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बिहार निश्चित ही चुनौती, पर जीत तय- अमित शाह

बिहार निश्चित ही चुनौती, पर जीत तय- अमित शाह

बिहार विधानसभा चुनाव पर पूरे देश की नजर है। चुनाव परिणाम जो भी हो लेकिन सभी दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। मुख्य‍ मुकाबला भाजपानीत राजग और महागठबंधन (जदयू, राजद, कांग्रेस) के बीच है। लोकसभा चुनाव के बाद राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में जीत की लय (दिल्ली को छोडक़र) बरकरार रखने के लिए भाजपा कड़ी मेहनत कर रही है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह आश्वत हैं कि इस चुनाव में भी जीत निश्चित है। शाह के व्यस्त कार्यक्रमों के बीच आउटलुक के विशेष संवाददाता ने पटना में विस्तार से बात की। पेश है प्रमुख अंश-
नीतीश कटारा के हत्यारों को नहीं होगी फांसी

नीतीश कटारा के हत्यारों को नहीं होगी फांसी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, संभवतः नीतीश और भारती यादव अपने दोस्त की शादी में जिस तरह डांस कर रहे थे उसने भारती के भाइयों विकास और विशाल को गुस्सा दिला दिया और उन्होंने नीतीश का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी।
इस मोर्च पर तो नीतीश सरकार ने कमाल कर दिखाया

इस मोर्च पर तो नीतीश सरकार ने कमाल कर दिखाया

अपने 10 वर्ष के कार्यकाल में नीतीश कुमार ने छोटे बच्चों में पूर्ण टीकाकरण को 18.6 फीसदी से 70 फीसदी तक पहुंचाने में कामयाबी हासिल की। यह देश के औसत के बराबर है।
विधि आयोग का स्‍थायी विधान ठंडे बस्ते में

विधि आयोग का स्‍थायी विधान ठंडे बस्ते में

विधि आयोग को एक स्थायी संस्था का रूप देने के प्रस्ताव को फिलहाल सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है और हर तीन साल पर पुनर्गठन की मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने का फैसला किया है।
घोषणा नहीं केवल विजन है भाजपा का

घोषणा नहीं केवल विजन है भाजपा का

भारतीय जनता पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव में घोषणापत्र जारी करने के बजाय विजन के जरिए बिहार के विकास के लिए उठाए जाने वाले कदमों की चर्चा की। विजन डाक्यूमेंट में भाजपा ने मेक इन इंडिया की तर्ज पर मेक इन बिहार व डिजिटल इंडिया पर जोर दिया है। इसके साथ ही लैपटाप, स्कूटी व रंगीन टीवी बांटने पर भी इस डाक्यूमेंट में जोर दिया गया है। लेकिन यह विजन क्या बिहार की जनता को लुभा पाएगी इसको लेकर राजनीतिक विश्लेषक संशय ही जताते हैं।
सज चुका है बिहार के चुनावी महाभारत का मैदान

सज चुका है बिहार के चुनावी महाभारत का मैदान

बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए होने जा रहे चुनावी महाभारत के लिए मैदान तकरीबन सज चुका है। एक दूसरे को शिकस्त देने के इरादे से दोनों राजनीतिक गठबंधन अपने सेनापतियों के साथ आमने सामने डट गए हैं। तीसरी ताकत के नाम पर कुछ महारथी खुद के जीतने के लिए नहीं बल्कि किसी और को हराने और किसी और की जीत में मददगार साबित होने की रणनीति के तहत अगल बगल से या फिर नेपथ्य में रह कर भी इस चुनावी महाभारत में अपनी भूमिका के लिए उद्धत हैं।
प्रचार के हल्ला-बोल में चुनावी गणित का उतार-चढ़ाव

प्रचार के हल्ला-बोल में चुनावी गणित का उतार-चढ़ाव

शुरुआती दौर में बिहार के शहरों में भाजपा प्रचार में आगे दिख रही है। अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए ऊंची जातियों को सक्रिय करने में सफल रही है, लेकिन आपसी फूट भी जबर्दस्त है। बिहारी मतदाता अपने पत्ते अभी खोलने को तैयार नहीं
लालू-शरद की भी बात नहीं माने मुलायम

लालू-शरद की भी बात नहीं माने मुलायम

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को जदयू अध्यक्ष शरद यादव और राजद अध्यक्ष लालू यादव भी नहीं मना पाए। लालू और शरद ने मुलायम से मुलाकात के बाद कहा कि अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
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