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भारत में महिलाएं उतनी आजाद नहीं, जितना वो होने की कल्पना करती हैं: अलंकृता

भारत में महिलाएं उतनी आजाद नहीं, जितना वो होने की कल्पना करती हैं: अलंकृता

फिल्म निर्देशक अलंकृता श्रीवास्तव का मानना है कि भारत का सेंसर बोर्ड दरअसल देश के नागरिकों का प्रतिनिधित्व ही नहीं करता है। इसलिए फिल्मकारों को अपनी तीखी कहानियों को बयां करने के लिए कठोर रुख अपनाना होगा। उन्होंने अपनी ‘लिपस्टिक अंडर माई बुरका’ को लेकर उठे विवाद के बाद कहा, भारत में महिलाएं उतनी आजाद नहीं हैं जितना कि वो होने की कल्पना करती हैं।
मियां-बीवी के झगड़े में वोट बैंक बना रही है भाजपा: गुलाम नबी आजाद

मियां-बीवी के झगड़े में वोट बैंक बना रही है भाजपा: गुलाम नबी आजाद

विपक्ष ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी फायदे के लिए तीन तलाक के मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश में भाजपा के एक मंत्री ने कहा कि मुस्लिम लोग अपनी हवस मिटाने के वास्ते बीवियां बदलने के लिए तीन तलाक का इस्तेमाल करते हैं।
जम्मू-कश्मीर: पत्थरबाजी रोकने बढ़ाई जाएगी महिला पुलिसकर्मियों की संख्या

जम्मू-कश्मीर: पत्थरबाजी रोकने बढ़ाई जाएगी महिला पुलिसकर्मियों की संख्या

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबल के जवानों पर पथराव की घटनाओं को रोकने के लिए रणनीति बननी शुरू हो गई है। इसके तहत पहले सोशल साइटों को बंद कर इन घटनाओं को रोकने की कोशिश की गई। अब सरकार जम्मू-कश्मीर में तैनाती के लिए 1000 महिला पुलिसकर्मियों की भर्ती करने जा रही है।
खोखले साबित हुए दावे, नहीं घटा सबसे भारी महिला का वजन

खोखले साबित हुए दावे, नहीं घटा सबसे भारी महिला का वजन

दुनिया की सबसे वजनी महिला इमान अहमद की बहन सायमा सेलिम ने डॉक्टर पर आरोप लगाया है कि उनकी बहन का ठीक से इलाज नहीं किया गया। गौरतलब है कि वजन घटाने और इलाज कराने के उद्देश्य से वे अपनी बहन को मिस्र से भारत लेकर आई हैं।
मुस्लिम से शादी करने वाली हिन्दू महिला पर भी लागू रहेगा तीन तलाक

मुस्लिम से शादी करने वाली हिन्दू महिला पर भी लागू रहेगा तीन तलाक

दिल्ली हाईकोर्ट ने आज मुस्लिमों से शादी करने वाली हिन्दू महिलाओं पर तीन तलाक लागू होने पर रोक की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि सभी महिलाओं को कानून के तहत समान सुरक्षा पाने का हक है।
भारत में 95 प्रतिशत इंजीनियर साफ्टवेयर विकास कार्य के लायक नहीं

भारत में 95 प्रतिशत इंजीनियर साफ्टवेयर विकास कार्य के लायक नहीं

एक सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि भारत में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके निकलने वाले 95 प्रतिशत इंजीनियर साफ्टवेयर विकास कार्य करने लायक नहीं होते हैं। सर्वेक्षण देश के आईटी व डेटा विज्ञान परिदृश्य में प्रतिभाओं की भारी कमी की ओर संकेत करता है।
मानसून सत्र में पेश होगा खेल विधेयक: गोयल

मानसून सत्र में पेश होगा खेल विधेयक: गोयल

काफी समय से लंबित पड़ा राष्ट्रीय खेल विकास विधेयक मानसून सत्र में संसद में पेश होगा और खेलमंत्री विजय गोयल ने चेताया है कि इसका पालन नहीं करने पर राष्ट्रीय खेल महासंघों को सरकार से कुछ नहीं मिलेगा।
भारत ने महिला हाकी विश्व लीग का दूसरा दौर जीता

भारत ने महिला हाकी विश्व लीग का दूसरा दौर जीता

भारत ने वेस्ट वैंकुवर में चिली को रोमांचक फाइनल मुकाबले में शूटआउट में हराकर महिला हाकी विश्व लीग के दूसरे दौर में जीत दर्ज की और विश्व लीग सेमीफाइनल के लिये क्वालीफाई किया।
सशक्तिकरण: देश के चार बड़े न्यायालयों में अब महिलाएं मुख्य न्यायाधीश

सशक्तिकरण: देश के चार बड़े न्यायालयों में अब महिलाएं मुख्य न्यायाधीश

देश के चार बड़े और प्रमुख न्यायलयों में ऐसा पहली बार हुआ है जब मुख्य न्यायाधीश के पद पर महिलाएं काबिज हुई हैं। देश के चार बड़े हाईकोर्ट में बॉम्बे, मद्रास, कलकत्ता और दिल्ली शामिल हैं। 31 मार्च को इंदिरा बनर्जी के मद्रास हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस बनते ही न्यायिेक सेवा में यह एक नया इतिहास बन गया है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष - मलावी की रंजकहीनता विकास को एक चुनौती

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष - मलावी की रंजकहीनता विकास को एक चुनौती

विश्व स्वास्थ्य संगठन 7 अप्रैल को ‘विश्व स्वास्थ्य दिवस’ मनाता है। ‘विश्व स्वास्थ्य दिवस’ के मौके पर अगर हम विभिन्न देशों के विकास, रहन-सहन और सेहत पर कोई टिप्पणी करें तो उसमें हमें मलावी की रंजकहीनता पर जरुर कुछ जानने की जरुरत है। कैसे यह देश रंजकहीनता की त्रासदी झेल रहा है। विकास के ढेकेदार आधुनिकता के लाख दावे कर लें पर अभी भी इस जहां में कितने लोग ऐसे हैं जो एक सामान्य जीवन को पाने को तरस रहे हैं। पिछले कई सालों में देश-विदेश हर जगह कई ऐसी बीमारियों के बारे में सुनने को मिला, जिसका नाम हमने पहले कभी नहीं सुना था जैसे इबोला, चिकनगुनिया, बर्ड फ्लू और स्वाइन फ्लू आदि। इन बीमारियों ने देश-विदेश हर जगह लोगों के बीच अपना पांव पसार लिया है। इन बीमारियों से ग्रसित लोगों की परेशानियों और मृत्यु दर के आंकड़ों को देखकर यह अनुमान लगाया गया कि ये रोग कितने घातक साबित हो रहे हैं। ऐसी बीमारियों से पीड़ित लोग इनके बारे में पूरी जानकारी न होने के कारण या फिर गलत इलाज होने के कारण अपनी जान गंवा बैठते हैं। ऐसा कहा जाना गलत न होगा कि कुछ देशों की खुशहाली पूरे दुनिया की रौनक नहीं कही जा सकती। आज भी कहीं-कहीं मानव समाज में गरीबी, भूख, कुपोषण का घनघोर अंधेरा व्याप्त है। इसी बानगी में आप मलावी की रंजकहीनता को जानेंगे तो आपको निराशा होगी।
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