Home खेल क्रिकेट मैच फिक्सिंग के आरोपी संजीव चावला को यूके से लाया गया भारत, खुल सकते हैं कई राज

मैच फिक्सिंग के आरोपी संजीव चावला को यूके से लाया गया भारत, खुल सकते हैं कई राज

आउटलुक टीम - FEB 13 , 2020
मैच फिक्सिंग के आरोपी संजीव चावला को यूके से लाया गया भारत, खुल सकते हैं कई राज
मैच फिक्सिंग के आरोपी संजीव चावला को यूके से लाया गया भारत, खुल सकते हैं कई राज
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आउटलुक टीम

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा गुरुवार को भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक संजीव चावला को आखिरकार यूके से भारत ले आई। वह दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान हैंसी क्रोनिए के साथ सन 2000 के मैच फिक्सिंग मामले में कथित मुख्य आरोपी है। माना जा रहा है कि उसके भारत आने के बाद मैच फिक्सिंग के कई राज खुल सकते हैं। चावला का प्रत्यर्पण 1992 की भारत-ब्रिटेन प्रत्यर्पण संधि के तहत अपनी तरह का पहला हाई-प्रोफाइल मामला है।

दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि ब्रिटेन का 50 वर्षीय नागरिक चावला सुबह आईजीआई हवाई अड्डे पहुंचा। उसके साथ लंदन से अपराध शाखा के अधिकारियों की एक टीम थी। मेडिकल जांच और औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद अपराध शाखा पुलिस चावला से आरके पुरम कार्यालय में पूछताछ करेगी।

मैच फिक्सिंग में अहम भूमिका निभाने का आरोप

चावला पर आरोप है कि हैंसी क्रोनिए के साथ साउथ अफ्रीका के दौरे के दौरान मैच फिक्सिंग में अहम भूमिका निभाई थी। पिछले महीने यूके में हाईकोर्ट ने संजीव चावला की याचिका को खारिज करते हुए प्रत्यपर्ण का आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि संजीव चावला की याचिका को अस्वीकार किया जाता है। भारत-इंग्लैंड प्रत्यर्पण संधि के तहत उसे भारत भेजा जाए। साथ ही हाईकोर्ट ने भारत सरकार से कहा कि उसे स्पेशल सेल में रखा जाए जहां उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य का बेहतर ख्याल रखा जा सके। इस पर भारत सरकार की तरफ से पेश वकील ने कहा कि उसकी इस मांग को सरकार गंभीरता से लेगी और उसे किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचेगा।

कोर्ट से नहीं मिली राहत

चावला दिल्ली का एक कारोबारी था जो 1996 में बिजनस वीजा पर लंदन पहुंचा था। 2000 में उसका भारतीय पासपोर्ट रद्द कर दिया गया। 2005 में उसे यूके का पासपोर्ट मिल गया और वह अब ब्रिटिश नागरिक है। 2016 में संजीव चावला को लंदन में गिरफ्तार कर लिया गया था लेकिन वहां उसने कोर्ट में अपील कर दी। पिछले महीने उसने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कोर्ट में भी अपील की लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली।

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