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Search Result : "Assam flood crisis"

जम्मू के बाढ़ पीड़ित किसानों को 32 रुपये का मुआवजा

जम्मू के बाढ़ पीड़ित किसानों को 32 रुपये का मुआवजा

सन 2014 में आई विनाशकारी बाढ़ से अब तक उबर नहीं पाए जम्मू के किसानों को उस समय एक और झटका लगा जब राज्य सरकार की ओर से उन्हें महज 32 रुपये से लेकर 113 रुपये की राशि वाला चेक प्रदान किया गया।
केदारनाथ त्रासदी के नाम पर लूट

केदारनाथ त्रासदी के नाम पर लूट

उत्तराखंड में जून 2013 में आई विनाशकारी बाढ़ से मची तबाही के दौरान हजारों लोग कई दिनों तक भूखे रहने को मजबूर थे, बच्चे भूख से बिलबिला रहे थे, सर्दी- बीमारी काल बन निगल रही थी, उस वक्त राहत के काम में जुटे राज्य सरकार के अधिकारी मटन, चिकन और बेहतरीन खाने का लुत्फ उठा रहे थे। सूचना अधिकार कानून (आरटीआई) के जरिये हुए इस सनसनीखेज खुलासे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
जेटली ने गिनाई सरकार की उपलब्धियां

जेटली ने गिनाई सरकार की उपलब्धियां

केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के एक साल पूरे होने पर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली सरकार के एक साल के लेखे-जोखे के सा‌थ शुक्रवार को मीडिया के सामने आए। वैसे लोगों को उम्मीद थी कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मौके पर सामने आएंगे मगर ऐसा नहीं हुआ। जेटली ने पहले सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और फिर पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए।
सुखोई-30 दुर्घटनाग्रस्त, पायलट सुरक्षित

सुखोई-30 दुर्घटनाग्रस्त, पायलट सुरक्षित

असम के नागौन जिले के पास लाओखोवा में सुखोई-30 लड़ाकू विमान मंगलवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया लेकिन सौभाग्य यह रहा कि पायलट और सह-पायलट विमान से सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे।
किसानों को आज फिर टिकैत जैसे नेता की जरुरत

किसानों को आज फिर टिकैत जैसे नेता की जरुरत

चौ. टिकैत के आन्दोलन में न तो नेताओं की भरमार थी और न पदाधिकारियों की कतार। इस आन्दोलन में शामिल हर व्‍यक्ति सिर्फ किसान था। चौ. टिकैत जनता के बीच से आए थे और अाखिरी दम तक जनता के बीच रहे। यही सादगी और खरापन उनकी पहचान बन गया। उनकी मृत्यु के बाद किसान आन्दोलन में पैदा खालीपन की भरपाई आज तक नहीं हो पाई है।
मोदी का यह कैसा सहकारी संघवादः गोगोई

मोदी का यह कैसा सहकारी संघवादः गोगोई

केंद्र पर अपने हमले जारी रखते हुए असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि वह बांग्लादेश के साथ भूमि सीमा समझौते (एलबीए) के दायरे से असम को बाहर करने का प्रस्ताव कर राजनीतिक फायदे की खातिर दोहरा रवैया अपना रहे हैं।
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