पिछले कुछ दिनों से पुरस्कार लौटा रहे लेखकों की सूची में नया नाम शायर मुनव्वर राणा का जुड़ गया है। इस मौके पर उन्होंने कहा, विरोध दर्ज कराने का इससे मजबूत और कोई जरिया नहीं है।
उदय प्रकाश, अशोक वाजपेयी और नयनतारा सहगल सहित 21 लेखकों द्वारा साहित्यिक सम्मान लौटाने की घोषणा पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हिन्दू धर्म को विकृत करने और भारत को नष्ट करने के प्रयासों में सेकुलर ग्रंथि से पीड़ित कुछ असहिष्णु कलमकारों ने अपने तमगे लौटा दिए हैं।
देश में सांपद्रायिक हिंसा की बढ़ती घटनाओं से आहत होकर अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने वाले साहित्यकारों की सूची में मलयाली लेखिका सारा जोसेफ का नाम भी जुड़ गया है। जोसेफ को वर्ष 2003 में उनकी रचना अलहयूद पेनमक्कल के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया था।
ए आर रहमान के लिए आज दोहरी खुशी का दिन है। एक तरफ उन्हें हृदयनाथ मंगेशकर पुरस्कार मिलने की घोषणा हुई है तो दूसरी ओर ब्राजील के कालजयी फुटबॉल खिलाड़ी पेले अपने कोलकाता प्रवास के दौरान उनसे मिलेंगे।
देश में लगातार बढ़ रही सांप्रदायिक घटनाओं के विरोध में प्रसिद्ध लेखिका नयनतारा सहगल के बाद हिंदी के जाने-माने साहित्यकार अशोक वाजपेयी ने भी साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने की घोषणा की है। इससे पहले उदय प्रकाश भी कन्नड़ विद्वान एमएम कलबुर्गी की हत्या के विरोध में यह पुरस्कार लौटा चुके हैं।
देश में लगातार बढ़ रही सांप्रदायिक घटनाओं के विरोध में प्रसिद्ध लेखिका नयनतारा सहगल के बाद हिंदी के जाने-माने साहित्यकार अशोक वाजपेयी ने भी साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने की घोषणा की है। इससे पहले उदय प्रकाश भी कन्नड़ विद्वान एमएम कलबुर्गी की हत्या के विरोध में यह पुरस्कार लौटा चुके हैं।
भारत, अमेरिका और जापान के बीच बुधवार विदेश मंत्री स्तर की पहली बैठक होगी जो एशिया प्रशांत क्षेत्र की तीन शक्तियों की गोलबंदी प्रतिबिंबित करती है जबकि अधिकारियों का कहना है कि इसका लक्ष्य क्षेत्र में शांति, समृद्धि और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी और जापानी विदेश मंत्री फुमियो किशीदा संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र से इतर मिलेंगे।
तीसरी दफा ऐसा हुआ है कि देश में लगातार दूसरे साल सूखा पड़ा। मराठवाड़ा, बुंदेलखंड, पूर्वी उत्तर-प्रदेश और उत्तर-पूर्वी राजस्थान सूखे की मार झेल रहे हैं। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। देश का ध्यान धरतीपुत्र की खराब हालत की ओर दिलाने के लिए स्वराज अभियान के बैनर तले कई संस्थाएं और बुद्धिजीवि लोग देश के सूखाग्रस्त इलाकों में एक यात्रा का आयोजन कर रहे हैं। इस यात्रा को संवेदन यात्रा का नाम दिया गया है।