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अरुणा शानबाग की मौत और मुक्ति की जद्दोजहद

अरुणा शानबाग की मौत और मुक्ति की जद्दोजहद

पिछले 42 साल में उसने एक शब्द नहीं बोला न ही एक कदम भी वह चल पाई। जीवन के चार दशक उसने बिस्तर पर बिताए जबकि 23 साल की उम्र में उसने भी एक सुखमय विवाहित जीवन के सपने देखे थे और उसके सपने सच होने में केवल कुछ दिनों का ही फासला था। लेकिन महज एक पुरुष की हवस ने उसके जीवन को नरक में बदल दिया।
42 साल कोमा के बाद अरुणा शानबाग का निधन

42 साल कोमा के बाद अरुणा शानबाग का निधन

करीब 42 सालों से जिंदा लाश की तरह केईएम अस्पताल के वॉर्ड नंबर 4 में भर्ती अरुणा शानबाग की मौत हो गई। तीन दिन पहले उन्हें निमोनिया के चलते आईसीयू में रखा गया था।
लोकसभा में उठा रेल यात्रियों की सुरक्षा का मुद्दा

लोकसभा में उठा रेल यात्रियों की सुरक्षा का मुद्दा

लोकसभा में कांग्रेस के एक सदस्य ने रेल यात्रियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया और इस दौरान सियालदाह-कृष्णानगर लोकल ट्रेन के एक डिब्बे में मंगवार तड़के हुए विस्फोट का जिक्र करते हुए सरकार पर यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाया है।
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