस से छुटकारा मिल जाएगा।

पाकिस्तानी ने पलटकर जवाब दिया, “प्यारे तुम पाकिस्तान को गलत समझ रहे हो। पाकिस्तान अब लगभग चाइना है। कुछ दिनों बाद पूरा चाइना हो जाएगा। अब पाकिस्तान में पाकिस्तान उतना ही बचा हुआ है, जितना इमरान खान के बयानों में ईमान बचा है, जितना हाफिज सईद और मसूद अजहर में शराफत बची हुई है, जितनी पाक आर्मी में प्रोफेशनल आर्मी बची हुई है। पाकिस्तान चाइनीज हो रहा है।”

पाकिस्तान का कैरेक्टर शुरू से चाइनीज रहा है। एकदम फर्जी, एकदम नकली टाइप। चरित्र क्या पूरा का पूरा पाकिस्तान ही चाइनीज होता जा रहा है। पाकिस्तान के समझदार लोग कह रहे हैं कि पाकिस्तान में चीन के उद्योग धंधे लग रहे हैं। चीनी कारोबारी पाकिस्तान में जमीन खरीद रहे हैं। चीनियों के कब्जे पाक बंदरगाहों पर हो रहे हैं। पाकिस्तानी आतंकियों को बचाने का जिम्मा चीन ने ले लिया है। पाक पर चीन का कब्जा पूरा हो रहा है। पाकिस्तान के जानकार मानते हैं कि चीनी लोग पाकिस्तान में लग्जरी कारों में चलेंगे और अपने पंक्चरलेस टायरों में पंक्चर लगाने का काम पाकिस्तानियों से कराएंगे, ‘इमरान पंक्चर रोजगार योजना।’ पाकिस्तान ने अपने नौजवानों को कुछ करने के काबिल छोड़ा ही नहीं है। पाकिस्तानी नौजवान पंक्चरलेस टायरों के पंक्चर ठीक करके पंक्चर मुक्त टायर करने का श्रेय जरूर ले सकते हैं। पाकिस्तान तो चाइना हो ही जाएगा। मसला यह है कि हम कितने चीनी हुए जा रहे हैं।

भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने टीम की जो आधिकारिक ड्रेस डिजाइन की है, उसमें ओप्पो दर्ज है। ओप्पो चाइना का मोबाइल ब्रांड है। आइपीएल क्रिकेट टूर्नामेंट का स्पांसर वाईवो ब्रांड है, जिसे आमिर खान भी बेचते हैं। चाइना भारतीय क्रिकेटरों की छाती पर जम गया है, हम उसे सिर्फ डोकलाम से धकेल पाए। चाइना क्रिकेट को स्पांसर कर रहा है जबकि चाइना में क्रिकेट नहीं खेला जाता। चाइना इन दिनों सिर्फ एक खेल खेल रहा है, कब्जा, कब्जा और कब्जा। छोटी अर्थव्यवस्थाओं पर कब्जा, बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बाजार पर कब्जा। मिकिन्सी के मुताबिक, 2025 तक अफ्रीका में चीनी फर्मों की आय 440 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी। यानी अभी की पाक अर्थव्यवस्था के हिसाब से बड़ा रेवेन्यू चीनी फर्में अफ्रीका में खड़ा कर चुकी होंगी। इन दिनों टेलीविजन चैनलों पर एक इश्तिहार आ रहा है, मारिस गैरेज का। नाम से कोई पश्चिमी ब्रांड लगता है। पर इसका ताल्लुक चीन की एसएआइसी कंपनी से है। चीनी कंपनियां दुनिया भर में अपने पैर जमाने के लिए अपनी पहचान भी छिपा जाती हैं। भारत में चीन के कुछ महत्वपूर्ण निवेशों में पेटीएम है। पेटीएम का चीनी ब्रांड अलीबाबा से गहरा ताल्लुक है।

चीन सीमाओं और अर्थव्यवस्थाओं में इस कदर इतने अंदर तक घुस आता है कि बाद में पता चलता है कि जो मारिस गैरेज ब्रांड है, यह कोई पश्चिमी नहीं बल्कि चाइनीज ब्रांड है।

मसले पेचीदा हैं। भारतीय वैज्ञानिक मंगलयान बना लेते हैं, पर भारतीय उद्योगपति सस्ते और कई फीचर वाले मोबाइल नहीं बना पाते। मोबाइल बनाना मंगलयान बनाने से ज्यादा मुश्किल काम है शायद। तभी भारत में मोबाइल नहीं बन पा रहे हैं। भारत में कितना ‘मेक इन इंडिया’ चल रहा है, यह शोध का विषय है, पर भारत में मेक बाय चाइना, सेल बाय चाइना धुआंधार चल रहा है।

खैर, बुजुर्गों की बात टालना भी बुरी बात है। अमिताभ बच्चन जैसे बुजुर्गवार कह रहे हैं कि चाइनीज ब्रांड लो, तो बताओ क्या करें। यह सवाल बहुत टेढ़ा है। देश बचाएं या कैश बचाएं। किसी चाइनीज मोबाइलधारी से बात करो, तो पूछता है कि ऐसे फोन भारतीय उद्योगपति क्यों नहीं बना पाते। इस सवाल का जवाब मेरे पास तो नहीं है। आपके पास हो तो बताइए। यह भी बताइए, कैश के ऊपर देश को किस विधि से रखा जा सकता है।

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