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स्वामी बाज नहीं आएंगे, अब कहा प्रेस्टीट्यूट्स मीडिया बनाता है मनगढ़त कहानियां

स्वामी बाज नहीं आएंगे, अब कहा प्रेस्टीट्यूट्स मीडिया बनाता है मनगढ़त कहानियां

भाजपा के सांसद सुब्रमणियम स्वामी टिप्‍पणी करने से बाज नहीं आएंगे। देश के आर्थिक विशेषज्ञों और राजनीतिक हस्तियों पर वार करने के बाद अब उन्होंने मीडिया पर भी हमला बोला है। स्‍वामी नेे ट्वीट में कहा है प्रेस्टीट्यूट्स हर रोज जान बूझकर झूठी कहानियां बनाते हैं और यह उम्मीद करते हैं कि मैं उनके उकसावे में आकर जवाब दूंगा।
सोशल मीडिया में अर्नब की खिंचाई, पीएम माेदी के इंटरव्‍यू से अहम मसलेे रहे गायब

सोशल मीडिया में अर्नब की खिंचाई, पीएम माेदी के इंटरव्‍यू से अहम मसलेे रहे गायब

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने पहली बार भारतीय मीडिया को इंटरव्यू दिया। जिस पर सोशल मीडिया में चर्चा जारी है। अधिकांश लोगों की राय है कि ज्‍वलंत मसलों पर टाइम्‍स नाउ के अर्नब गोस्‍वामी ने पीएम मोदी को अटैैक नहीं किया। लिहाजा यह इंटरव्‍यू भी एक खानापूर्ति ही साबि‍त होकर रह गया।
मादक पदार्थों के जहर से मुकाबले के लिए समन्वित प्रयास जरूरी: राष्ट्रपति

मादक पदार्थों के जहर से मुकाबले के लिए समन्वित प्रयास जरूरी: राष्ट्रपति

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने रविवार को कहा कि आतंकवाद, तस्करी और मादक पदार्थों से जुड़ी गतिविधियां एक दूसरे से जुड़ी हैं और देश के सामाजिक जीवन को तबाह करने वाली इन बुराइयों की कड़ियों को तोड़ने के लिए समन्वित प्रयास जरूरी हैं।
क्‍या देश में व्‍हाटसएप पर प्रतिबंध लगेगा, 29 जून को फैसला

क्‍या देश में व्‍हाटसएप पर प्रतिबंध लगेगा, 29 जून को फैसला

देश की शीर्ष अदालत आगामी 29 जून को एक याचिका के आधार पर मैसेजिंग प्लेटफार्म व्‍हाटसएप पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर सुनवाई करेगा। याचिका में व्‍हाटसएप की इंड टू इंड एन्क्रिप्शन को देश के लिए खतरनाक बताया गया है। याचिका में कहा गया है कि इंड टू इंड एन्क्रिप्‍शन सर्विस आतंकवादियों को एक ऐसा कम्युनिकेशन टूल देती है, जिसको रोकना असंभव है।
दिमाग को आराम देने के लिए सोशल मीडिया का प्रयोग करते हैं कर्मचारी

दिमाग को आराम देने के लिए सोशल मीडिया का प्रयोग करते हैं कर्मचारी

अधिकारियों और नियोक्ताओं के लिए ये खबर अहम है कि अगर आप किसी कर्मचारी को कार्यालय में सोशल मीडिया का उपयोग करते हुए देखते हैं तो झल्लाने की जरूरत नहीं है क्योंकि संभव है कि अपने दिमाग को आराम देने के लिए वह सोशल मीडिया का उपयोग कर रहा हो।
महाराष्ट्र: सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भाजपा-शिवसेना में तनाव

महाराष्ट्र: सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भाजपा-शिवसेना में तनाव

अगले साल निर्धारित मुंबई नगर निगम चुनावों से पहले शिवसेना नेतृत्व को गलत ढंग से पेश करती सोशल मीडिया पोस्टों के वायरल होने से भाजपा और शिवसेना के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। माना जा रहा है कि सोशल मीडिया पर ये पोस्ट भाजपा के खिलाफ शिवसेना की टीका-टिप्पणियों के जवाब में डाली गई हैं।
चीन की नास्तिक कम्‍युनिस्‍ट सरकार ने रोजे पर लगाया बैन

चीन की नास्तिक कम्‍युनिस्‍ट सरकार ने रोजे पर लगाया बैन

चीन में कम्‍युनिस्‍ट पार्टी की सरकार है। पार्टी विचारधारा से नास्तिक है। लिहाजा सरकार ने चीन में रोजे रखने पर प्रति‍बंध लगा दिया है। इस तरह यहां रहे रहे मुस्लिम समुदाया के लोग रमजान के महीने में रोजा नहीं रख पाएंगे। यह बैन खासकर उन जगहों के लिए है जहां पर मुस्लिम लोग बहुल संख्या में रहते हैं।
क्षेत्रीय भाषाओं में पत्रकारिता पढ़ाएगा आईआईएमसी

क्षेत्रीय भाषाओं में पत्रकारिता पढ़ाएगा आईआईएमसी

क्षेत्रीय मीडिया की प्रगति के मद्देनजर प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) मलयालम और मराठी सहित क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्यक्रम शुरू करने पर विचार कर रहा है। संस्थान ने डिजिटल मीडिया के विस्तार को ध्यान में रखते हुए अपने दिल्ली परिसर में एक न्यू मीडिया एंड आईटी विभाग भी स्थापित किया है।
नीतीश की मंशा, जहां भाजपा की सरकारें, मोदी वहां शराबबंदी लागू कराएं

नीतीश की मंशा, जहां भाजपा की सरकारें, मोदी वहां शराबबंदी लागू कराएं

बिहार में शराबबंदी करने के बाद मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा को भी उन राज्‍यों में शराबबंदी लागू कराने को कहा है, जहां जहां उसकी सरकारें हैं। कुमार ने जोद देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा शासित राज्यों में शराब बंदी जल्द से जल्द लागू करनी चाहिए। नीतीश ने रविवार को पटना में जनता दल यूनाइटेड के सदस्यता अभियान की शुरुआत करने के बाद पार्टी कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही।
हर्षमंदर की नजर में मोदी के राज में काम कम, बखान ज्यादा हुआ

हर्षमंदर की नजर में मोदी के राज में काम कम, बखान ज्यादा हुआ

सामाजिक कार्यकर्ता हर्षमंदर की नजर में पीएम नरेंद्र मोदी के दो साल के शासन में देश में काम कम और उसका बखान ज्‍यादा हुआ है। आईएएस अधिकारी रहे हर्षमंदर ने कहा कि आज के भारत में दो साल पहले के मुकाबले विषमताएं ज्‍यादा बढ़ी हैं। आर्थिक और सामाजिक अलगाव का यहां अब बोलबाला है।
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