अनुसूचित जाति एवं जनजाति पर जातिगत टिप्पणी को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला दिया है। अब सोशल मीडिया पर इन समुदायों के खिलाफ जातिवादी टिप्पणी करना अपराध माना जाएगा।
पीएम नरेंद्र मोदी 25 जून को अमेरिका पहुंचेंगे, अगले ही दिन यानी 26 को उनकी और अमेरीकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात होगी। गौरतलब है कि दोनों के बीच यह पहली औपचारिक मुलाकात होगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
आज दलित समुदाय हर दृष्टि से चौराहे पर खड़ा है। कई दशक बाद दलित राजनीति लगभग हाशिए पर पंहुच गई है। दलित जन प्रतिनिधियों से दलित समुदाय एकदम निराश है। वे समुदाय पर होने वाले अत्याचार के मसलों पर कुछ नहीं बोलते हैं। अब दलित समाज में उन्हें खुले मंचों से पूना पैक्ट की खरपतवार कहना शुरू कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने सोशल मीडिया साइट के माध्यम से कहा कि देश में सभी प्रकार के जाति आधारित आरक्षण बंद होने चाहिए। उन्होंने इसे देश के लिए एक अभिशाप बताया है।
नक्सलियों का गढ़ और दुर्गम वन्य क्षेत्र माने जाने वाले छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ पर सरकार की रणनीति तैयार हो रही है। सरकार और प्रशासन से अछूते रहे इस इलाके में सरकार ने अब सर्वे कराना शुरू कर दिया है।
जाति के आधार पर चल रहे भेदभाव पर खेद व्यक्त करते हुए केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि दलित जाति के जो लोग कुएं खोदते हैं और मूर्तियां बनाते हैं, उन्हें कुएं से पानी पीने एवं मंदिरों में प्रवेश से रोका जाना आज के युग में ठीक नहीं है। लोगों में ऐसी सोच बदलनी चाहिए।
देश के छोटे बड़े शहरों में भारी-भरकम स्कूल बैग, टिफिन बॉक्स तथा पानी की बोतल लेकर झुकी कमर और तिरछी चाल चलते मासूम स्कूल आते जाते दिख जाएंगे। इन मासूमों से स्कूली बस्ते सहजता से उठते भी नहीं, लेकिन वे स्कूल बैग ढोने के लिए मजबूर हैं। बच्चे अपने वजन का 35 प्रतिशत बोझ बस्ते के रूप में रोजाना पीठ पर ढोते हैं।
प्यार भले ही अंधा होता है लेकिन आजकल प्यार की ओर कदम बढ़ाने वाले लोगों की निगाहें अपने साथी के बजाए अपने फोन पर ज्यादा अटकी होती हैं। एक नये अध्ययन में यह पता चला है कि डेट पर लोग अपने साथी पर ध्यान देने की बजाए अपने मोबाइल फोन में ज्यादा मशगूल रहते हैं।
गोवा और पंजाब की तरह इस बार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी बम्पर मतदान होने की सम्भावना है। उद्योग मंडल एसोचैम के एक ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक राज्य के ज्यादातर नये और अन्य युवा मतदाताओं ने इस बार वोट डालने का इरादा जाहिर किया है।
भारत की कुल 58 प्रतिशत संपत्ति पर देश के मात्र एक प्रतिशत अमीरों का आधिपत्य है जो देश में बढ़ती आय विषमता की ओर संकेत करता है। यह आंकड़ा वैश्विक 50 प्रतिशत के आंकड़े से अधिक है। यह बात एक नए अध्ययन में सामने आई है।