इससे पहले जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.1 फीसदी रही थी। अर्थशास्त्री जीडीपी ग्रोथ में गिरावट की मुख्य वजह नोटबंदी को मान रहे हैं।
बाबूमोशाय बंदूकबाज फिल्म के शीर्षक से यह तो पता चल रहा है कि यह बंदूक की कहानी है। बंदूक होगी तो गोलियां भी होंगी, गोलियां होंगी तो गालियां खुद ब खुद चली आएंगी और खून...वह तो फैलेगा ही।
कोलकाता में पढ़ाई के दिनों में ही बिदिता बाग ने मॉडलिंग शुरू कर दी थी। ढेरों बांग्ला फिल्में कर चुकीं बिदिता हिन्दी में ‘फ्रॉम सिडनी विद लव’ और ‘एक्स-पास्ट इज प्रेजेंट’ में आ चुकी हैं। अब वह ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’ में नवाजुद्दीन सिद्दिकी की नायिका बन कर आ रही हैं।
देश के कई हिस्सों में टमाटर के आसमान छूते दामों ने लोगों को परेशान कर दिया है। इन दिनों जहां टमाटर के दाम 70-80 रुपये प्रति किलो हैं, वहीं एक जगह ऐसी है जहां टमामटर 10 रुपये किलो बिक रहा है।
मोदी सरकार द्वारा देश में नोटबंदी लागू करने के बाद कैशलेस इकॉनमी को प्रचारित किया गया। इस बीच हैरान करने वाला आंकड़ा आया है, जिसके अनुसार नोटबंदी के बाद कार्ड से लेन-देन में सिर्फ 7 फीसदी तक बढ़ोत्तरी हो सकी है।
पूर्व सीएम अखिलेश यादव की तस्वीर वाले बैग भले ही उत्तर प्रदेश में धूल फांक रहे हों, लेकिन गुजरात में ये बैग स्कूली बच्चों को बांटे जा रहे हैं। गुजरात सरकार की तरफ स्कूली बच्चों को बांटे गए इन बैग्स पर अखिलेश यादव की तस्वीर लगी मिली है।
एकाएक बड़े फैसले लेने वाली उत्तर प्रदेश की योगी ने सभी प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में शनिवार को 'नो बैग डे' करने का फैसला किया है। इस दिन सिर्फ ज्वॉयफुल एक्टिसविटी ही होंगी। उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने शिक्षा विभाग के अफसरों के साथ हुई बैठक के बाद यह फैसला किया। ो
शिल्पा शिंदे को कम समय में बहुत लोकप्रियता मिली और वह अपने नाम के बजाय भाभीजी से ज्यादा लोकप्रिय हो गईं। फरवरी 2016 में उन्होंने फीस के विवाद के चलते बढ़िया टीआरपी बटोर रहा धारावाहिक भाभीजी घर पर हैं छोड़ दिया था। अब उन्हें सिने और टीवी आर्टिस्ट असोसिएशन (सीआईएनटीएए) से भी बाहर कर दिया गया है। धारावाहिक भाभी जी से निकलने के बाद वह बिना घर यानी काम की थीं अब तो उन्हें संगठन से भी हाथ धोना पड़ा है।
वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने मंगलवार को कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में 7.1 प्रतिशत की दर से वृद्धि करेगी जबकि अगले दो वित्त वर्ष में यह बढ़कर 7.7 प्रतिशत तक रहेगी।
देश के छोटे बड़े शहरों में भारी-भरकम स्कूल बैग, टिफिन बॉक्स तथा पानी की बोतल लेकर झुकी कमर और तिरछी चाल चलते मासूम स्कूल आते जाते दिख जाएंगे। इन मासूमों से स्कूली बस्ते सहजता से उठते भी नहीं, लेकिन वे स्कूल बैग ढोने के लिए मजबूर हैं। बच्चे अपने वजन का 35 प्रतिशत बोझ बस्ते के रूप में रोजाना पीठ पर ढोते हैं।