Advertisement

खुशहाल किसानी की नई लीक

खेती को फायदे का सौदा बनाने के लिए किसानों और उपभोक्ताओं के बीच बनाया पुल
जितेंद्र यादव

तीस वर्षीय जितेंद्र यादव का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में एक सामान्य किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने किसानों का दुख-दर्द करीब से देखा था। इसलिए, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी कर कॉरपोरेट कंपनियों में काम करने का रास्ता नहीं चुना। वे खेती को फायदे का सौदा बनाने की राह पर निकल पड़े।

इस कड़ी में सबसे पहले महिला किसानों के 50 ग्रुप तैयार कर अप्रैल 2016 में फार्मर्स प्रोड्यूसर्स ऑर्गेनाइजेशन की शुरुआत की। पूंजी जुटाने के लिए तय किया कि हरेक ग्रुप 10-10 हजार रुपये कंपनी को देगा। कंपनी किसानों को खुद से खाद और बीज तैयार करने की ट्रेनिंग देती है, उन्हें ऑर्गेनिक खेती के लिए प्रोत्साहित करती है। फिलहाल, यूपी के कानपुर, चंदौली, फतेहपुर, भदोही और बाराबंकी जिले में ये कंपनियां काम कर रही हैं। 50 गांवों में इन कंपनियों के सीड बैंक हैं। इन कंपनियों के माध्यम से 1,200 किसान परिवारों की महिलाओं को जोड़कर उन्हें ऑर्गेनिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया है। बीते वित्त वर्ष में कंपनी का टर्नओवर 60 लाख रुपये था।

इन सभी कंपनियों के शेयर होल्डर केवल किसान हो सकते हैं। हर कंपनी में चार-चार कर्मचारी रखे गए हैं। कंपनियों में पांच महिला किसान डायरेक्टर हैं और पांच महिला किसान प्रमोटर हैं। जितेंद्र सभी कंपनियों के सलाहकार हैं। किसानों को खुशहाल बनाने की जितेंद्र की इस मुहिम में राणा सिंह और रवींद्र द्विवेदी की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। राणा महिला किसानों को ट्रेनिंग देते हैं तो रवींद्र उन्हें नेटवर्क से जोड़ते हैं।

जितेंद्र ने फार्मर्स प्रोड्यूसर्स के बाद एकता नेचर प्रोड्यूसर और चेतना नेचर फार्मिंग प्रोड्यूसर नाम से किसानों की दो और कंपनियों की शुरुआत करवाई। इस साल अप्रैल में एक और कंपनी एक्या आर्गेनिक्स प्राइवेट लिमिटेड शुरू की गई है। धानिका नाम से यह कंपनी बाजार में 20 उत्पाद लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। जितेंद्र ने बताया कि महिला किसानों को उनकी उपज के लिए बाजार मुहैया कराने के मकसद से यह योजना बनाई गई है।

उन्होंने बताया कि महिला किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए एक्या की शुरुआत की गई है। हमारी कोशिश है कि हम अपने टार्गेट एरिया में एक हजार परिवारों का सब्सक्रिप्शन बायर तैयार करें और उनकी जरूरतों के मुताबिक उपज तैयार करें। इससे किसान सीधे उपभोक्ता से जुड़ जाएगा और किसान तथा उपभोक्ता दोनों को लाभ मिलेगा। आने वाले वक्त में कंपनी की योजना प्रासेसिंग यूनिट से लेकर स्टोर तक खोलने की है। फिलहाल, कंपनी के पास 20 से ज्यादा उत्पाद हैं और बाजार दर से कम कीमत में वह ऑर्गेनिक प्रोडक्ट उपलब्ध करा रही है। जितेंद्र ने बताया कि जीरो बजट खेती की उनकी बात पर शुरुआत में लोग यकीन नहीं करते थे।  

Advertisement
Advertisement
Advertisement