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भेदभाव नहीं करता योग: बान की-मून

भेदभाव नहीं करता योग: बान की-मून

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने इस बात पर जोर दिया है कि योग भेदभाव नहीं करता है। उन्होंने कहा कि जब अपनी भारत यात्रा के दौरान उन्होंने अपना पहला आसन करने की कोशिश की तो इससे उन्हें एक संतुष्टि की अनुभूति हुई।
कभी दिया अंडा, अब क्यों पलटे शिवराज

कभी दिया अंडा, अब क्यों पलटे शिवराज

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जो आज आईसीडीएस योजना के तहत अंडा दिए जाने की इतनी मुखालफत कर रहे हैं उन्होंने ही सात साल पहले होशंगाबाद जिले में अंडा दिए जाने का प्रस्ताव पारित किया था। उस समय वह मुख्यमंत्री थे। होशंगाबाद के आदिवासी ब्लॉक में अंडा दिए जाने के लिए उन्होंने प्रोजेक्ट शक्तिमान को हरी झंडी दी थी। इस प्रोजेक्ट का नाम फिल्मकार मुकेश खन्ना के सीरियल शक्तिमान के नाम पर था। प्रोजेक्ट के तहत कुपोषित बच्चों को उबला अंडा और उबले आलू देने का प्रावधान था लेकिन आज वही शिवराज सिंह हैं जो अंडा न दिए जाने की बात पर अटल हैं।
समीक्षा - दिल नहीं धड़का

समीक्षा - दिल नहीं धड़का

यदि दिल ऐसे ही धड़कता है तो फिर भगवान ही बचाए। जोया अख्तर (निर्देशक) यदि इस फिल्म का नाम दिमाग बंद रहने दो रखतीं तो एकदम बढ़िया रहता। जोया को समझना चाहिए कि कलाकारों का जमघट भर लगा देने से कोई फिल्म हिट नहीं हो जाती।
हम गिलगित-बालतिस्तान वासियों के संघर्ष के साथ हैं

हम गिलगित-बालतिस्तान वासियों के संघर्ष के साथ हैं

भारत-पाकिस्तान विवादों में ताजा कड़ी जुड़ गई। पाकिस्तान अपने कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित- बालतिस्तान क्षेत्र में नया चुनाव करा रहा है। मालूम हो कि अपने हिस्से वाले कश्मीर को पाकिस्तान अनेक अलग-अलग टुकड़ों में पहले ही बांट चुका है जिनमें एक गिलगित-बालतिस्तान है। पाकिस्तान एक हिस्सा चीन को सौंप चुका है। दो अन्य हिस्से हैं – हुंजा या उत्तरी इलाके और पाक अधिकृत कश्मीर जिसमें मीरपुर और मुजफ्फराबाद के क्षेत्र हैं। भारत सरकार इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज करा चुकी है। इस तथा अन्य मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव, जम्मू-कश्मीर के पार्टी प्रभारी और भारतीय जनता पार्टी में विदेशी मामलों को देख रहे राम माधव ने आउटलुक हिंदी से बात की।
चेखव की कहानी:  छुई-मुई

चेखव की कहानी: छुई-मुई

अंतोन चेखव (1860-1904) को रूसी साहित्य में ही नहीं बल्कि विश्व साहित्य में महानतम कहानीकारों में से एक माना जाता है। उन्होंने न केवल कहानियां लिखीं, बल्कि चार कालजयी नाटक भी लिखे, जिनमें ‘चेरी का बगीचा’ और ‘तीन बहनें’ नाटकों को अप्रतिम माना जाता है। उनकी कहानियां विश्व के समीक्षकों और आलोचकों में बहुत सम्मान के साथ सराही जाती हैं। चेखव पेशे से चिकित्सक थे। अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उन्होंने कहानियां लिखना शुरू किया था और बाद में वह लेखक बन गए। वह कहा करते थे, डॉक्टरी मेरी धर्मपत्नी है और साहित्य प्रेमिका।
पचौरी की जमानत तत्काल रद्द नहीं होगी

पचौरी की जमानत तत्काल रद्द नहीं होगी

यौन उत्पीड़न के एक मामले में टेरी के महानिदेशक आर के पचौरी को निचली अदालत से मिली अग्रिम जमानत दिल्ली उच्च न्यायालय ने तत्काल रद्द करने से इंकार कर दिया है।
बल्लेबाजी पावरप्ले को फ्यूज करने की तैयारी

बल्लेबाजी पावरप्ले को फ्यूज करने की तैयारी

सीमित ओवरों के प्रारूप में संतुलन काफी हद तक बल्लेबाजों के पक्ष में होने की बात स्वीकार करते हुए आईसीसी की क्रिकेट समिति ने आज बल्लेबाजी पावर प्ले हटाने के अलावा अंतिम 10 ओवर में 30 गज के घेरे के बाहर पांच क्षेत्ररक्षकों को खड़ा होने की स्वीकृति देने की सिफारिश की।
भारत में मोदी पर कम लोग विश्वा‍स करते हैं: शास्त्री

भारत में मोदी पर कम लोग विश्वा‍स करते हैं: शास्त्री

कांग्रेस नेता अनिल शास्त्री ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार सहित पिछले 30 वर्ष के दौरान रहने वाली पूर्ववर्ती सरकारों की विदेशी धरती पर आलोचना इसलिए की क्योंकि देश में उनका विश्वास करने वाले अधिक लोग नहीं हैं।
विवादित कॉलेजियम एवं न्यायिक नियुक्ति आयोग पर राष्ट्रपति हस्तक्षेप करेंः बार एसो

विवादित कॉलेजियम एवं न्यायिक नियुक्ति आयोग पर राष्ट्रपति हस्तक्षेप करेंः बार एसो

अखिल भारतीय बार संघ (एआईबीए) ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से शिकायत की है कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में कम से कम 125 जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में देरी पूर्ववर्ती कॉलेजियम प्रणाली खत्म करने से उत्पन्न हुई संवैधानिक शून्यता के कारण हो रही है। इसके अलावा राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) के गठन में भी देर की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट और सरकार बड़े टकराव की ओर

सुप्रीम कोर्ट और सरकार बड़े टकराव की ओर

बीते हफ्ते सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय खंड पीठ के सामने जिस तरह सरकार और पीठ के बीच तीखे शब्दों का आदान-प्रदान हुआ, उसे देखते हुए अब तक फुसफुसाए जा रहे कुछ सवाल थोड़ा ज्यादा जोर से सुनाई पडऩे लग गए हैं। क्या कार्यपालिका और न्यायपालिका एक बड़े टकराव की ओर बढ़ रही हैं? क्या संसद ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) विधेयक पारित करने में हड़बड़ी दिखाई ?
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