एक ओर जहां महागठबंधन तोड़ नीतीश कुमार ने बिहार में भाजपा के साथ हाथ मिलाकर नई सरकार बना ली है, तो वहीं जद (यू) के वरिष्ठ नेता शरद यादव ने बगावती तेवर अख्तियार कर लिया है।
जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव की ओर से आयोजित ‘साझा विरासत बचाओ सम्मेलन’ में विपक्षी दलों ने एकजुट होकर अपनी ताकत का अहसास कराया। सम्मेलन में जुटे विपक्षी नेताओं ने गुजरात विधानसभा तथा देश के अगले आम चुनाव के लिए विघटनकारी ताकतों को रोकने के लिए ठोस रणनीति बनाने पर जोर दिया। सम्मेलन में विपक्षी दलों के नेता जिस तरह से जुटे उसे सियासी हलकों में अहम माना जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। गुजरात के कांग्रेसी विधायकों को बेंगलुरु में ठहराने वाले मंत्री के कई ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापेमारी की है।
गुजरात कांग्रेस के छह विधायकों के भाजपा का दामन थामने के बाद पार्टी ने बेंगलुरु में अपने 44 विधायकों की मीडिया के सामने परेड कराई। साथ ही, कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा ने उनके विधायकों को 15-15 करोड़ रुपये का लालच दिया।
राज्यसभा चुनाव से पहले गुजरात कांग्रेस के विधायकों का इस तरह इस्तीफा देना पार्टी के लिए बड़ी मुश्किलों खड़ा कर सकता है। गुजरात में इस तरह की स्थिति को देखते हुए कांग्रेस ने अपने 46 विधायकों को बेंगलुरू रवाना कर दिया है।