किसान, तुम समझते नहीं हो

राजेंद्र धोड़पकर
किसानों की फिक्र कैसी
किसानों की फिक्र कैसी
राजेंद्र धोड़पकर

राजेंद्र धोड़पकर
वास्तव में किसानों की समस्या यह है कि वे बहुत बुनियादी और उपयोगी काम करते हैं, यह पिछड़े अर्थशास्‍त्र का भी पिछड़ा हुआ संस्करण है

दिल्ली में किसानों का मार्च आया और चला गया। थोड़ी बहुत खबरें उसकी छप ही रही थीं कि अयोध्या में राम मंदिर का फिर से हल्ला हुआ और मेरठ में गोहत्या के नाम पर इंसानों की हत्या हो गई। प्रियंका चोपड़ा की शादी भी इसी बीच हो गई। किसानों का क्या हुआ पता नहीं चला।

किसानों की एक बड़ी मांग फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की है। किसानों को यह मालूम होना चाहिए कि उनका अपना न्यूनतम समर्थन मूल्य घट गया है। किसानों का समर्थन मूल्य बढ़ाने के लिए कोई स्वामीनाथन आयोग भी नहीं है। दरअसल किसानों को अब आधुनिक होना पड़ेगा। किसान का अब कोई खालिस समर्थन मूल्य नहीं है। उसका प्रसंस्करण होकर जब वह प्रसंस्कृत किसान बनेगा तब उसे न्यूनतम क्या, अधिकतम समर्थन मूल्य भी मिल सकता है। भारत में जाति और धर्म के अलावा आजकल किसी का समर्थन मूल्य नहीं है। अगर किसान हिंदू किसान, यादव किसान, कुर्मी किसान, कोयरी किसान, कम्मा किसान, वोक्कलिगा किसान की पैकिंग में मार्केट में आएगा तो उसके खरीदार मिल जाएंगे।

किसानों की दूसरी मांग यह है कि वे कर्जमाफी चाहते हैं। कर्जमाफी की मांग यह बताती है कि किसान अर्थशास्‍त्र नहीं जानते। वे खेती करते हैं इसी से जाहिर होता है कि वे अर्थशास्‍त्र नहीं जानते। जो भी अर्थशास्‍त्र से वाकिफ होता है वह खेती करने जैसा काम नहीं कर सकता। वह जानता है कि ऐसी बहुत सी चीजें हैं जिन्हें उगाने के लिए जमीन, खाद, पानी, बीज जैसी चीजों की जरूरत नहीं है न ही इतनी मेहनत की जरूरत है। वे बिना मेहनत हवा में उगाई जा सकती हैं और वे चीजें ही इन दिनों वास्तव में मुनाफा देती हैं। वे कौन सी चीजें हैं और उन्हें कैसे उगाया जाता है यह मैं भी नहीं जानता, वरना मैं यहां बैठ कर लेख नहीं लिख रहा होता, लोग मेरे बारे में लेख लिख रहे होते। लेकिन ऐसी चीजें हैं यह मैं जानता हूं।

वास्तव में किसानों की समस्या यह है कि वे बहुत बुनियादी और उपयोगी काम करते हैं। वे अनाज और अन्य ऐसी चीजें उगाते हैं जो लोग खाते हैं। यह पिछड़े अर्थशास्‍त्र का भी पिछड़ा हुआ संस्करण है। ऐसा काम करने वालों को कर्ज मिल जाता है यही गनीमत है और ऊपर से किसान कर्जमाफी चाहते हैं। यह तो ज्यादती है। अगर वे हवा से पैसे न बना सकें तो कम से कम हीरे का कारोबार करें या एयरलाइंस चलाएं। वे ग्लैमरस कैलेंडर छापें तो भी उन्हें कर्ज मिल जाएगा और उसे चुकाना भी नहीं पड़ेगा।

किसान इतना गैरजरूरी और पिछड़ा हुआ काम करते हैं तब भी हमारी माई बाप सरकार दयालु है, उसे किसानों की फिक्र है। इसीलिए वह किसानों के कल्याण के लिए काम कर रही है और उसने घोषणा की है कि वह सन 2022 तक किसानों की आय दोगुनी कर देगी। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि यह कैसे होगा, लेकिन सरकार के पास इसके लिए एक ठोस योजना है। वह केंद्रीय सांख्यिकी संगठन और नीति आयोग के जरिए किसानों की आय बैक डेट में आधी कर देगी। उसके बाद सन 2022 आते ही उसे दोगुनी यानी आज के स्तर पर ले आएगी। सरकार का भी फायदा और किसानों का भी फायदा। इसलिए अच्छा हो, किसान लौट जाएं और राम मंदिर और गाय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों में ध्यान लगाएं।

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